LPG Crisis: ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ लेकर आ रहे हैं गैस का भंडार, 13 दिनों का बैकअप तैयार

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के तनाव के बीच भारत के लिए अच्छी खबर है। भारतीय टैंकर शिवालिक और नंदा देवी कुल 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाह पहुँच रहे हैं।

LPG Crisis

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 16, 2026

LPG Crisis: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण मध्य पूर्व क्षेत्र में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस तनाव का असर वैश्विक तेल और गैस सप्लाई पर भी पड़ रहा है। इसी बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से दो भारतीय जहाजों को गुजरने की अनुमति दे दी है। इन जहाजों का नाम शिवालिक और नंदादेवी है, जो एलपीजी गैस लेकर भारत की ओर बढ़ रहे हैं। इन दोनों जहाजों के सुरक्षित निकलने से भारत में गैस सप्लाई को लेकर थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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भारत की ओर बढ़ रहे हैं दोनों जहाज

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‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ लेकर आ रहे हैं गैस का भंडार

जानकारी के मुताबिक ईरान ने 14 मार्च को भारतीय झंडे वाले इन दोनों जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से निकलने की अनुमति दी थी। इसके बाद ये जहाज भारत की ओर रवाना हो गए। इनमें से एक जहाज शिवालिक गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंच रहा है, जबकि दूसरा जहाज नंदादेवी कांडला पोर्ट पर डॉक करेगा।

पोर्ट, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार के अनुसार इन दोनों जहाजों में कुल मिलाकर लगभग 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी गैस लदी हुई है। इसमें शिवालिक जहाज पर करीब 45,000 मीट्रिक टन गैस है, जबकि नंदादेवी जहाज में लगभग 47,700 मीट्रिक टन गैस भरी हुई है।

13 दिनों की गैस जरूरत पूरी करने की क्षमता

भारत में रोजाना एलपीजी की खपत लगभग 8,000 मीट्रिक टन के आसपास मानी जाती है। इस हिसाब से अगर इन दोनों जहाजों में मौजूद गैस का उपयोग किया जाए तो यह देश की लगभग 13 दिनों की जरूरत पूरी कर सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत केवल अस्थायी है, क्योंकि देश की कुल मांग के मुकाबले यह मात्रा सीमित है।

इसके बावजूद इन जहाजों का सुरक्षित भारत पहुंचना एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इससे यह उम्मीद बढ़ी है कि यदि आगे भी भारतीय जहाजों को इसी तरह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति मिलती रही, तो भारत की गैस सप्लाई जल्द ही सामान्य हो सकती है।

अब भी खाड़ी क्षेत्र में फंसे हैं कई जहाज

सरकारी अधिकारियों के अनुसार फारस की खाड़ी में अभी भी भारत के झंडे वाले करीब 22 जहाज मौजूद हैं, जो अभी तक होर्मुज स्ट्रेट से बाहर नहीं निकल पाए हैं। यदि इन जहाजों को भी रास्ता मिल जाता है, तो भारत की गैस सप्लाई को और मजबूती मिल सकती है।

फिलहाल इन दो जहाजों से मिलने वाली गैस से कुछ दिनों की राहत जरूर मिलेगी, लेकिन लंबी अवधि के लिए यह पर्याप्त नहीं मानी जा रही।

देश में बढ़ा एलपीजी उत्पादन

हाल के समय में भारत ने घरेलू स्तर पर एलपीजी उत्पादन भी बढ़ाया है। रिपोर्ट के अनुसार देश में गैस उत्पादन लगभग 28 प्रतिशत तक बढ़ गया है। पहले जहां उत्पादन करीब 1.158 मिलियन टन प्रति माह था, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 1.5 मिलियन टन प्रति माह हो गया है। इस बढ़ोतरी की वजह से भारत अपनी जरूरतों का कुछ हिस्सा खुद पूरा करने में सक्षम हो रहा है।

भारत में एलपीजी की बढ़ती मांग

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन दशकों में भारत में एलपीजी की मांग तेजी से बढ़ी है। वर्ष 1998-99 में जहां इसकी खपत लगभग 446 हजार मीट्रिक टन थी, वहीं 2025-26 तक यह बढ़कर करीब 2,754 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गई है। अगर इसे दैनिक खपत में बदलकर देखा जाए तो देश में रोजाना करीब 7,500 से 8,000 टन एलपीजी का उपयोग होता है। शहरी क्षेत्रों में इसकी खपत ज्यादा है, जबकि ग्रामीण इलाकों में अभी भी एलपीजी का उपयोग अपेक्षाकृत कम है।

कुल मिलाकर, शिवालिक और नंदादेवी जहाजों का भारत पहुंचना फिलहाल के लिए राहत भरी खबर जरूर है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होना और बाकी जहाजों का भी सुरक्षित निकलना बेहद जरूरी है।

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