लखनऊ
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का आठ लेन और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे कई स्थानों पर 14 लेन तक बना हैं। अब इसी तर्ज पर लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को डिजाइन किया गया है। यहां छह लेन के बाद आठ और ट्रैफिक बढ़ते ही दस लेन करने की पूरी गुंजाइश रखी गई है।
वर्तमान में 25 हजार वाहन प्रतिदिन आवागमन छह लेन के एक्सप्रेसवे पर करते हैं। अगर हर साल छह से सात प्रतिशत वाहनों का ग्राफ बढ़ता है तब भी पचास सालों तक किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होने वाली है। वाहन 120 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से फर्राटा भर सकेंगे।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) का दावा है कि वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ ही प्राधिकरण के पास लेन बढ़ाने का विकल्प भी मौजूद है, क्योंकि पैंसठ प्रतिशत ही जमीन का उपयाेग अभी एक्सप्रेसवे को बनाने में किया गया है।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को बनाने के लिए लखनऊ व उन्नाव के 43 गांवों की 480 हेक्टेअर जमीन अधिगृहित की गई थी। इनमें 45 प्रतिशत से अधिक जमीन अभी खाली पड़ी है। सड़क के दोनों तरफ दस लेन तक विस्तार बड़ी सुगमता से किया जा सकेगा।
आठ लेन पर तीन लाख से अधिक वाहन प्रतिदिन चल सकेंगे और दस लेन होने पर चार लाख वाहन चौबीस घंटे में आ जा सकेंगे। उसी हिसाब से साइड वे एमेनिटीज भी विकसित की गई हैं। सड़क के दोनों तरफ छह-छह हेक्टेअर जमीन सिर्फ एमेनिटीज के लिए छोड़ी गई है। भविष्य में अगर लेने बढ़ती हैं तो रेस्तरां का विस्तार करने की जरूरत नहीं है।
उसी छह हेक्टेअर जमीन में सुविधाएं बड़ी आसानी से बढ़ाई जा सकेंगी। वर्तमान मेंं एनएचएआई ने खाली जमीन पर 46 हजार से अधिक पौधे लगा दिए हैं। इसके अलावा जमीन को खाली छोड़ दिया गया है।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को अभी छह लेन का बनाया गया है। इसमेंं आठ लेन नहीं दस लेन बनाने के लिए जमीन छोड़ी गई है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसका विस्तार किया जा सकेगा। इसके लिए जमीन अधिगृहण करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। एनएचएआइ के पास पर्याप्त जमीन है।
नकुल प्रकाश वर्मा, परियोजना निदेशक, एनएचएआई










