LPG Crisis: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष आज अपने 22वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जिसके कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराने लगा है। विशेष रूप से ईरान के नियंत्रण वाले हार्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) की आपूर्ति बुरी तरह बाधित हुई है। इस वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत के लिए एक सुखद खबर सामने आई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय झंडे वाले दो एलपीजी टैंकरों को हार्मुज स्ट्रेट पार करने के लिए ‘ग्रीन सिग्नल’ मिल गया है।
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हार्मुज स्ट्रेट में थमी दुनिया की रफ्तार

ईरान और क्षेत्रीय शक्तियों के बीच बढ़ते युद्ध के खतरों के कारण पिछले 24 घंटों से हार्मुज स्ट्रेट जलमार्ग से कच्चे तेल का एक भी टैंकर नहीं गुजरा है। ईरान द्वारा जहाजों पर हमला करने की धमकी के बाद सैकड़ों मालवाहक जहाज और टैंकर इस संकरे जलमार्ग में फंसे हुए हैं। सुरक्षा कारणों से अधिकांश जहाजों ने खाड़ी (Gulf) से बाहर निकलने का जोखिम उठाना बंद कर दिया है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह ‘ग्रीन सिग्नल’?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों, विशेषकर रसोई गैस (LPG) और कच्चे तेल के लिए खाड़ी देशों पर बहुत हद तक निर्भर है।
आपूर्ति की निरंतरता: दो टैंकरों को रास्ता मिलना यह दर्शाता है कि भारत के कूटनीतिक प्रयास और सुरक्षा प्रोटोकॉल काम कर रहे हैं।
बाजार में स्थिरता: यदि ये टैंकर समय पर भारत पहुँचते हैं, तो घरेलू बाजार में एलपीजी की किल्लत और कीमतों में बढ़ोतरी के खतरे को कम किया जा सकेगा।
रणनीतिक जीत: वैश्विक संकट के समय जहाँ अन्य देशों के जहाज फंसे हुए हैं, वहां भारतीय टैंकरों को अनुमति मिलना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
हार्मुज स्ट्रेट का वैश्विक महत्व
हार्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ‘चोक पॉइंट्स’ में से एक है। ओमान और ईरान के बीच स्थित यह संकरा समुद्री रास्ता वैश्विक ऊर्जा बाजार की जीवनरेखा माना जाता है:
तेल की सप्लाई: दुनिया के कुल तेल उत्पादन का लगभग 20 प्रतिशत इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
LNG की निर्भरता: तरल प्राकृतिक गैस (LNG) का एक बड़ा हिस्सा भी इसी मार्ग से एशिया और यूरोप तक पहुँचता है।
ईरान का नियंत्रण: भौगोलिक स्थिति के कारण इस मार्ग पर ईरान का प्रभाव अधिक है, जिससे युद्ध की स्थिति में वह इसे बंद करने की क्षमता रखता है।
आगामी चुनौतियां और नजरिया
शिपिंग डेटा और सूत्रों के अनुसार, भारतीय टैंकर आने वाले कुछ दिनों में इस मार्ग को पार करने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, जंग के 22वें दिन भी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। यदि यह तनाव और बढ़ता है, तो न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। फिलहाल, इन दो टैंकरों को मिली अनुमति ने भारतीय ऊर्जा क्षेत्र को एक बड़ी ऑक्सीजन देने का काम किया है।
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