कूनो से ग्वालियर तक हाईवे पर चीतों की बढ़ी चहलकदमी, सुरक्षा बढ़ाने का लिया गया फैसला

ग्वालियर  श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में बसाए गए चीते बढ़ती संख्या के बाद अब वहां से 150 से 200 किमी दूर ग्वालियर-मुरैना तक चहलकदमी कर रहे हैं, कुछ चीते काफी दिनों से ग्वालियर-मुरैना में ही डेरा डाले हैं। ये चीते हाईवे पार करते हुए भी देखे गए हैं। हाईवे पार करते समय एक चीते की मौत भी हो चुकी है। ऐसे में वन विभाग ने चिंता जताते हुए हाईवे को पूरी तरह चीतों के लिए सुरक्षित करने की कवायद शुरू कर दी है। वन विभाग एनएचएआइ को प्रस्ताव भेजकर ग्वालियर से शिवपुरी तक हाईवे पर रेलिंग, तेज गति में

Wrriten By :

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Published On :

जनवरी 17, 2026

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ग्वालियर
 श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में बसाए गए चीते बढ़ती संख्या के बाद अब वहां से 150 से 200 किमी दूर ग्वालियर-मुरैना तक चहलकदमी कर रहे हैं, कुछ चीते काफी दिनों से ग्वालियर-मुरैना में ही डेरा डाले हैं। ये चीते हाईवे पार करते हुए भी देखे गए हैं। हाईवे पार करते समय एक चीते की मौत भी हो चुकी है।

ऐसे में वन विभाग ने चिंता जताते हुए हाईवे को पूरी तरह चीतों के लिए सुरक्षित करने की कवायद शुरू कर दी है। वन विभाग एनएचएआइ को प्रस्ताव भेजकर ग्वालियर से शिवपुरी तक हाईवे पर रेलिंग, तेज गति में चलने वाले वाहनों की गति नियंत्रण के लिए स्पीड कंट्रोलर व आटोमेटिक कैमरे लगाने का आग्रह करेगा। इसके अलावा वन विभाग वाहन चालकों को अलर्ट करते हुए चीतों के आवागमन संबंधी बोर्ड भी लगाने जा रहा है।

हो रहे दुर्घटना का शिकार

गौरतलब है कि 7 दिसंबर 2025 को घाटीगांव के सिमरिया टांका क्षेत्र में सड़क पार कर रहे चीते को एक कार ने टक्कर मार दी थी। यह चीता गामिनी का शावक था, जिसकी मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि उसके साथ मौजूद दूसरा चीता बाल-बाल बच गया। इसी इलाके में आशा चीता का शावक भी काफी समय से देखा जा रहा है। वहीं मुरैना जिले में भी एक चीते की मौजूदगी दर्ज की गई है।

वन विभाग का मानना है कि कूनो से बाहर निकलकर चीते नए और उपयुक्त जंगली क्षेत्रों की तलाश कर रहे हैं। ऐसे में हाईवे और आसपास के इलाकों में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

सात दिसंबर 2025 को ग्वालियर के घाटीगांव सिमरिया टांका पर रविवार सुबह कार ने सड़क पार कर रहे चीते को टक्कर मार दी थी। यह चीता गामिनी का शावक था। टक्कर लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। शावक के साथ दूसरा चीता बाल- बाल बच गया था। आशा चीता का शावक भी इसी इलाके में लंबे समय से मौजूद है। मुरैना जिले में भी एक चीता है, जिससे वन विभाग का मानना है कि कूनो से दूर भी चीता उपयुक्त जंगली माहौल तलाश रहे हैं, इसलिए यहां भी इनकी सुरक्षा बढ़ाना जरूरी है।

 

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