Lucknow Fire Incident: ‘1 करोड़ मुआवजा दो’, लखनऊ हादसे पर अखिलेश ने सरकार को घेरा

लखनऊ अग्निकांड के घायलों से मिलने अखिलेश यादव मंगलवार को KGMU पहुंचे। उन्होंने हादसे पर दुख जताते हुए कहा कि सुरक्षा नियमों का पालन होता तो यह घटना टल सकती थी।

Lucknow Fire Incident

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 23, 2026

Lucknow Fire Incident: लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड में 15 युवाओं की असामयिक मृत्यु ने न केवल पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है, बल्कि इसने राज्य की राजनीति को भी गरमा दिया है। मंगलवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव घायलों का हाल जानने केजीएमयू (KGMU) पहुंचे। वहां उन्होंने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया, जिसके बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।

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अखिलेश यादव की मांगें

अखिलेश यादव ने अस्पताल में भर्ती घायलों से मुलाकात की। एक गंभीर रूप से घायल युवक का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि जान बचाने के लिए ऊंची इमारत से छलांग लगाने के कारण उसकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई है। अखिलेश ने कहा कि यह युवक अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है, अतः सरकार को उसके पूरी तरह स्वस्थ होने तक उसके वेतन की व्यवस्था करनी चाहिए।

सपा प्रमुख ने सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें रखीं

मुआवजा: मृतकों के परिजनों को कम से कम 1 करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि दी जाए।

चिकित्सा खर्च: घायलों के इलाज का संपूर्ण व्यय सरकार वहन करे।

सुरक्षा मानक: अखिलेश ने आरोप लगाया कि यदि भवन निर्माण और अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता, तो यह विनाशकारी हादसा टल सकता था। उन्होंने प्रश्न किया कि यदि संकट की इस घड़ी में सरकार पीड़ितों के साथ खड़ी नहीं होगी, तो कौन होगा?

ब्रजेश पाठक का पलटवार

अखिलेश यादव के बयानों का जवाब देते हुए उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने उन पर मानवीय त्रासदी पर राजनीति करने का आरोप मढ़ा। ब्रजेश पाठक ने इस हादसे को पिछली सपा सरकार के कार्यकाल में हुई प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का परिणाम करार दिया।

उपमुख्यमंत्री ने कई गंभीर तथ्य सामने रखे

अवैध निर्माण: उन्होंने दावा किया कि उक्त भवन का आवासीय नक्शा 2014 में पास हुआ था। वर्ष 2016 में जब अवैध निर्माण का मामला सामने आया और ध्वस्तीकरण के आदेश दिए गए, तो उन्हें कुछ समय बाद ही रद्द कर दिया गया।

सवालों के घेरे में पिछली सरकार: पाठक ने सवाल उठाया कि उस समय किस राजनीतिक दबाव में ध्वस्तीकरण के आदेशों को दरकिनार किया गया था।

सरकारी कार्रवाई: उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं घटना की निगरानी कर रहे हैं। इस मामले में अब तक चार संबंधित अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है और एक एसआईटी (SIT) का गठन किया गया है जो मामले की तह तक जाकर दोषियों को सजा दिलाएगी।

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