अब बेअदबी पर उम्रकैद: पंजाब में ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब बिल 2026’ पास, राज्यपाल की मुहर

चंडीगढ़. जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब बिल 2026 को राज्यपाल गुलाब चन्द कटारिया ने मंजूरी दे दी है। अब बेअदबी करने वाले को उम्र कैद की सजा मिलेगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक्स पर पोस्ट डाल कर दी जानकारी दी है। पंजाब सरकार ने बैसाखी के पावन अवसर पर एक बड़ा और महत्वपूर्ण विधायी कदम उठाते हुए ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक-2026’ को विधानसभा में पेश किया था। इस विधेयक का उद्देश्य गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से जुड़े मामलों में सख्त सजा का प्रावधान करना और इसकी पवित्रता की रक्षा के लिए मजबूत कानूनी

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Published On :

अप्रैल 19, 2026

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चंडीगढ़.

जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब बिल 2026 को राज्यपाल गुलाब चन्द कटारिया ने मंजूरी दे दी है। अब बेअदबी करने वाले को उम्र कैद की सजा मिलेगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक्स पर पोस्ट डाल कर दी जानकारी दी है। पंजाब सरकार ने बैसाखी के पावन अवसर पर एक बड़ा और महत्वपूर्ण विधायी कदम उठाते हुए ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक-2026’ को विधानसभा में पेश किया था।

इस विधेयक का उद्देश्य गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से जुड़े मामलों में सख्त सजा का प्रावधान करना और इसकी पवित्रता की रक्षा के लिए मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करना है। मुख्यमंत्री भगवंत मान, जो गृह विभाग भी संभाल रहे हैं, ने यह विधेयक सदन में पेश किया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए यह कानून बेहद जरूरी है और इसमें पहले से कहीं अधिक सख्त प्रावधान किए गए हैं।

बेअदबी गैर-जमानती और संज्ञेय (कॉग्निज़ेबल ऑफेंस) बनाया गया
इस विधेयक में बेअदबी के अपराध को गैर-जमानती और संज्ञेय (कॉग्निज़ेबल ऑफेंस) बनाया गया है, जिससे पुलिस बिना वारंट के कार्रवाई कर सकेगी। ऐसे मामलों की सुनवाई सत्र न्यायालय में होगी और जांच केवल डीएसपी या सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारियों द्वारा ही की जाएगी। संशोधन के तहत कानून की भाषा में भी बदलाव किया गया है। पहले जहां “बीड़” शब्द का उपयोग होता था, उसे बदलकर “स्वरूप” किया गया है, ताकि धार्मिक परंपराओं के अनुरूप शब्दावली का इस्तेमाल किया जा सके। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि गुरु ग्रंथ साहिब के सरूपों की छपाई, प्रकाशन, भंडारण और वितरण केवल शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी या उसके अधिकृत संस्थानों द्वारा ही किया जाएगा।

संरक्षक करेंगे स्वरूप की सुरक्षा
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस कानून में “संरक्षक” की परिभाषा भी जोड़ी गई है, जिसमें उन व्यक्तियों या संस्थाओं को शामिल किया गया है जो सरूप की देखभाल और मर्यादा के लिए जिम्मेदार होंगे। उनके लिए यह अनिवार्य होगा कि वे सरूप की सुरक्षा सुनिश्चित करें और किसी भी प्रकार की क्षति या बेअदबी की आशंका होने पर तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। बेअदबी की परिभाषा को भी इस कानून में विस्तारित किया गया है। इसमें न केवल भौतिक नुकसान जैसे जलाना, फाड़ना या चोरी करना शामिल है, बल्कि किसी भी प्रकार के मौखिक, लिखित, प्रतीकात्मक या डिजिटल माध्यम से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले कृत्य को भी इसमें शामिल किया गया है।

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