Lucknow News: लखनऊ यूनिवर्सिटी में बढ़ी मेस फीस, छात्रों की जेब पर पड़ेगा बड़ा बोझ

लखनऊ यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की जेब पर अब अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मेस फीस बढ़ाने की तैयारी की है। छात्रों से 35 हजार और छात्राओं से 32 हजार रुपये तक लिए जाने की योजना है। इसके अलावा 3 हजार रुपये कॉशन मनी भी देनी होगी। छात्रों ने फैसले का विरोध किया है।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अगस्त 12, 2026

Lucknow News: लखनऊ विश्वविद्यालय के हॉस्टल में रहने वाले छात्र-छात्राओं पर अब पढ़ाई के खर्च के साथ खाने का अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ने वाला है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने हॉस्टल मेस शुल्क में बढ़ोतरी करने की तैयारी की है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत छात्रों और छात्राओं को पहले की तुलना में अधिक मेस फीस जमा करनी होगी। इसके साथ ही तीन हजार रुपये की कॉशन मनी भी अलग से जमा करनी होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन के इस फैसले के सामने आने के बाद छात्रों के बीच नाराजगी बढ़ने लगी है। छात्रों ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर बढ़ी हुई मेस फीस को वापस लेने की मांग की है।

हॉस्टल मेस फीस में कितनी होगी बढ़ोतरी?

बताते चले कि, लखनऊ विश्वविद्यालय के चीफ प्रोवोस्ट आशीष अवस्थी के अनुसार, विश्वविद्यालय में कुल 18 हॉस्टल हैं। इनमें नौ हॉस्टल छात्राओं के लिए और नौ हॉस्टल छात्रों के लिए हैं। इन हॉस्टलों में करीब 3000 छात्र-छात्राएं रोजाना मेस में खाना खाते हैं। फिलहाल छात्रों से 33,700 रुपये और छात्राओं से 29,192 रुपये मेस शुल्क के तौर पर लिया जाता है। यह शुल्क 11 महीने के हिसाब से निर्धारित है। अब प्रस्तावित व्यवस्था के तहत छात्रों से करीब 35,000 रुपये और छात्राओं से 32,000 रुपये जमा कराए जाने की तैयारी है। हालांकि, मेस संचालन का टेंडर अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है। ऐसे में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद शुल्क की राशि में बदलाव की संभावना भी बनी हुई है।

तीन हजार रुपये कॉशन मनी भी होगी अलग

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, मेस फीस में बढ़ोतरी के अलावा छात्रों को तीन हजार रुपये की कॉशन मनी भी जमा करनी होगी। इससे हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों पर शुरुआती तौर पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है। छात्रों का कहना है कि पहले ही हॉस्टल, पढ़ाई, किताबों और अन्य जरूरी खर्चों के कारण परिवारों पर आर्थिक भार रहता है। ऐसे में मेस शुल्क बढ़ाने के साथ अतिरिक्त कॉशन मनी और पूरी रकम एक साथ जमा कराने का नियम छात्रों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।

एक किस्त में जमा करनी होगी हॉस्टल मेस फीस

लखनऊ विश्वविद्यालय में मेस फीस बढ़ाने के साथ भुगतान की व्यवस्था में भी बदलाव किया जा रहा है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता छात्र शशि प्रकाश मिश्रा के मुताबिक, पहले छात्रों को मेस फीस दो किस्तों में जमा करने की सुविधा मिलती थी। अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरी फीस एक ही किस्त में जमा कराने का फैसला किया है। हालांकि, जिन छात्रों के लिए एक साथ पूरी रकम जमा करना मुश्किल होगा, वे दो किस्तों में भुगतान के लिए आवेदन कर सकेंगे। विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार ऐसे मामलों में कुलपति की अनुमति मिलने के बाद ही दो किस्तों में मेस फीस जमा करने की छूट दी जाएगी।

बढ़ी मेस फीस को लेकर छात्रों में नाराजगी

विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रस्तावित मेस शुल्क को लेकर छात्र संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। छात्रों का कहना है कि मेस फीस में बढ़ोतरी का सीधा असर उन परिवारों पर पड़ेगा जिनकी आर्थिक स्थिति सीमित है। खासतौर पर दूसरे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करना पहले ही महंगा है। ऐसे में खाने की फीस बढ़ने से उनका कुल वार्षिक खर्च और बढ़ जाएगा।

समाजवादी छात्र संगठन ने भी जताया विरोध

समाजवादी लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और छात्र अभिषेक श्रीवास्तव ‘बाबू’ ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चे पढ़ने आते हैं। ऐसे में मेस फीस बढ़ने से छात्रों के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने बढ़ी हुई फीस वापस लेने के साथ एकमुश्त भुगतान के फैसले को भी वापस लेने की मांग की है।

टेंडर फाइनल होने के बाद तय होगी अंतिम मेस फीस

फिलहाल लखनऊ विश्वविद्यालय की मेस व्यवस्था के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक टेंडर फाइनल होने के बाद मेस शुल्क की अंतिम राशि तय की जाएगी। ऐसे में अभी प्रस्तावित शुल्क में बदलाव की संभावना बनी हुई है। हालांकि, छात्रों की ओर से बढ़ी फीस और भुगतान की नई व्यवस्था को लेकर विरोध दर्ज कराया जा चुका है। अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की मांगों पर क्या फैसला लेता है और अंतिम रूप से मेस फीस कितनी निर्धारित की जाती है।