Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान करने हेतु बड़ी संख्या में सफाई कर्मियों के अपने गृह राज्य लौटने के कारण शहर के कई इलाकों में कचरा प्रबंधन ठप हो गया है। निजी एजेंसियों के तहत काम करने वाले 200 से अधिक कर्मचारी 9 अप्रैल को होने वाले मतदान में हिस्सा लेने असम चले गए हैं, जिसका सीधा असर शहर के लगभग 70 हजार घरों के डोर-टू-डोर कूड़ा उठान पर पड़ा है।
एक-तिहाई स्टाफ की कमी
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, निजी सफाई एजेंसियों द्वारा नियुक्त कुल स्टाफ में से करीब एक-तिहाई कर्मचारी फिलहाल छुट्टी पर हैं। इस जनशक्ति की कमी (Manpower Shortage) के कारण कई वीआईपी और रिहायशी इलाकों में कूड़ा उठान अनियमित हो गया है। सड़कों के किनारे कचरे के ढेर जमा होने लगे हैं। बताया जा रहा है कि यह स्थिति कम से कम 15 अप्रैल तक बनी रह सकती है, क्योंकि अधिकांश श्रमिक मतदान के बाद ही वापस लौटेंगे।
LSA और Lions Enviro की कार्यप्रणाली प्रभावित
आपको बता दे कि, लखनऊ के सभी 110 वार्डों में सफाई का जिम्मा निजी ठेका कंपनियों के कंधों पर है। लखनऊ स्वच्छता अभियान (LSA) जो 77 वार्डों की जिम्मेदारी संभालती है, उसके 600 में से 150 से अधिक कर्मचारी नदारद हैं। वहीं Lions Enviro, जो 33 वार्डों में सक्रिय है, उसके भी 70 कर्मचारी अनुपस्थित हैं। इस कारण न केवल प्राथमिक कूड़ा संग्रहण (Primary Garbage Collection) प्रभावित हुआ है, बल्कि नालियों की सफाई और सड़क बुहारी जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी रुक गए हैं।
वैकल्पिक स्वच्छता प्रबंधन
संकट को देखते हुए एजेंसियां अब वैकल्पिक व्यवस्था करने में जुटी हैं। LSA के क्षेत्रीय प्रमुख अभय रंजन के अनुसार, स्थानीय स्तर पर ड्राइवरों और नए सफाई कर्मियों को जोड़कर सेवाओं को बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, Lions Enviro ने बाराबंकी और आसपास के जिलों से अस्थाई श्रमिकों को बुलाकर इस कमी को पूरा करने की रणनीति बनाई है, ताकि शहर को गंदगी से बचाया जा सके।
कचरा प्रबंधन चक्र पर चोट और जनता की बढ़ती परेशानियां
लखनऊ में प्रतिदिन लगभग 1800 टन कचरा निकलता है, जिसमें से 1700 टन शिवरी स्थित वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट तक भेजा जाता है। डोर-टू-डोर कूड़ा उठान बाधित होने से यह पूरा चक्र प्रभावित हो गया है। फैजुल्लागंज और चौक जैसे इलाकों के निवासियों ने शिकायत की है कि घरों में कचरा जमा होने से बदबू फैल रही है। पार्षदों का कहना है कि चुनाव की तारीखें पहले से तय थीं, ऐसे में नगर निगम को बेहतर आपदा प्रबंधन और तैयारी रखनी चाहिए थी।










