LPG Cylinder Crisis: मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत में ESMA लागू, अब नहीं होगी गैस की किल्लत!

मिडिल ईस्ट में ईरान-इजरायल युद्ध के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता है। भारत में एलपीजी संकट और जमाखोरी को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में ESMA (आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम) लागू कर दिया है। अब रिफिल बुकिंग का अंतराल 21 से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है ताकि निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

LPG Cylinder Crisis

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मार्च 10, 2026

LPG Cylinder Crisis:  मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मची हुई है। इसका सीधा असर भारत पर भी दिखने लगा है, जहां एलपीजी सिलेंडर की किल्लत की खबरों ने सरकार को सतर्क कर दिया है। आम जनता को राहत देने और कालाबाजारी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए देशभर में आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (ESMA) लागू कर दिया है।

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ESMA क्या है और यह कैसे काम करता है?

ESMA (Essential Services Maintenance Act) भारतीय संसद द्वारा 1968 में पारित एक शक्तिशाली कानून है। इसका प्राथमिक उद्देश्य उन अनिवार्य सेवाओं की निरंतरता बनाए रखना है, जिनके रुकने से जनजीवन ठप हो सकता है। इस अधिनियम के लागू होने के बाद, संबंधित क्षेत्रों के कर्मचारी हड़ताल पर नहीं जा सकते। यह कानून सरकार को यह अधिकार देता है कि वह रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने का निर्देश दे सके। वर्तमान में इसे अधिकतम 6 महीने के लिए प्रभावी किया गया है।

एस्मा के दायरे में आने वाली आवश्यक सेवाएं और उनके मानक

इस सख्त कानून के अंतर्गत केवल गैस ही नहीं, बल्कि कई अन्य लोक कल्याणकारी सेवाएँ भी आती हैं:

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा: अस्पताल, स्वच्छता और जल आपूर्ति विभाग।
  • ऊर्जा और ईंधन क्षेत्र: पेट्रोलियम, कोयला, बिजली और उर्वरक उत्पादन से जुड़े संस्थान।
  • परिवहन एवं बैंकिंग: डाक, टेलीग्राम, रेलवे, हवाई सेवाएं और बैंकिंग से संबंधित महत्वपूर्ण कार्य।
  • खाद्यान्न वितरण: अनाज की खरीद और वितरण से जुड़ी सरकारी योजनाएं।

वैश्विक अस्थिरता और एलपीजी बुकिंग नियमों में बदलाव का कारण

सरकार ने यह फैसला अचानक नहीं लिया है। ईरान और इजरायल के बीच जारी सैन्य संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर प्राकृतिक गैस की कीमतें अस्थिर हैं। बाजार में मची भगदड़ और पैनिक बाइंग (Panic Buying) को रोकने के लिए सरकार ने एलपीजी रिफिल बुकिंग की समय सीमा को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू गैस की जमाखोरी पर लगाम लगाना है ताकि वास्तविक जरूरतमंदों को सिलेंडर मिल सके।

सरकार की सक्रियता और आपूर्ति प्रबंधन

अमेरिका और मध्य पूर्व के युद्ध की वजह से बाजार में अनिश्चितता का माहौल है, जिससे मांग में अचानक 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि एक औसत परिवार साल में 7-8 सिलेंडर का उपयोग करता है, जिसे 6 सप्ताह से पहले रिफिल की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे में आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए बुकिंग अंतराल बढ़ाया गया है।

कच्चे तेल की कीमतों और पेट्रोल-डीजल की खुदरा दरों पर स्थिति

भले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हों, लेकिन केंद्र सरकार ने फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी न करने का फैसला लिया है। सरकारी तेल विपणन कंपनियाँ (IOCL, BPCL, HPCL) वर्तमान में बढ़ी हुई लागत का बोझ खुद वहन करेंगी। सरकार वैश्विक तेल बाजार पर पैनी नजर रखे हुए है और फिलहाल जनता पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने की कोई योजना नहीं है।

भारत की सामरिक तेल भंडारण क्षमता और भविष्य की तैयारी

किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए भारत की तैयारी पुख्ता है। संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, भारत के पास वर्तमान में 74 दिनों का कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का सुरक्षित भंडार (Strategic Reserves) मौजूद है। यह भंडार किसी भी बड़े भू-राजनीतिक संकट या आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त है।

LPG Crisis: पहले बढ़ी कीमत,अब LPG सिलेंडर आपूर्ति की किल्लत….मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच सरकार का बड़ा फैसला