Lok Sabha Monsoon Session: लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, आखिरी दिन सदन पहुंचे शाह – मोदी

लोकसभा का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया, लेकिन आखिरी दिन सदन का माहौल बेहद खास रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत कई बड़े नेता पहुंचे। आखिर आखिरी दिन सदन में क्या हुआ, कौन से मुद्दे छाए रहे और सत्र का समापन कैसे हुआ? पूरी कहानी जानिए।

Lok Sabha Monsoon Session

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 13, 2026

Lok Sabha Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन गुरुवार को भी लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार टकराव देखने को मिला। लगातार हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही निर्धारित समय से पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। तय कार्यक्रम के अनुसार 13 अगस्त को सत्र का अंतिम दिन था, लेकिन आमतौर पर सदन की कार्यवाही शाम तक चलने के बावजूद इसे करीब 11 बजे ही स्थगित कर दिया गया। इसके साथ ही मानसून सत्र का औपचारिक समापन हो गया।

आखिरी दिन सदन में पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह

सत्र के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी संसद पहुंचे। खास तौर पर अमित शाह की मौजूदगी चर्चा का विषय रही, क्योंकि 20 जुलाई को मानसून सत्र शुरू होने के बाद पहली बार वह सदन में नजर आए। विपक्ष लगातार दिल्ली में हुए लाठीचार्ज और छात्रों से जुड़े आंदोलन के मुद्दे पर गृह मंत्री से सदन में जवाब की मांग कर रहा था। ऐसे में शाह की मौजूदगी को लेकर राजनीतिक हलकों में भी काफी चर्चा रही।

कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने किया जोरदार हंगामा

लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्षी सदस्य सरकार से जवाब की मांग करते हुए सदन में विरोध जताते रहे। हालांकि, कुछ समय के लिए माहौल शांत हुआ और सदन में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का आयोजन हुआ। इसके बाद एक बार फिर सदन की कार्यवाही आगे बढ़ने के बजाय स्थगित कर दी गई। इस तरह आखिरी दिन भी सदन में अपेक्षित विधायी कामकाज नहीं हो सका।

स्पीकर के टी कार्यक्रम से भी विपक्ष ने बनाई दूरी

संसद सत्र की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष की ओर से आयोजित पारंपरिक टी कार्यक्रम में भी विपक्ष की नाराजगी दिखाई दी। कांग्रेस के साथ इंडिया गठबंधन के कई दलों के सांसद इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। विपक्षी दलों की ओर से कार्यक्रम से दूरी बनाए जाने को पूरे सत्र के दौरान सरकार के साथ बने राजनीतिक मतभेदों से जोड़कर देखा गया।

पूरे सत्र में हंगामे के कारण प्रभावित रही कार्यवाही

मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर लगातार टकराव बना रहा। विपक्षी दल दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज के मामले में अमित शाह से जवाब की मांग करते रहे। इसके अलावा राम मंदिर से जुड़े चंदे के कथित मामले पर भी चर्चा कराने की मांग विपक्ष ने उठाई। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने ‘चंदा किसने लूटा’ और ‘अमित शाह सदन में आओ’ जैसे नारे लगाए।

अमित शाह ने चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही

सत्र के अंतिम दिनों में सरकार ने विपक्ष को यह संदेश देने की कोशिश की कि वह महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। सोमवार को सरकार की ओर से कहा गया कि विपक्ष को चर्चा का मौका दिया जाएगा और सरकार भी उसके सवालों का जवाब देगी। इसी दौरान सत्ता पक्ष की ओर से राहुल गांधी के खिलाफ भी नारेबाजी की गई और उनसे सदन में चर्चा से भागने के बजाय हिस्सा लेने की अपील की गई।

गृह मंत्री ने स्पीकर को पत्र लिखकर दिया जवाब का भरोसा

इसके बाद बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह ने खुद स्पष्ट किया कि वह विपक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर कहा कि उन्हें चर्चा के लिए उचित समय दिया जाए और वह उठाए जाने वाले सवालों का उत्तर देंगे। शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह चर्चा करने के बजाय केवल हंगामा कर रहा है। हालांकि, विपक्ष अपनी मांगों पर कायम रहा।

एनडीए सांसदों ने झारखंड लाठीचार्ज का मुद्दा उठाया

मानसून सत्र के अंतिम दिनों में एनडीए सांसदों ने झारखंड में छात्र आंदोलन के दौरान हुए लाठीचार्ज का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया। सत्ता पक्ष के सांसदों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी की और उनसे इस मामले में जवाब देने की मांग की। उनका आरोप था कि विपक्ष एकतरफा तरीके से दिल्ली की घटना को मुद्दा बना रहा है, जबकि झारखंड में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर भी चर्चा होनी चाहिए।

संसद परिसर में आमने-सामने आए दोनों पक्ष

सत्र के आखिरी दिन राजनीतिक टकराव उस समय और बढ़ गया, जब एनडीए और विपक्षी सांसद संसद परिसर में प्रदर्शन करते हुए आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों की ओर से जमकर नारेबाजी हुई। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए सुरक्षा कर्मी दोनों पक्षों के बीच खड़े रहे। इस दौरान विपक्ष अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करता रहा, जबकि एनडीए सांसद राहुल गांधी और झारखंड में हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर नारे लगाते नजर आए।

प्रियंका गांधी ने सत्ता पक्ष के प्रदर्शन पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने एनडीए सांसदों के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसा दृश्य उन्होंने पहली बार देखा है। उनका कहना था कि सत्ता पक्ष के सांसदों का इस तरह प्रदर्शन करना संसद की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बच रही है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना रहा कि विपक्ष खुद सदन को चलने नहीं दे रहा।

हंगामे के बीच समाप्त हुआ मानसून सत्र

मानसून सत्र का अंतिम दिन भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और नारेबाजी के बीच समाप्त हो गया। सदन की कार्यवाही निर्धारित समय से पहले स्थगित होने के बाद अब पूरे सत्र के कामकाज का आकलन आधिकारिक रिकॉर्ड से किया जाएगा। इस सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस और टकराव देखने को मिला। हालांकि, लगातार हंगामे के कारण कई मौकों पर संसद की कार्यवाही बाधित रही।

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