TMC rebel MPs : सुदीप-काकलियों ने मांगे 14 दिन, एनसीपीआई के 20 सांसदों पर फिर बढ़ा सस्पेंस

लोकसभा के 20 सांसदों से जुड़ा दल-बदल विवाद फिर सुर्खियों में है। सुदीप बंद्योपाध्याय और काकली घोष दस्तीदार अब स्पीकर से 14 दिन की नई मोहलत मांग रहे हैं। पहले भी कई बार समय मिल चुका है, लेकिन जवाब तैयार नहीं हुआ। अब सवाल है, स्पीकर अगली मांग स्वीकार करेंगे या नहीं।

TMC rebel MPs

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 8, 2026

TMC rebel MPs : लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर एनसीपीआई के साथ राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करने वाले 20 सांसदों का मामला एक बार फिर अटक गया है। सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय और काकली घोष दस्तीदार समेत अन्य सांसद अब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से जवाब देने के लिए 14 दिन का अतिरिक्त समय मांग रहे हैं। सुदीप ने गुरुवार को बताया कि उनका पत्र शाम 5 बजे तक लोकसभा सचिवालय पहुंच जाएगा।

जवाब देने की समयसीमा गुरुवार को हो रही खत्म

एनसीपीआई से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के संसदीय दल के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष से बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया था। इसके बाद गुरुवार को कोलकाता स्थित सुदीप के आवास पर एनसीपीआई के सांसदों की बैठक हुई, जिसमें एक बार फिर समय बढ़ाने के विकल्प पर चर्चा की गई।

पहले भी कई बार बढ़ चुकी है समयसीमा

दिलचस्प बात यह है कि सांसदों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए पहले भी कई मौके दिए जा चुके हैं। शुरुआत में उन्हें सात दिन का समय मिला था। इसके बाद तीन सप्ताह और फिर दो सप्ताह की अतिरिक्त मोहलत दी गई। अब एक बार फिर 14 दिन का समय मांगा जा रहा है। इससे पूरे मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी सस्पेंस और बढ़ गया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी दिया गया था हवाला

शुरुआत में एनसीपीआई सांसदों की योजना थी कि वे सुप्रीम कोर्ट की ओर से एक महीने का समय दिए जाने का हवाला देकर लोकसभा अध्यक्ष से भी अतिरिक्त समय मांगेंगे। हालांकि, बाद में सुदीप और काकली ने अपने वकीलों से इस मुद्दे पर सलाह ली। वकीलों ने उन्हें बताया था कि 8 अक्टूबर की निर्धारित समयसीमा के भीतर जवाब तैयार किया जा सकता है।

तय समय में तैयार नहीं हुआ जवाब

कानूनी सलाह के बावजूद निर्धारित समय के भीतर सांसदों का जवाब तैयार नहीं हो पाया। यही वजह है कि अब उन्हें लोकसभा अध्यक्ष से फिर समय मांगना पड़ रहा है। गुरुवार को मौजूदा समयसीमा समाप्त होने के कारण सांसदों की ओर से भेजे जाने वाले पत्र पर सभी की नजरें टिकी हैं।

स्पीकर ने पूछे हैं पार्टी बदलने को लेकर सवाल

लोकसभा अध्यक्ष की ओर से सांसदों से मुख्य रूप से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर एनसीपीआई में शामिल होने का फैसला किस आधार पर लिया। इसके साथ ही उनसे यह भी पूछा गया है कि उनके खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून क्यों लागू नहीं होना चाहिए। इन्हीं सवालों का जवाब अब सांसदों को देना है।

तृणमूल ने साधा निशाना

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तृणमूल कांग्रेस की ओर से भी लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने सोशल मीडिया पर सुदीप को निशाने पर लिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए सुदीप के एक पत्र का हवाला देते हुए सवाल किया कि जब पत्र के लेटरहेड पर खुद को एनसीपीआई सांसद बताया गया है, तो यही पहचान लोकसभा अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के सामने क्यों नहीं रखी जा रही है।

सदस्यता का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने 18 जून को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के सामने इन 20 सांसदों की सदस्यता समाप्त करने के लिए अलग-अलग आवेदन दिए थे। स्पीकर की ओर से इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया और इन सांसदों को एनसीपीआई सांसद के रूप में भी औपचारिक मान्यता नहीं दी गई।

अभिषेक बनर्जी ने उठाया था मुद्दा

स्पीकर की ओर से निर्णय में देरी का आरोप लगाते हुए अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इसके बाद 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने 20 सांसदों को नोटिस जारी किया। अदालत ने लोकसभा अध्यक्ष और महासचिव का पक्ष भी जानना चाहा। इसके बाद लोकसभा सचिवालय की ओर से सांसदों को नोटिस भेजकर उनकी स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया।

अब फिर बढ़ेगा इंतजार?

सांसदों को शुरुआत में 22 सितंबर तक जवाब देने का निर्देश दिया गया था। समयसीमा खत्म होने के बाद सुदीप-काकली की ओर से एक महीने की अतिरिक्त मोहलत मांगी गई थी। स्पीकर ने उनकी मांग पर दो सप्ताह का समय दिया था, जिसकी अवधि अब समाप्त हो रही है। ऐसे में 14 दिन की नई मांग मंजूर होती है या नहीं, यह पूरे विवाद की अगली दिशा तय कर सकता है।

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