LPG Crisis : भारत में एलपीजी संकट को दूर करने के लिए अमेरिका और रूस से गैस की आपूर्ति शुरू हो गई है। हाल ही में अमेरिका के टेक्सास से टैंकर पिक्सिस पायनियर (Pyxis Pioneer) और रूस से कार्गो शिप एक्वा टाइटन (Aqua Titan) मंगलुरु बंदरगाह पर सुरक्षित पहुंच चुके हैं।
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अमेरिका और रूस से गैस आपूर्ति

अमेरिका से आया टैंकर पिक्सिस पायनियर रविवार को टेक्सास से रवाना हुआ था और अब मंगलुरु बंदरगाह पर अनलोडिंग के लिए तैयार है। वहीं रूस से कच्चा तेल लेकर आया एक्वा टाइटन भी न्यू मैंगलौर पोर्ट पर डॉक कर चुका है। इन दोनों जहाजों के आने से भारत में एलपीजी की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी।
अगले हफ्ते और कार्गो शिप पहुंचेंगे
आगामी सप्ताह में दो और एलपीजी कार्गो शिप भारत पहुंचेंगे। 25 मार्च को अपोलो ओसियन जहाज करीब 26,687 टन गैस लेकर आएगा, जिससे इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम अपनी जरूरतें पूरी करेंगे। 29 मार्च को एक और जहाज 30,000 टन गैस लेकर पहुंचेगा, जिससे एचपीसीएल को राहत मिलेगी। इस तरह इस सप्ताह मंगलुरु में कुल 72,700 टन से अधिक रसोई गैस पहुंचेगी। इससे दक्षिण भारत के राज्यों में एलपीजी की आपूर्ति सुचारू हो सकेगी।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ा तनाव
इस बीच खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। अमेरिका ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए 48 घंटे का समय दिया है, अन्यथा ईरान के बिजली संयंत्रों पर हमला करने की चेतावनी दी है। इसके जवाब में ईरान ने गल्फ देशों के बिजली संयंत्रों को निशाने पर लेने की धमकी दी और कहा कि यदि उसके संयंत्रों पर हमला हुआ तो पूरे गल्फ क्षेत्र को अंधेरे में डुबो दिया जाएगा।
ईरान का बयान
इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) में ईरान के प्रतिनिधि अली मौसवी ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट केवल ईरान के दुश्मनों के लिए बंद रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका और इज़राइल के हमले ही तनाव का कारण हैं। यदि ये हमले बंद हो जाएं तो स्थिति सामान्य हो सकती है। ईरान ने यह भी कहा कि उसे केवल युद्धविराम नहीं बल्कि जंग का स्थायी अंत चाहिए।
भारत में एलपीजी संकट को दूर करने के लिए अमेरिका और रूस से गैस की आपूर्ति एक बड़ी राहत है। आने वाले दिनों में और कार्गो शिप के पहुंचने से घरेलू गैस की कमी काफी हद तक कम हो जाएगी। हालांकि खाड़ी क्षेत्र में होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते तनाव से ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा बना हुआ है। ऐसे हालात में भारत के लिए वैकल्पिक स्रोतों से गैस आयात करना बेहद जरूरी हो गया है।
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