Lebanon Carnage: इजरायल ने 10 मिनट में बरसाए 100 बम, 250 मरे, खतरे में अमेरिका-ईरान सीजफायर

लेबनान की धरती पर मौत का तांडव! अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर के चंद घंटों बाद ही इजरायल ने 'ऑपरेशन इटरनल डार्कनेस' के तहत लेबनान पर 100 बम गिराए। इस हमले में 250 से अधिक लोग मारे गए। क्या इजरायल का यह कदम दुनिया को एक विनाशकारी युद्ध की ओर धकेल रहा है?

Lebanon Carnage

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 9, 2026

Lebanon Carnage: मिडिल ईस्ट में शांति की जो हल्की किरण अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्तों के युद्धविराम से दिखाई दी थी, वह चंद घंटों में ही खूनी संघर्ष में तब्दील हो गई है। वैश्विक कूटनीति को बड़ा झटका तब लगा जब सीजफायर लागू होने के कुछ ही समय बाद इजरायल ने लेबनान पर अपने इतिहास का सबसे घातक हमला बोल दिया। इस हमले ने न केवल लेबनान को दहला दिया है, बल्कि पूरी दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या यह युद्धविराम केवल एक दिखावा था।

खौफनाक मंजर: बेरूत में धमाकों की गूँज और सैकड़ों की मौत

बुधवार की दोपहर लेबनान की राजधानी बेरूत के लिए किसी कयामत से कम नहीं थी। शहर के आसमान में धुएं का गुबार और चारों तरफ मलबे के ढेर नजर आने लगे। लेबनानी सिविल डिफेंस के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, इस भीषण बमबारी में अब तक 250 से ज्यादा मासूमों और नागरिकों की जान जा चुकी है। घायलों की संख्या 1100 के पार पहुँच गई है। अकेले बेरूत में ही 91 लोगों के शव मलबे से निकाले गए हैं। लेबनान का स्वास्थ्य मंत्रालय डरा हुआ है कि मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश पूरी होने पर मौतों का यह आंकड़ा कहीं और भयावह न हो जाए।

इजरायली सेना की रणनीति: 10 मिनट में 100 ठिकानों पर बमबारी

इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए दावा किया कि उन्होंने महज 10 मिनट के भीतर हिजबुल्लाह के 100 से अधिक महत्वपूर्ण ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया। सेना के अनुसार, इन ठिकानों में हिजबुल्लाह के गुप्त कमांड सेंटर और सैन्य हथियार भंडार शामिल थे। दूसरी ओर, हिजबुल्लाह के नेता इब्राहिम अल मौसावी ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनके संगठन ने सीजफायर का सम्मान करते हुए हमले रोक दिए थे। उन्होंने इजरायल पर विश्वासघात का आरोप लगाते हुए कहा कि लेबनान को भी समझौते का हिस्सा बताया गया था, लेकिन इजरायल ने जानबूझकर निर्दोषों को निशाना बनाया।

नेतन्याहू का दो टूक बयान: ‘लेबनान समझौते का हिस्सा नहीं’

इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ तौर पर घोषणा की कि ईरान के साथ हुआ 14 दिनों का सीजफायर केवल विशिष्ट क्षेत्रों के लिए है और लेबनान इस समझौते की परिधि में नहीं आता है। अमेरिका की ओर से भी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस रुख का समर्थन करते हुए कहा कि अगर ईरान को लगा कि लेबनान सुरक्षित है, तो यह उनकी कूटनीतिक गलतफहमी थी। अमेरिका ने स्पष्ट किया कि इजरायल को अपनी सुरक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई जारी रखने का पूरा अधिकार है।

जमीनी हकीकत: अस्पतालों में हाहाकार और खून की कमी

लेबनान में मानवीय संकट गहरा गया है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने इस नरसंहार को “भयावह” करार दिया है। बेरूत के अस्पतालों में जगह कम पड़ गई है। एंबुलेंस की भारी किल्लत के चलते लोग अपने परिजनों को बाइक और निजी वाहनों से अस्पताल पहुँचा रहे हैं। अस्पतालों ने जनता से तत्काल रक्तदान की अपील की है ताकि घायलों की जान बचाई जा सके। कई रिहायशी इमारतें जमींदोज हो गई हैं और मलबे में दबी जिंदगियों को बचाने के लिए क्रेन और मशीनों का सहारा लिया जा रहा है।

वैश्विक तनाव: होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ी हलचल

इजरायल के इस हमले का असर अब समुद्री व्यापार मार्गों पर भी दिखने लगा है। सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव चरम पर है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईरान ने वहां तेल टैंकरों की आवाजाही पर अंकुश लगाना शुरू कर दिया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी जारी की है कि यदि लेबनान और ईरान से जुड़े हितों पर हमले नहीं रुके, तो वे इजरायल और अमेरिका को ऐसा जवाब देंगे जो इतिहास में याद रखा जाएगा। दुनिया एक बार फिर तेल संकट और महायुद्ध के मुहाने पर खड़ी नजर आ रही है।

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