
Shiva Sharma Murder Case : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शिवा शर्मा हत्याकांड की मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे को पकड़ने में पुलिस की नाकामी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस श्रद्धा की तलाश में रायबरेली से लखनऊ और गोरखपुर से नेपाल तक खाक छानती रही, लेकिन आरोपी शहर में ही मौजूद थी। हैरानी की बात यह है कि श्रद्धा ने लखनऊ के एक मॉल के बेसमेंट में मीडिया को बुलाकर अपना पक्ष भी रखा। हालांकि, पुलिस को इसकी जानकारी मिली और टीम मौके पर पहुंची, तब तक वह वहां से फरार हो चुकी थी।
9 दिनों से फरार आरोपी ने कैसे बनाई अपनी रणनीति
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, श्रद्धा दुबे पिछले नौ दिनों से फरार थी। इस बीच उसने अदालत में सरेंडर करने के लिए अर्जी दाखिल कर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए थे। बताया जा रहा है कि रविवार को उसके सरेंडर को लेकर एक योजना तैयार की गई थी। इसके तहत श्रद्धा पहले मीडिया के सामने अपना बयान देती और फिर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करती। कथित तौर पर पुलिस की योजना थी कि मीडिया के सामने पहुंचकर उसे गिरफ्तार किया जाए, ताकि गिरफ्तारी का संदेश भी जाए और मामले को लेकर पुलिस की किरकिरी से बचा जा सके।

सरेंडर की कथित डील में कहां बिगड़ा पूरा खेल
सूत्रों के हवाले से सामने आ रही जानकारी के अनुसार, श्रद्धा और उसके कथित संरक्षकों को पुलिस की प्रस्तावित योजना मंजूर नहीं थी। बताया जा रहा है कि श्रद्धा चाहती थी कि शिवा शर्मा की मौत को आत्महत्या का मामला माना जाए और उसे सरकारी गवाह बनाया जाए। साथ ही, उसकी बहन रश्मि को मामले से पूरी तरह बाहर रखने की मांग भी कथित तौर पर सामने आई थी। दूसरी ओर, पुलिस की कथित रणनीति में मामले को हत्या के बजाय गैर इरादतन हत्या की दिशा में ले जाने और श्रद्धा के साथ उसकी बहन रश्मि को भी आरोपी बनाए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
तय समय से पहले मीडिया के सामने आई श्रद्धा
बताया जा रहा है कि श्रद्धा ने कथित योजना के अनुसार तय समय का इंतजार नहीं किया और पहले ही मीडिया से बातचीत कर ली। जब तक पुलिस की टीम मौके पर पहुंचती, वह वहां से निकल चुकी थी। इस घटनाक्रम ने लखनऊ पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए। आखिर जिस आरोपी की तलाश में कई जगहों पर दबिश दी जा रही थी, वह राजधानी में रहकर मीडिया के सामने बयान देने में कैसे सफल रही? यही सवाल अब इस पूरे मामले में चर्चा का विषय बना हुआ है।

इंस्पेक्टर विक्रम सिंह और डीसीपी विक्रम वीर पर कार्रवाई
श्रद्धा की गिरफ्तारी में लगातार हो रही देरी और मीडिया के सामने उसके पहुंचने की घटना के बाद पुलिस विभाग में कार्रवाई की गई। हजरतगंज थाने के इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को लाइन हाजिर कर दिया गया। वहीं, मामले की निगरानी कर रहे डीसीपी सेंट्रल विक्रम वीर को वेटिंग में डाले जाने की जानकारी सामने आई है। हजरतगंज थाने को लखनऊ के अहम थानों में गिना जाता है, इसलिए वहां तैनात अधिकारियों पर मामले का जल्द खुलासा करने की जिम्मेदारी थी।
शिवा शर्मा हत्याकांड में अब आगे क्या होगा?
श्रद्धा दुबे के बार-बार पुलिस की पकड़ से बाहर निकलने के बाद अब जांच और गिरफ्तारी को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं। कथित सरेंडर योजना, दोनों पक्षों के बीच बताई जा रही शर्तों और अधिकारियों पर हुई कार्रवाई को लेकर कई पहलुओं की पुष्टि होना बाकी है। अब देखना होगा कि पुलिस श्रद्धा को कब गिरफ्तार कर पाती है और शिवा शर्मा की मौत के मामले में जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।











