LPG Crisis: घरेलू गैस की किल्लत? सरकार ने बढ़ाई 10% सप्लाई, जानें अब क्या होगा

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण दुनिया भर में तेल और एलपीजी (LPG) की किल्लत बढ़ गई है। भारत में संभावित संकट को देखते हुए मोदी सरकार ने 'प्लान-बी' लागू कर दिया है। घरेलू उत्पादन में 10% की बढ़ोतरी के साथ अल्जीरिया और नॉर्वे जैसे देशों से अतिरिक्त गैस मंगाई जा रही है ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

LPG Crisis

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मार्च 11, 2026

LPG Crisis: मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है, जिसका सीधा असर भारत की रसोई तक पहुंचता दिख रहा है। तेल और गैस की वैश्विक किल्लत के बीच भारत में एलपीजी आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल ‘सप्लाई चेन मैनेजमेंट’ को सक्रिय कर दिया है और कई निर्णायक कदम उठाए हैं।

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एलपीजी की घरेलू पैदावार में बढ़ोतरी

बताते चले कि, भारत सरकार ने देश के भीतर एलपीजी के घरेलू उत्पादन (Domestic Production) को तेज करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘प्लान-बी’ को जमीन पर उतार दिया गया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, देश की प्रमुख तेल कंपनियों—IOCL, BPCL और HPCL—ने अपनी रिफाइनरियों में एलपीजी उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत तक का इजाफा किया है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाधाओं के बावजूद घरेलू स्तर पर आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

विदेशी आयात की रणनीति और गैस कार्गो की आवक

जब मिडिल ईस्ट के रास्ते चुनौतीपूर्ण हुए, तो सरकार ने गैस आयात के वैकल्पिक स्रोतों (Alternative Import Sources) पर फोकस बढ़ा दिया है। अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और नॉर्वे जैसे देशों से एलएनजी और एलपीजी की अतिरिक्त खेपें भारत पहुंचने लगी हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में संभावित रुकावटों के जोखिम को भांपते हुए, भारत ने अपनी आयात रणनीति में विविधता लाकर संकट के प्रभाव को कम करने का सफल प्रयास किया है।

ईंधन आपूर्ति में विविधता और अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक साझेदारी

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अब केवल एक क्षेत्र पर निर्भर नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, भारत की गैस आपूर्ति शृंखला (Gas Supply Chain) में कतर की 42% हिस्सेदारी है, जबकि यूएई और सऊदी अरब भी प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। हालांकि, 2026 तक अमेरिका भी भारत का एक मजबूत रणनीतिक भागीदार बनकर उभरा है, जो कुल गैस आपूर्ति में लगभग 10% का योगदान दे रहा है। अंगोला और नाइजीरिया जैसे देशों से बढ़ता आयात भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती प्रदान कर रहा है।

कमर्शियल गैस पर नियंत्रण

घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार ने कमर्शियल एलपीजी इस्तेमाल पर सख्ती (Strictness on Commercial Usage) दिखाई है। रेस्टोरेंट और गैर-जरूरी व्यवसायों द्वारा गैस की जमाखोरी रोकने के लिए तीन तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशकों की एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है—किसी भी हाल में आम आदमी की रसोई का बजट और सप्लाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

मौजूदा संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब वैश्विक झटकों को झेलने के लिए पहले से अधिक तैयार है। घरेलू उत्पादन में वृद्धि और नए देशों से आयात समझौते यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि युद्ध के बादलों के बीच भी भारत की ऊर्जा लाइन चालू रहे।

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