Women Reservation Bill : लोकसभा में गिरा महिला आरक्षण बिल, सरकार को नहीं मिला विपक्ष का जरूरी साथ

संसद के विशेष सत्र में शुक्रवार शाम को महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर वोटिंग हुई। सदन में मौजूद 489 सदस्यों में से 278 ने पक्ष में और 211 ने विपक्ष में वोट दिया। संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत न मिलने से बिल लटक गया। जानिए आगे क्या होगा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 17, 2026

Women Reservation Bill : भारतीय संसदीय इतिहास में शुक्रवार का दिन अत्यंत गहमागहमी और नाटकीय घटनाक्रमों से भरा रहा। लोकसभा में महिला सशक्तिकरण और निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण से जुड़े तीन अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयकों—संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026—पर मतदान कराया गया। केंद्र सरकार को उम्मीद थी कि इन ऐतिहासिक सुधारों को सदन की मंजूरी मिल जाएगी, लेकिन परिणाम सरकार की उम्मीदों के विपरीत रहे। मतदान के बाद यह स्पष्ट हो गया कि सदन में यह विधेयक पारित नहीं हो सके, जिससे महिला आरक्षण को लागू करने की दिशा में एक बड़ा संवैधानिक गतिरोध पैदा हो गया है।

वोटों का गणित: बहुमत के बावजूद संवैधानिक विफलता

विधेयकों पर हुई वोटिंग के आंकड़े चौंकाने वाले रहे। सदन में मौजूद सदस्यों में से 298 सांसदों ने बिल के पक्ष में अपना मत दिया, जबकि विपक्ष के 230 सांसदों ने इसके खिलाफ वोट किया। हालांकि सरकार के पास साधारण बहुमत मौजूद था, लेकिन चूंकि ये संविधान संशोधन विधेयक थे, इसलिए इन्हें पारित कराने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत की अनिवार्य आवश्यकता थी। विपक्ष के कड़े विरोध और एकजुटता के कारण सरकार इस जादुई आंकड़े (दो-तिहाई बहुमत) तक पहुँचने में विफल रही और अंततः ये विधेयक सदन में गिर गए।

प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की समर्थन की अपील रही बेअसर

मतदान प्रक्रिया शुरू होने से पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी दलों से अत्यंत भावुक और तर्कपूर्ण अपील की थी। उन्होंने कहा कि यह किसी दल विशेष का नहीं बल्कि देश की आधी आबादी के सम्मान और अधिकारों का विषय है। प्रधानमंत्री ने विपक्ष से आग्रह किया था कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस ऐतिहासिक कदम का समर्थन करें। सरकार का तर्क था कि ये विधेयक महिलाओं को कानून बनाने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेंगे, लेकिन विपक्ष अपनी मांगों और आपत्तियों पर अड़ा रहा।

गृह मंत्री अमित शाह का विपक्ष पर तीखा प्रहार

मतदान से पहले बहस का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष, विशेषकर ‘इंडी अलायंस’ पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने सदन में कहा कि विपक्ष का विरोध केवल परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर नहीं है, बल्कि वे बुनियादी तौर पर महिलाओं को आरक्षण दिए जाने के खिलाफ हैं। शाह ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल केवल महिला सशक्तिकरण का ढोंग करते हैं, लेकिन जब इसे कानून में बदलने का समय आया तो वे पीछे हट गए। गृह मंत्री के इस तीखे भाषण के बाद सदन में काफी हंगामा भी हुआ, जिसने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की खाई को और चौड़ा कर दिया।

विपक्ष की आपत्तियां और परिसीमन पर छिड़ा विवाद

विपक्षी दलों का मुख्य विरोध परिसीमन विधेयक 2026 को लेकर था। विपक्ष का तर्क है कि आरक्षण को परिसीमन की शर्त के साथ जोड़ना महिलाओं के साथ अन्याय है। विपक्षी नेताओं ने मांग की थी कि आरक्षण को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए और इसे जनगणना या सीटों के पुनर्निर्धारण की लंबी प्रक्रिया में न फंसाया जाए। विपक्ष का यह भी आरोप है कि सरकार परिसीमन के जरिए दक्षिण भारतीय राज्यों की राजनीतिक शक्ति को कम करने की कोशिश कर रही है। इन्हीं तकनीकी और राजनीतिक असहमतियों के कारण विपक्ष ने एकमत होकर विधेयकों के खिलाफ मतदान किया।

संवैधानिक प्रक्रिया और भविष्य की चुनौतियां

लोकसभा में इन बिलों के गिरने के बाद अब महिला आरक्षण का भविष्य अधर में लटक गया है। सरकार के लिए यह एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित होने के बाद इसे लागू करने की दिशा में यह एक अनिवार्य संवैधानिक कदम था। अब सरकार को या तो विपक्ष के साथ नए सिरे से संवाद स्थापित करना होगा या फिर भविष्य के सत्रों में संशोधन के साथ इन बिलों को दोबारा पेश करना होगा। फिलहाल, शुक्रवार की इस वोटिंग ने देश के सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।

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