UP Manjha Ban: लखनऊ के दुबग्गा इलाके में बुधवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। 33 वर्षीय मोहम्मद शोएब, जो एक दवा कंपनी में मेडिकल रिप्रजेंटेटिव (MR) के पद पर कार्यरत थे, अपनी स्कूटी से हैदरगंज-तालकटोरा फ्लाईओवर से गुजर रहे थे। इसी दौरान अचानक उनकी गर्दन में प्रतिबंधित चाइनीज मांझा फंस गया। धार इतनी तेज थी कि शोएब की गर्दन गहरे तक कट गई और अत्यधिक खून बहने के कारण उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस घटना ने प्रशासन के सुरक्षा दावों और प्रतिबंधों की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सख्त रुख
आपको बता दे कि, इस दुखद घटना का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने पुलिस महानिदेशक (DGP) और गृह विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि एनजीटी और अदालतों के आदेशों की अवहेलना कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सीएम योगी की सख्त चेतावनी के अनुसार, अब से चाइनीज मांझे के कारण होने वाली किसी भी जनहानि को केवल दुर्घटना नहीं, बल्कि ‘हत्या’ माना जाएगा। मुख्यमंत्री ने ऐलान किया है कि ऐसे मामलों में अब दोषियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की हत्या से जुड़ी धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।
यूपी पुलिस का मेगा सर्च ऑपरेशन
मुख्यमंत्री के कड़े आदेश के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। प्रदेशव्यापी पुलिस अभियान और सघन तलाशी के तहत सभी जिलों के थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में पतंग और मांझे की दुकानों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। शासन ने यह भी साफ कर दिया है कि यदि किसी क्षेत्र में प्रतिबंधित सिंथेटिक मांझे की बिक्री जारी रहती है, तो इसके लिए संबंधित क्षेत्र के पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। उच्च स्तर पर इस अभियान की निरंतर निगरानी की जा रही है।
आखिर क्यों है यह सिंथेटिक धागा इतना जानलेवा?
साधारण सूती धागे के विपरीत, चाइनीज मांझा नायलॉन या पॉलिएस्टर जैसे सिंथेटिक फाइबर से तैयार किया जाता है। खतरनाक मेटैलिक कोटिंग और जानलेवा धार बनाने के लिए इस पर एल्युमिनियम, स्टील, टंगस्टन कार्बाइड और कांच के बारीक कणों का लेप लगाया जाता है। यह धागा इतना लचीला और मजबूत होता है कि इंसानी हाथों से नहीं टूटता, बल्कि खींचने पर मांस और नसों को चीर देता है। यही कारण है कि यह पक्षियों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए ‘मौत का जाल’ बन चुका है।
कानूनी शिकंजा और दंड के प्रावधान
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (1986) की धारा 15 के तहत इस मांझे का भंडारण, बिक्री और उपयोग पहले से ही प्रतिबंधित है। सख्त कानूनी दंड और बीएनएस की नई धाराएं अब अपराधियों के लिए और भी भारी पड़ेंगी। वर्तमान में इसके उल्लंघन पर 5 साल तक की कैद और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का नियम है, लेकिन अब ‘हत्या’ की धारा जुड़ने से दोषियों को उम्रकैद तक की सजा मिल सकती है। प्रशासन ने जनता से भी अपील की है कि वे ऐसे जानलेवा उत्पादों का बहिष्कार करें।










