CWG 2026: भारत की युवा महिला मुक्केबाज जैस्मिन लंबोरिया ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 57 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। 24 वर्षीय भारतीय बॉक्सर ने फाइनल मुकाबले में नॉर्दर्न आयरलैंड की मौजूदा चैंपियन मिकेला वॉल्श को हराकर भारत के लिए एक और गोल्ड मेडल सुनिश्चित किया। इस जीत के साथ जैस्मिन लंबोरिया राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बन गईं। इससे पहले प्रीति पवार ने भी भारत को मुक्केबाजी में स्वर्ण पदक दिलाया था।
डिफेंडिंग चैंपियन के खिलाफ दिखाया दमदार खेल
फाइनल मुकाबले में जैस्मिन लंबोरिया ने शुरुआत से ही आत्मविश्वास और आक्रामक रणनीति के साथ खेल दिखाया। उनके सामने नॉर्दर्न आयरलैंड की अनुभवी और डिफेंडिंग चैंपियन मिकेला वॉल्श थीं, लेकिन भारतीय मुक्केबाज ने उन्हें मुकाबले में हावी होने का कोई अवसर नहीं दिया। पूरे मुकाबले में जैस्मिन ने शानदार तकनीक, तेज गति और सटीक पंचों के दम पर अपना दबदबा बनाए रखा। उनके संतुलित प्रदर्शन ने निर्णायकों को भी प्रभावित किया और अंत में स्वर्ण पदक भारत की झोली में आया।
पहले राउंड में बनाई बढ़त
हरियाणा के भिवानी की रहने वाली जैस्मिन लंबोरिया ने मुकाबले की शुरुआत बेहद प्रभावशाली अंदाज में की। पहले राउंड में उन्होंने मिकेला वॉल्श पर लगातार दबाव बनाए रखा और 3-2 के अंतर से बढ़त हासिल कर ली। शुरुआती सफलता ने उन्हें आत्मविश्वास दिया, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी पर दबाव बढ़ गया। पहले राउंड के बाद ही यह संकेत मिल गया था कि भारतीय मुक्केबाज स्वर्ण पदक जीतने के मजबूत इरादे के साथ रिंग में उतरी हैं।
दूसरे और तीसरे राउंड में पूरी तरह रहीं हावी
पहले राउंड में बढ़त लेने के बाद जैस्मिन ने अपनी लय बरकरार रखी। दूसरे राउंड में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से जीत दर्ज की। इसके बाद तीसरे और अंतिम राउंड में भी उन्होंने अपने आक्रामक खेल को जारी रखा। उनकी लंबाई, तेज फुटवर्क और सटीक पंचों ने प्रतिद्वंद्वी को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। तीसरे राउंड में भी निर्णायकों ने 5-0 से उनके पक्ष में फैसला सुनाया।
जजों के स्कोर में मिली स्पष्ट बढ़त
फाइनल मुकाबले के बाद जजों के स्कोरकार्ड ने भी जैस्मिन लंबोरिया के शानदार प्रदर्शन की पुष्टि की। उन्होंने मिकेला वॉल्श को 29-28, 29-28, 29-28, 30-27 और 30-27 के अंतर से हराया। यह स्कोर बताता है कि भारतीय मुक्केबाज ने पूरे मुकाबले में लगातार बढ़त बनाए रखी और तकनीकी रूप से मजबूत प्रदर्शन किया। निर्णायकों ने उनके आक्रामक और नियंत्रित खेल को बेहतर मानते हुए सर्वसम्मति से विजेता घोषित किया।
भिवानी की बेटी ने बढ़ाया देश का मान
हरियाणा का भिवानी जिला लंबे समय से भारतीय मुक्केबाजी का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। इसी शहर से निकली जैस्मिन लंबोरिया ने एक बार फिर साबित किया कि भिवानी देश को लगातार बेहतरीन मुक्केबाज देने की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। लगभग 5 फुट 9 इंच लंबी जैस्मिन ने अपनी फिटनेस, तकनीकी क्षमता और अनुशासन के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव बढ़ाया है। उनकी यह उपलब्धि युवा खिलाड़ियों, विशेषकर महिला मुक्केबाजों के लिए प्रेरणादायक मानी जा रही है।
भारत के मुक्केबाजी अभियान को मिली नई मजबूती
जैस्मिन लंबोरिया के स्वर्ण पदक ने राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के मुक्केबाजी अभियान को और मजबूती प्रदान की है। लगातार भारतीय मुक्केबाजों के शानदार प्रदर्शन से यह स्पष्ट हो रहा है कि देश की बॉक्सिंग टीम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत दावेदारी पेश कर रही है। महिला मुक्केबाजों की सफलता भारतीय खेलों के लिए भी सकारात्मक संकेत है और इससे आने वाले वर्षों में नई प्रतिभाओं को प्रेरणा मिलेगी।
भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में जैस्मिन लंबोरिया का स्वर्ण पदक केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय मुक्केबाजी के बढ़ते स्तर का भी प्रमाण है। डिफेंडिंग चैंपियन को हराकर गोल्ड जीतना उनकी मेहनत, तैयारी और आत्मविश्वास को दर्शाता है। इस जीत ने भारत के पदक अभियान को नई ऊंचाई दी है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय महिला मुक्केबाजी की मजबूत पहचान को और सशक्त बनाया है।
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