Lucknow News: मस्जिद सील होने पर भड़के छात्र, हिंदू-मुस्लिम एकता की तस्वीर वायरल

लखनऊ विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक परिसर में 'गंगा-जमुनी तहजीब' की अनूठी मिसाल देखने को मिली। प्रशासन द्वारा जर्जर लाल बारादरी मस्जिद को सील करने के विरोध में छात्र सड़क पर उतर आए। जब मुस्लिम छात्रों ने बाहर नमाज अदा की, तो उनके हिंदू सहपाठियों ने चारों ओर सुरक्षा घेरा (मानवीय श्रृंखला) बनाकर भाईचारे का संदेश दिया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

फ़रवरी 23, 2026

Lucknow News: लखनऊ विश्वविद्यालय (LU) का ऐतिहासिक परिसर सोमवार को भारी हंगामे और उसके बाद उपजी भावनात्मक एकता का गवाह बना। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा लाल बारादरी स्थित मस्जिद को सील किए जाने के विरोध में छात्र सड़क पर उतर आए, जहां विरोध प्रदर्शन के दौरान ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ का एक दुर्लभ दृश्य देखने को मिला।

सिंगापुर में CM योगी ने दिग्गज उद्योगपति से की मुलाकात, निवेश को लेकर की महत्वपूर्ण बातचीत

प्रशासन की सख्त घेराबंदी और छात्रों का आक्रोश

बताते चले कि, लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा और जर्जर भवन का हवाला देते हुए ऐतिहासिक लाल बारादरी इमारत और उसके भीतर स्थित मस्जिद के मुख्य द्वार को अचानक सील कर दिया। जैसे ही छात्रों को भारी बैरिकेडिंग और तालेबंदी की सूचना मिली, परिसर का माहौल गरमा गया। आक्रोशित छात्रों ने बिना किसी पूर्व सूचना के की गई इस कार्रवाई को अपनी धार्मिक स्वतंत्रता और विरासत पर हमला बताया। प्रदर्शनकारियों ने न केवल नारेबाजी की, बल्कि प्रशासन द्वारा लगाई गई बैरिकेडिंग को भी उखाड़ फेंका।

हिंदू-मुस्लिम एकता की अनूठी ‘मानवीय श्रृंखला’

विरोध प्रदर्शन के बीच एक ऐसी तस्वीर उभरी जिसने सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर ली हैं। जब मस्जिद का गेट बंद होने के कारण मुस्लिम छात्र बाहर जमीन पर ही नमाज अदा करने बैठे, तो उनके हिंदू सहपाठी ढाल बनकर उनके चारों ओर खड़े हो गए। हिंदू छात्रों ने एक-दूसरे का हाथ थामकर एक मजबूत सुरक्षा घेरा (मानवीय श्रृंखला) बनाया ताकि नमाज पढ़ रहे छात्रों को कोई बाधा न पहुंचे। यह दृश्य नवाबों के शहर की उस तहजीब को जीवंत कर गया, जहां मजहब से ऊपर उठकर इंसानी रिश्तों और आपसी सम्मान को प्राथमिकता दी जाती है।

200 साल पुरानी लाल बारादरी का ऐतिहासिक महत्व

विवाद के केंद्र में स्थित लाल बारादरी कोई साधारण ढांचा नहीं है। इसका निर्माण वर्ष 1800 ईस्वी में नवाब नसीरुद्दीन हैदर द्वारा कराया गया था, जो लखनऊ विश्वविद्यालय की स्थापना से भी बहुत पहले का है। यह भव्य इमारत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित है। छात्रों का तर्क है कि इस प्राचीन धार्मिक स्थल और विरासत को बंद करना उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ है, जबकि यह भवन शहर की पहचान का एक अभिन्न हिस्सा है।

सुरक्षा कारणों और जर्जर भवन पर विश्वविद्यालय का पक्ष

दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी कार्रवाई का पुरजोर बचाव किया है। रजिस्ट्रार के अनुसार, लाल बारादरी का भवन अब अत्यधिक जर्जर और खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है। प्रशासन का कहना है कि एएसआई को बार-बार मरम्मत के लिए पत्र लिखे गए, लेकिन कोई जवाब न मिलने पर छात्रों की जान बचाने के लिए इसे सील करना अनिवार्य था। स्पष्ट किया गया कि केवल मस्जिद ही नहीं, बल्कि परिसर में स्थित बैंक, क्लब और कैंटीन को भी खाली करने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।

मामले का राजनीतिकरण और वर्तमान स्थिति

यह विवाद अब कैंपस से निकलकर राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया है। आंदोलनकारी छात्रों ने कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी से फोन पर वार्ता कर न्याय की गुहार लगाई है। सांसद ने छात्रों को आश्वासन दिया है कि वे इस मुद्दे को उचित मंच पर उठाएंगे। फिलहाल, कैंपस में भारी पुलिस बल तैनात है और छात्र अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। प्रशासन और छात्रों के बीच गतिरोध बरकरार है, जिससे आगामी दिनों में स्थिति और संवेदनशील होने की आशंका है।

Alankar Agnihotri News: अलंकार अग्निहोत्री आज करेंगे नई पार्टी का ऐलान, नाम में शामिल होंगे राम और कृष्ण