Iran US War: क्या ट्रंप की जिद अमेरिका को ले डूबेगी? लियोन पैनेटा की डरावनी चेतावनी

ईरान के खिलाफ राष्ट्रपति ट्रंप के आक्रामक रुख ने वाशिंगटन में दरार पैदा कर दी है। पूर्व रक्षा मंत्री लियोन पैनेटा ने आरोप लगाया है कि ट्रंप के पास युद्ध शुरू करने का जुनून तो है, लेकिन इसे खत्म करने की कोई योजना नहीं। क्या अमेरिका एक और वियतनाम जैसी त्रासदी की ओर बढ़ रहा है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 23, 2026

Iran US War: अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा सैन्य संघर्ष अब अपने चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है, लेकिन युद्ध विराम के कोई संकेत नजर नहीं आ रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह युद्ध एक ऐसे चक्रव्यूह के समान बन गया है, जिससे बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता दिखाई नहीं दे रहा। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, अमेरिकी प्रशासन पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता जा रहा है। विपक्षी दलों के साथ-साथ अब पूर्व सुरक्षा अधिकारी भी ट्रंप की युद्ध नीति पर तीखे सवाल उठा रहे हैं, जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण हो गई है।

लियोन पैनेटा का कड़ा प्रहार: “खुद के बुने जाल में फंसे ट्रंप”

अमेरिका के पूर्व रक्षा मंत्री और सीआईए (CIA) के पूर्व प्रमुख लियोन पैनेटा ने इस संकट को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप की कड़ी आलोचना की है। ‘द गार्जियन’ अखबार को दिए एक साक्षात्कार में पैनेटा ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस मौजूदा दलदल के लिए राष्ट्रपति ट्रंप खुद जिम्मेदार हैं। पैनेटा का मानना है कि बिना किसी दूरदर्शी योजना के युद्ध में उतरना अमेरिका के लिए आत्मघाती साबित हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि ट्रंप ने अपनी रणनीतिक गलतियों से खुद को एक ऐसी स्थिति में धकेल दिया है जहाँ से सम्मानजनक वापसी संभव नहीं दिखती।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: अमेरिका की सबसे कमजोर नस

पैनेटा ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बिंदु की ओर इशारा करते हुए कहा कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को दशकों से यह पता था कि ईरान के साथ युद्ध की स्थिति में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Hormuz Strait) सबसे बड़ा संकट बनेगा। ईरान इस जलडमरूमध्य को ब्लॉक करके वैश्विक तेल आपूर्ति को ठप करने की क्षमता रखता है। पैनेटा के अनुसार, यह कोई गोपनीय जानकारी नहीं थी, बल्कि एक ज्ञात खतरा था जिसे ट्रंप प्रशासन ने संघर्ष शुरू करने से पहले पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। आज यही क्षेत्र अमेरिका की सबसे बड़ी कमजोरी बनकर उभरा है।

ट्रंप के सामने दोराहा‘: युद्ध का विस्तार या हार की स्वीकारोक्ति?

पूर्व सीआईए प्रमुख ने संकेत दिया कि राष्ट्रपति अब एक बेहद कठिन चौराहे पर खड़े हैं। उनके पास केवल दो ही विकल्प बचे हैं: पहला, वे होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए सैन्य कार्रवाई का दायरा बढ़ाएं, जिससे ईरान पर दबाव बने और वह बातचीत की मेज पर आए। दूसरा विकल्प यह है कि वे अपनी हार स्वीकार करते हुए पीछे हट जाएं। हालांकि, पैनेटा का मानना है कि पीछे हटने से न केवल ट्रंप की व्यक्तिगत छवि धूमिल होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका का दबदबा भी स्थायी रूप से कमजोर हो जाएगा।

खामेनेई की मृत्यु के बाद ईरान का बढ़ता वर्चस्व

अमेरिका के इस आकलन पर भी पैनेटा ने सवाल उठाए कि सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के निधन के बाद ईरान बिखर जाएगा। पैनेटा ने तर्क दिया कि अमेरिका का यह सोचना भारी भूल थी कि नेतृत्व परिवर्तन से ईरान कमजोर होगा। इसके विपरीत, खामेनेई के बाद ईरान का शासन पहले से कहीं अधिक एकजुट, स्थिर और आक्रामक होकर उभरा है। ईरान ने अपनी आंतरिक चुनौतियों को दरकिनार कर युद्ध के मैदान में अपनी स्थिति को और मजबूत कर लिया है, जो अमेरिकी खुफिया तंत्र की विफलता को दर्शाता है।

अपनी ही रणनीतिक विफलता के जिम्मेदार स्वयं ट्रंप

अपने संबोधन के अंत में पैनेटा ने निष्कर्ष निकाला कि वर्तमान में अमेरिका जिस कठिन दौर से गुजर रहा है, वह किसी बाहरी ताकत की साजिश नहीं बल्कि स्वयं के नेतृत्व की अदूरदर्शिता का परिणाम है। उन्होंने दोहराया कि एक युद्ध को शुरू करना आसान होता है, लेकिन उसे तार्किक अंत तक पहुँचाना एक गंभीर नेतृत्व की पहचान है, जिसमें ट्रंप विफल रहे हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका इस सैन्य गतिरोध को कूटनीति से सुलझा पाएगा या यह संघर्ष किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध में तब्दील होगा।

Read More : ICC Player of the Month: भारत और पाकिस्तान का जलवा, आईसीसी ने अरुंधति और फरहान को क्यों चुना बेस्ट?