Women’s Reservation Bill: संसद में परिसीमन और महिला आरक्षण पर संग्राम, संजय झा का विपक्ष पर पलटवार

लोकसभा में 2029 के चुनावों से पहले महिला आरक्षण लागू करने के उद्देश्य से तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए गए। जदयू सांसद संजय झा ने विपक्ष द्वारा परिसीमन का विरोध करने पर इसे 'राजनीतिक ड्रामा' करार दिया। इन विधेयकों के जरिए लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है, जिससे देश के राजनीतिक ढांचे में बड़ा बदलाव आएगा।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 16, 2026

Women’s Reservation Bill: लोकसभा में गुरुवार को भारती हंगामे के बीच तीन महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन विधयक पेश किए गए. इन विधियकों का उद्देश्य 2029 के आम चुनावों से पहले महिला आरक्षण को वास्विकता बनाना और निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन करना है। जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय कुमार झा ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे केवल “राजनीतिक ड्रामा” कर रहे हैं और विकास के मार्ग में बाधा डाल रहे हैं।

उत्तर-दक्षिण विभाजन के दावों को नकारा

बताते चले कि, संजय कुमार झा ने विपक्ष के उस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि परिसीमन विधेयक, 2026 से उत्तर और दक्षिण भारत के बीच राजनीतिक असंतुलन पैदा होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीटों की संख्या में प्रस्तावित बढ़ोतरी हर राज्य के लिए समान रूप से लाभकारी होगी। झा ने एएनआई (ANI) से बातचीत में सवाल उठाया कि जब हर क्षेत्र में सीटों की संख्या लगभग 50% बढ़ने वाली है, तो इससे कोई खाई कैसे चौड़ी हो सकती है? उन्होंने इसे महिला आरक्षण को रोकने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन

आपको बता दे कि, जदयू सांसद ने याद दिलाया कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही संसद द्वारा पारित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी पार्टी शुरू से ही महिलाओं को अधिकार देने के पक्ष में रही है। संजय झा ने आश्चर्य जताया कि जब यह कानून पहले ही पारित हो चुका है, तो अब कार्यान्वयन के समय विपक्ष इसका विरोध क्यों कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर केवल नाटक कर रहा है, जबकि सरकार इसे धरातल पर उतारने के लिए गंभीर है।

सदन में मत विभाजन की प्रक्रिया

जब संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 को पेश किया गया, तो विपक्ष ने ‘ध्वनि मत’ के बजाय ‘मत विभाजन’ की मांग की। स्थिति को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मतदान की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। इस दौरान सदन के महासचिव उत्पल कुमार सिंह ने सांसदों को डिजिटल वोटिंग प्रणाली के माध्यम से ‘पक्ष’ (AYES), ‘विपक्ष’ (NOES) और ‘तटस्थ’ (ABSTAIN) वोट डालने की बारीकियां समझाईं। यह प्रक्रिया सदन में बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच संपन्न हुई।

लोकसभा सीटों की संख्या 850 करने का लक्ष्य

मतदान के नतीजों ने सरकार के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। कुल 333 वोटों में से 251 वोट पक्ष में और 185 वोट विपक्ष में पड़े। इसके साथ ही तीन प्रमुख विधेयक—संविधान संशोधन, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक—सदन के पटल पर रखे गए। सरकार का लक्ष्य लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करना है, जिसमें राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें आरक्षित होंगी।

संवैधानिक बदलावों का व्यापक प्रभाव

प्रस्तावित बदलावों के तहत, 2023 के अधिनियम में संशोधन कर परिसीमन की प्रक्रिया को 2027 की आगामी जनगणना से अलग किया जाएगा। सरकार की योजना 2029 के आम चुनावों से पहले सीटों का पुनर्गठन कर महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने की है। हालांकि, विपक्ष का विरोध इस बात पर केंद्रित है कि 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का निर्धारण दक्षिण भारतीय राज्यों के प्रतिनिधित्व को कम कर सकता है, लेकिन सरकार इसे भविष्य की प्रशासनिक आवश्यकताओं के लिए अनिवार्य मान रही है।