Parliament Rules: संसद में डिजिटल अटेंडेंस! देरी से आने वाले सांसदों की कटेगी सैलरी

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सांसदों के लिए 'सदन के भीतर डिजिटल हाजिरी' अनिवार्य कर दी है। अब रजिस्टर में साइन कर गायब होने वाले सांसदों की एक दिन की सैलरी कटेगी। साथ ही, संसद की कार्यवाही में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग शुरू हो गया है, जिससे भाषणों का अनुवाद अब मात्र 30 मिनट में संभव होगा।

Parliament Rules

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जनवरी 21, 2026

Parliament Rules: संसद की कार्यवाही को अधिक पारदर्शी और अनुशासित बनाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कड़े नियमों की घोषणा की है। अब सांसदों के लिए सदन में केवल उपस्थिति दर्ज कराना ही काफी नहीं होगा, बल्कि उन्हें समय की पाबंदी का भी विशेष ध्यान रखना होगा। डिजिटल इंडिया की दिशा में कदम बढ़ाते हुए अब सांसदों की हाजिरी की व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने की तैयारी कर ली गई है।

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सांसदों की डिजिटल हाजिरी और उपस्थिति के नए कड़े नियम

बताते चले कि, अभी तक लोकसभा सदस्य सदन के बाहर रखे एक रजिस्टर पर हस्ताक्षर करके अपनी उपस्थिति दर्ज कराते थे। लेकिन अब इस पुरानी व्यवस्था को खत्म कर सदन के भीतर डिजिटल अटेंडेंस की शुरुआत की जा रही है। नए नियमों के अनुसार, यदि कोई सांसद सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद देरी से पहुंचता है और उसके आने से पहले ही किसी हंगामे या अन्य कारण से सदन स्थगित हो जाता है, तो उस सांसद को उस दिन के लिए ‘अनुपस्थित’ (Absent) माना जाएगा।

वेतन कटौती का प्रावधान और अनुशासन पर जोर

आपको बता दे कि, लोकसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि जो सांसद देरी से आएंगे, उन्हें न केवल अनुपस्थित माना जाएगा, बल्कि उनकी उस दिन की सैलरी (Daily Allowance) भी काट ली जाएगी। अक्सर यह देखा गया है कि कई सांसद रजिस्टर में साइन करके निकल जाते थे या कार्यवाही समाप्त होने के वक्त पहुँचते थे। इस ‘अनोखी पहल’ का मुख्य उद्देश्य सांसदों की सदन में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना और “साइन करके भागने” की प्रवृत्ति पर लगाम लगाना है। अब संसद पूरी तरह से डिजिटल वर्कफ्लो पर आधारित होगी।

संसदीय कार्यवाही में AI का समावेश

अनुशासन के साथ-साथ संसद की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। ओम बिरला ने बताया कि संसद में एआई (AI) तकनीक की टेस्टिंग अंतिम चरण में है। वर्तमान में सांसदों के भाषणों के अनुवाद के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया जा रहा है, जिसकी सटीकता की जांच विशेषज्ञों द्वारा की जाती है। यह कदम संसद को आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

मॉनसून सत्र तक रियल-टाइम ट्रांसलेशन का लक्ष्य

लोकसभा अध्यक्ष को उम्मीद है कि आगामी मॉनसून सत्र तक अनुवाद प्रक्रिया पूरी तरह एआई आधारित हो जाएगी। वर्तमान में सदन की कार्यवाही के अनुवाद को आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड होने में लगभग 4 घंटे का समय लगता है, लेकिन एआई के पूर्ण उपयोग के बाद यह काम महज 30 मिनट में पूरा हो जाएगा। इससे जनता और मीडिया तक सदन की जानकारी कहीं अधिक तेजी और सटीकता के साथ पहुँच सकेगी।

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