Lucknow Fire Incident: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को एक दर्दनाक अग्निकांड में 15 लोगों की झुलसकर मौत हो गई, जबकि नौ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना तब घटी जब तीन मंजिला इमारत भीषण आग की चपेट में आ गई। घटना की सूचना मिलते ही राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
उच्च स्तरीय जांच के आदेश
बताते चले कि, मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है, जिसे इस पूरे घटनाक्रम और आग के कारणों की गहन जांच करने का निर्देश दिया गया है। एसआईटी को सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और प्रभावित परिवारों को ढांढस बंधाया।
2016 के अवैध निर्माण फाइल पर उठे सवाल
न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जिस इमारत में यह हादसा हुआ, उसे 2016 में ही अवैध निर्माण के चलते ध्वस्त करने का आदेश दिया गया था। हालांकि, आश्चर्यजनक रूप से मात्र दो महीने के भीतर ही इस ध्वस्तीकरण आदेश को निरस्त कर दिया गया। अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की कार्यप्रणाली और पुराने दस्तावेजों की जांच शुरू हो गई है, जिससे प्रशासनिक मिलीभगत के गंभीर संकेत मिल रहे हैं।
लापरवाही बरतने वाले चार अधिकारी नपे
घटना के बाद मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बाद प्रशासनिक स्तर पर सख्त कार्रवाई की गई है। जानकीपुरम के बिजली विभाग के अधिकारी गौरव कुमार, अग्निशमन विभाग के इंदिरा नगर शाखा के प्रभारी कमलेन्द्र कुमार सिंह, एलडीए के सहायक अभियंता अनिल कुमार और कनिष्ठ अभियंता प्रमोद पांडेय को लापरवाही के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
दोषियों पर कानूनी शिकंजा
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इमारत के मालिकों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में राम कृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला और तुषार कृष्ण जायसवाल शामिल हैं, जो संयुक्त रूप से इस इमारत के मालिक थे। इसके अलावा सुरेश कुमार साहू को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि इमारत का मानचित्र तो पास था, लेकिन वास्तविक निर्माण स्वीकृत नक्शे के विपरीत किया गया था।
पीड़ितों के लिए मुआवजे का ऐलान
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की गई है। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य सरकार की ओर से मृतकों के परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। वर्तमान में घायलों का उपचार जारी है, जबकि बड़ी संख्या में लोगों को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है।










