Lucknow Coaching Fire: ‘एग्जिट होता तो बच जाते साथी’ लखनऊ अग्निकांड में बाल-बाल बची छात्रा ने खोली लापरवाही की पोल

लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में बाल-बाल बची छात्रा लवप्रीत ने हादसे का खौफनाक सच बयां किया है। धुएं से घिरे होने और एग्जिट न होने के कारण छात्र जान बचाने को मजबूर थे। तार के सहारे उतरने की कोशिश में लवप्रीत घायल हो गई। अस्पताल में भर्ती छात्रा ने सुरक्षा मानकों की भारी कमी और अपने साथियों को खोने का दर्द साझा किया है।

Lucknow Coaching Fire

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 23, 2026

Lucknow Coaching Fire: लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में लगी आग का मंजर किसी डरावने सपने जैसा था। जब आग की लपटों ने पूरी इमारत को अपनी आगोश में ले लिया, तब वहां मौजूद छात्रों और कर्मचारियों के सामने अपनी जान बचाने की चुनौती थी। बचाव का कोई सीधा रास्ता न होने के कारण, कई छात्रों ने मजबूरन ऊपर से छलांग लगा दी। कुछ छात्रों को बिजली के तारों और पाइपों के सहारे नीचे लटककर जान बचाते हुए देखा गया। इस दौरान वहां मौजूद लवप्रीत नाम की छात्रा ने जो देखा, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है।

दम घुटने से मची अफरा-तफरी

बताते चले कि, अग्निकांड की शिकार बनी छात्रा लवप्रीत फिलहाल केजीएमयू (KGMU) ट्रामा सेंटर में भर्ती है. उसने उस काली घड़ी का आंखों देखा हाल बयां किया। लवप्रीत ने बताया कि आग लगने के कुछ ही मिनटों के भीतर ऊपरी मंजिलें जहरीले धुएं से भर गई थी। स्थिति इतनी भयावह थी कि छात्रों का दम घुटने लगा था। उसने और उसके साथियों ने छत की ओर भागने का प्रयास किया, लेकिन वहां का रास्ता भी पूरी तरह बंद था। चारों तरफ से घिरे छात्रों के पास बचने का कोई सुरक्षित मार्ग नहीं बचा था।

तार के सहारे उतरते हुए हुआ हादसा

लवप्रीत ने दर्द से कराहते हुए बताया कि जब हर तरफ धुआं और आग का घेरा था, तब उसे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं दिखा। जान बचाने की अंतिम कोशिश के तौर पर उसने खिड़की से बाहर निकल रहे एक बिजली के तार को मजबूती से पकड़ लिया और नीचे उतरने की कोशिश की। इसी दौरान उसका संतुलन बिगड़ गया और वह नीचे गिर गई, जिससे उसके पैर की हड्डी टूट गई। वह आज भी उस हादसे की तस्वीरों को याद करके सिहर उठती है।

सुरक्षा मानकों की विफलता

इस हादसे के बाद गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं कि जिस कोचिंग सेंटर में सैकड़ों छात्र आते हैं, वहां सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम क्यों नहीं थे? लवप्रीत का मानना है कि यदि इमारत में आपातकालीन निकास द्वार (Emergency Exit) होता, तो आज कई जिंदगियां बचाई जा सकती थी। धुएं के गुबार में फंसे छात्रों के पास सुरक्षित बाहर निकलने का कोई विकल्प नहीं था। यह अग्निकांड व्यावसायिक परिसरों में सुरक्षा मानकों की घोर लापरवाही को उजागर करने वाला एक दुखद उदाहरण है।

साथी छात्रों को खोने का गहरा सदमा

अस्पताल के बिस्तर पर लेटी लवप्रीत आज भगवान का शुक्रिया अदा कर रही है कि उसे नई जिंदगी मिली, लेकिन उसके मन में अपने उन साथियों को खोने का गहरा दुख है, जो इस अग्निकांड की भेंट चढ़ गए। वह उन छात्रों के बारे में सोचकर रो पड़ती है जो इतने खुशनसीब नहीं थे कि आग की लपटों और जहरीले धुएं से बच पाते। लवप्रीत की यह दास्तान उन तमाम प्रशासनिक अधिकारियों और संचालकों के लिए एक आईना है, जो सुरक्षा को दरकिनार कर छात्रों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।