Opposition Suspension: संसद में फिर गूंजेगी विपक्ष की आवाज; 8 सांसदों की सदस्यता बहाल, बनी सहमति

लोक सभा में लंबे समय से निलंबित चल रहे विपक्ष के 8 सांसदों की सदस्यता बहाल कर दी गई है। स्पीकर ओम बिरला द्वारा 11 फरवरी को की गई इस कार्रवाई के बाद, पक्ष और विपक्ष के बीच बनी सहमति के बाद यह फैसला लिया गया। अब ये सभी सदस्य बजट सत्र के दूसरे चरण की कार्यवाही में हिस्सा ले सकेंगे।

Opposition Suspension:

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मार्च 17, 2026

Opposition Suspension: भारतीय संसद के निचले सदन, लोक सभा से विपक्ष के लिए एक उत्साहजनक समाचार प्राप्त हुआ है। पिछले कई दिनों से सदन की कार्यवाही से दूर चल रहे विपक्ष के 8 माननीय सदस्यों का निलंबन आखिरकार वापस ले लिया गया है। ज्ञात हो कि गत 11 फरवरी को सदन में भारी हंगामे और अव्यवस्था के चलते स्पीकर ओम बिरला ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए इन सांसदों को निलंबित कर दिया था। अब पक्ष और विपक्ष के बीच हुए आपसी समझौते के बाद ये सभी सदस्य पुनः लोक सभा की चर्चाओं और विधायी कार्यों में हिस्सा ले सकेंगे।

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कांग्रेस द्वारा उठाया गया निलंबन वापसी का मुद्दा

वर्तमान में संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण प्रगति पर है। इस दौरान मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सदन के भीतर अपने साथियों की वापसी के लिए पुरजोर आवाज उठाई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सदन की गरिमा का हवाला देते हुए स्पीकर से आग्रह किया कि निलंबित सांसदों को वापस बुलाया जाए। वेणुगोपाल ने तर्क दिया कि हमारे निर्वाचित सदस्य सदन के बाहर बैठे हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए उचित नहीं है। उन्होंने इस विषय पर तुरंत निर्णय लेने की मांग की, जिसे अंततः स्वीकार कर लिया गया।

भाजपा सांसद रवि किशन का बयान

विपक्षी सांसदों के निलंबन की समाप्ति पर भारतीय जनता पार्टी के सांसद रवि किशन ने सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने संसद को ‘देश की सबसे बड़ी पंचायत’ और ‘लोकतंत्र का मंदिर’ बताते हुए कहा कि सदन का संचालन प्रेम और सद्भाव से होना चाहिए। रवि किशन ने जोर देकर कहा कि संसद व्यक्तिगत टिप्पणियों के लिए नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं पर स्वस्थ बहस और वैचारिक विमर्श के लिए है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब सदन में कामकाज सुचारू रूप से चलेगा और सदस्य मर्यादा का पालन करेंगे।

अरुण गोविल का सुझाव

रामायण फेम और भाजपा सांसद अरुण गोविल ने भी इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सदन की एक विशिष्ट गरिमा होती है जिसका सम्मान करना प्रत्येक सदस्य का संवैधानिक उत्तरदायित्व है। गोविल ने विपक्षी सांसदों को नसीहत देते हुए कहा कि यदि वे सदन के नियमों और मर्यादाओं का पालन करते हैं, तो यह लोकतंत्र के लिए बहुत शुभ होगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में ऐसी नौबत नहीं आएगी और विपक्ष सदन की गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखने में सहयोग प्रदान करेगा।

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