Gaurav Gogoi in Lok Sabha: ‘कानून होने के बावजूद लगातार लीक क्यों हो रहे हैं पेपर?’ लोकसभा में गौरव गोगोई के तीखे सवालों से घिरी सरकार

लोकसभा में एक सप्ताह के गतिरोध के बाद पेपर लीक विरोधी संशोधन विधेयक पर चर्चा शुरू हो गई है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसे युवाओं के भविष्य की सुरक्षा बताया, वहीं कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार को घेरते हुए छात्रों पर लाठीचार्ज और परीक्षा प्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। इस नए बिल में 10 साल की जेल का प्रावधान है।

Gaurav Gogoi in Lok Sabha

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 28, 2026

Gaurav Gogoi in Lok Sabha: एक सप्ताह से लगातार जारी राजनीतिक गतिरोध को आखिरकार समाप्त करते हुए, लोकसभा में मंगलवार (28 जुलाई 2026) को बहुप्रतीक्षित पेपर लीक विरोधी संशोधन विधेयक पर औपचारिक रूप से चर्चा शुरू हो गई है। सदन में सरकार की तरफ से चर्चा की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मोदी सरकार देश के करोड़ों मेधावी छात्रों और युवाओं के कल्याण व उनके भविष्य की रक्षा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर अपनी बात रखते हुए केंद्रीय मंत्री ने सदन को बताया कि वर्तमान सरकार ने साल 2024 में लाए गए परीक्षा संबंधी कड़े कानूनों के दायरे को और अधिक व्यापक बनाते हुए परीक्षा में होने वाले अनुचित साधनों पर पूरी तरह लगाम लगाने के अधूरे कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। हालांकि, जैसे ही सदन में इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा आगे बढ़ी, विपक्षी दलों ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए तीखे सवाल खड़े कर दिए।

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई का सरकार पर तीखा हमला

विपक्ष की ओर से मोर्चा संभालते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार को घेरते हुए बेहद तीखे सवाल पूछे। गोगोई ने लोकसभा में कहा कि देश भर के युवाओं और माता-पिता ने अपने बच्चों को पूरी उम्मीद और आशीर्वाद देकर विरोध प्रदर्शनों में भेजा था क्योंकि यह उनके उज्ज्वल भविष्य का सीधा सवाल है। उन्होंने कहा कि जब छात्रों को मजबूर होकर सड़कों पर उतरना पड़ा, तो सरकार को उनकी पीड़ा और दर्द को समझना चाहिए था, न कि उन पर अत्याचार करना चाहिए था।

गोगोई ने तंज कसते हुए कहा कि बिल के प्रावधानों और तौर-तरीकों को पढ़कर साफ-साफ जाहिर होता है कि यह सरकार शिक्षा विभाग की व्यवस्था को सुधारने को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। उन्होंने कड़े शब्दों में पूछा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही छात्राओं और छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़ने और बर्बर लाठीचार्ज करने का आदेश आखिरकार किसने दिया था?

NTA की कार्यप्रणाली पर भी उठे गंभीर सवाल

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और सत्ता पक्ष के रवैये पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व शिक्षा मंत्री के कार्यकाल के दौरान देश के कई मेधावी बच्चों ने अपनी जान गंवा दी, लेकिन जब वे अपने पद से इस्तीफा देने के बाद संसद परिसर में लौटे, तो बीजेपी सांसदों ने उनका इस तरह भव्य स्वागत किया मानो वे कोई जंग जीतकर आए हों। गोगोई ने सवाल उठाया कि NTA के मुख्य अधिकारियों पर अब तक सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई और आज तमाम बड़े पदों पर विशेष विचारधारा के लोगों को क्यों बैठाया जा रहा है? इस बीच, चर्चा के दौरान क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी (RSP) के सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखते हुए मांग की कि इस विधेयक को आगामी 1 दिसंबर तक सभी संबंधित हितधारकों के परामर्श के लिए भेज दिया जाना चाहिए ताकि इसे और अधिक फलदायी व त्रुटिहीन बनाया जा सके।

देशव्यापी आक्रोश के बाद सरकार ने पेश किया नया सख्त बिल

गौरतलब है कि नीट (NEET) और अन्य प्रमुख परीक्षाओं में हुई भारी गड़बड़ियों तथा उसके बाद देश भर में भड़के छात्र विरोध प्रदर्शनों के बीच, जिसके चलते पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना पद छोड़ना पड़ा था, सरकार ने इस नए संशोधन विधेयक को लोकसभा में पेश किया है। इस कड़े कानून के तहत पेपर लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी के मामलों में दोषियों के लिए 10 साल तक की लंबी जेल और 50 लाख रुपये तक के भारी-भरकम जुर्माने का सख्त प्रावधान किया गया है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस अति-महत्वपूर्ण विधेयक पर व्यापक चर्चा के लिए सदन में छह घंटे का विशेष समय निर्धारित किया है, ताकि सभी राजनीतिक दल इस पर खुलकर अपने सुझाव रख सकें और देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता व विश्वसनीयता को पूरी तरह बहाल किया जा सके।