Lok Sabha News: संसद में हंगामा और विपक्ष की गैरमौजूदगी, सरकार ने पेश किए चार अहम विधेयक

लोकसभा में हंगामे के बीच सरकार ने चार विधेयक सदन में पेश किए, जबकि विपक्षी सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी कार्यवाही में नहीं पहुंचे। विपक्ष की गैरमौजूदगी और सरकार के इस कदम ने संसद की कार्यवाही को लेकर सियासी चर्चाएं तेज कर दी हैं।

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Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 10, 2026

Lok Sabha News:  संसद के मानसून सत्र के चौथे सप्ताह की शुरुआत भी पिछले तीन हफ्तों की तरह बेहद हंगामेदार और तनावपूर्ण रही। अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) सहित तमाम विपक्षी दलों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया। इस जोरदार हंगामे के कारण सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई, जिसके चलते सदन में महत्वपूर्ण प्रश्नकाल और शून्यकाल जैसे जरूरी सत्र नहीं चल सके। हालांकि, भारी विरोध के बीच भी सरकार ने चार महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश किए, जबकि इस दौरान पूरा विपक्ष सदन से नदारद और अनुपस्थित रहा।

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही 11 बजते ही शुरू हुआ भारी हंगामा

सोमवार की सुबह जैसे ही ठीक 11 बजे लोकसभा की बैठक शुरू हुई, विपक्षी दलों के सांसदों ने अपनी सीटों पर खड़े होकर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी और वेल में आकर हंगामा करने लगे। सामान्य परिस्थितियों में प्रश्नकाल के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला आसन पर मौजूद होते हैं, लेकिन सोमवार को आरएसपी के वरिष्ठ नेता एन. के. प्रेमचंद्रन पीठासीन अधिकारी की भूमिका में थे। हंगामे और शोरगुल के बीच उन्होंने प्रश्नकाल को सुचारू रूप से चलाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन सदन में मची भारी अव्यवस्था और अराजकता के कारण बैठक शुरू होने के महज एक मिनट के भीतर ही कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

दोपहर 12 बजे दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर भी नहीं थमा हंगामा

दोपहर 12 बजे जब सदन की कार्यवाही एक बार फिर से शुरू हुई, तब भी जमीनी स्थिति में कोई सुधार देखने को नहीं मिला। पीठासीन सभापति संध्या राय के संचालन में सदन की बैठक आगे बढ़ी, लेकिन विपक्षी सांसद ‘गृह मंत्री कहां हैं?’ और सरकार विरोधी नारे लगातार लगाते रहे। इस भारी हंगामे और तीखी नारेबाजी के बीच ही केंद्र सरकार ने अपनी विधाई कार्यसूची को आगे बढ़ाते हुए चार अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रमुख विधेयक सदन के पटल पर रखे। विपक्षी सांसदों के सदन में मौजूद न होने या वॉकआउट करने के कारण इन विधेयकों को बिना किसी खास बाधा के सदन में पेश कर दिया गया।

विपक्ष की अनुपस्थिति में सरकार द्वारा पेश किए गए चार प्रमुख विधेयक

सदन में विपक्ष की अनुपस्थिति के दौरान जिन चार प्रमुख विधेयकों को पटल पर रखा गया, उनमें विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा पेश किया गया ‘न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026’ शामिल है। इसके अलावा, कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने ‘खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ सदन में रखा। सूची के अनुसार, अन्य दो विधेयकों में ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ को गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने पेश किया, जबकि ‘राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026’ सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल द्वारा सदन के सामने प्रस्तुत किया गया।

अमित शाह की जगह केंद्रीय राज्य मंत्रियों ने प्रस्तुत किए अहम विधेयक

गौरतलब है कि अंतिम दो महत्वपूर्ण विधेयक मूल रूप से आधिकारिक कार्यसूची में देश के केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह के नाम से ही सूचीबद्ध किए गए थे। लेकिन उनकी किन्हीं व्यस्तताओं या अनुपस्थिति के चलते इन विधेयकों को संबंधित विभागों के केंद्रीय राज्य मंत्रियों द्वारा सदन के पटल पर प्रस्तुत किया गया। विपक्षी दलों ने सरकार की इस कार्यशैली पर भी सवाल उठाने की कोशिश की, लेकिन सदन में जारी शोरगुल के कारण उनकी आवाज दब गई।

2 बजे तक के लिए लोकसभा की कार्यवाही को करना पड़ा स्थगित

पीठासीन सभापति संध्या राय ने इन विधेयकों को पेश किए जाने का विरोध दर्ज कराने के लिए कुछ विपक्षी सदस्यों के नाम भी पुकारे, लेकिन सदन में लगातार जारी नारेबाजी और हंगामे के कारण कोई चर्चा संभव नहीं हो सकी। सदन में अनुशासन और व्यवस्था बनते न देख पीठासीन सभापति ने दोपहर 12:14 बजे ही लोकसभा की बैठक को अपराह्न 2:00 बजे तक के लिए स्थगित करने का बड़ा ऐलान कर दिया। इस प्रकार मानसून सत्र का यह दिन भी बिना किसी सार्थक विधاي चर्चा के हंगामे की भेंट चढ़ गया।

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