Lashkar-e-Taiba कमांडर Gazi Mumtaz की मौत, हाफिज सईद के नेटवर्क को बड़ा झटका

लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर गाजी मुमताज़ की मौत की खबर के बाद आतंकी नेटवर्क से जुड़ी गतिविधियों पर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इस घटनाक्रम को हाफिज सईद के नेटवर्क के लिए बड़ा झटका बताया जा रहा है। आखिर इस मामले में क्या हुआ और इसके क्या मायने हैं, जानिए पूरी रिपोर्ट।

Lashkar-e-Taiba

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 27, 2026

Lashkar-e-Taiba : लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के लिए एक बड़ा झटका सामने आया है, जहाँ आतंकी संगठन के शीर्ष कमांडर गाजी मुमताज की पाकिस्तान में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। लंबे समय तक जम्मू-कश्मीर में सक्रिय रहा यह आतंकी सुरक्षाबलों के कड़े दबाव और अपनी जान बचाने के डर से पाकिस्तान भाग गया था। तब से वह अपने आका और वैश्विक आतंकवादी हाफिज सईद तथा पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के संरक्षण में छिपकर रह रहा था। हालांकि, उसकी मौत के कारणों पर अभी भी रहस्य बरकरार है, लेकिन इसे कश्मीर घाटी में लश्कर के आतंकी नेटवर्क के लिए एक बड़ा आघात माना जा रहा है।

हाफिज सईद का दाहिना हाथ और ‘गाजी’ की उपाधि

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गाजी मुमताज मूल रूप से पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के अपर दीर क्षेत्र के बाराहवाल का निवासी था। उसे लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद का बेहद करीबी माना जाता था। भारत में लश्कर के इशारे पर जघन्य आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के कारण ही संगठन ने उसे “गाजी” की उपाधि से नवाजा था, जिसके बाद से ही वह दुनिया भर में गाजी मुमताज के नाम से जाना जाने लगा। उसका खात्मा हाफिज सईद के उन करीबी सहयोगियों की सूची में एक और नाम जोड़ता है, जो पिछले कुछ समय में रहस्यमयी ढंग से गायब या मृत पाए गए हैं।

खूंखार ट्रेनर: आतंकियों को देता था घातक ट्रेनिंग

गाजी मुमताज केवल एक कमांडर नहीं था, बल्कि वह लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी ट्रेनिंग कैंपों में एक मुख्य प्रशिक्षक (ट्रेनर) के रूप में भी सक्रिय था। उसने लश्कर के लिए कई नए आतंकियों को तैयार किया और उन्हें भारत के खिलाफ हिंसा के लिए प्रेरित किया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, उसकी मौत के बाद शनिवार शाम 6:30 बजे ब्रावल के नुसरत दारा में उसका जनाजा (नमाज-ए-जनाजा) आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में कई बड़े आतंकियों के अलावा पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों के भी शामिल होने की सूचना मिली है, जो यह स्पष्ट करता है कि उसे पाकिस्तान का कितना गहरा संरक्षण प्राप्त था।

लश्कर के शीर्ष कमांडरों का रहस्यमयी अंत

गाजी मुमताज की मौत अकेली घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में लश्कर-ए-तैयबा के कई शीर्ष आतंकी कमांडर या तो आपसी गैंगवार में मारे गए हैं या फिर अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा ठिकाने लगा दिए गए हैं। इनमें बिलाल आरिफ सलाफी, शेख यूसुफ अफरीदी और अबू सैफुल्ला खालिद जैसे कुख्यात नाम शामिल हैं। इन घटनाओं की खास बात यह है कि इनमें से किसी भी मामले में आज तक कोई हमलावर पकड़ा नहीं गया है और न ही किसी को गिरफ्तार किया गया है।

आतंकी नेटवर्क में बढ़ती बेचैनी और असुरक्षा

आतंकी संगठनों के भीतर बढ़ती संदिग्ध मौतों ने हाफिज सईद और उसके आकाओं की नींद उड़ा दी है। गाजी मुमताज जैसे प्रशिक्षित और भरोसेमंद कमांडर का इस तरह रहस्यमयी मौत मरना यह दर्शाता है कि आतंकी संगठनों के भीतर या तो आपसी फूट चरम पर है या फिर उन्हें निशाना बनाने वाला कोई अदृश्य तंत्र सक्रिय है। मुमताज का मारा जाना न केवल लश्कर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि पाकिस्तान में छिपकर बैठे इन आतंकियों का समय अब पूरा हो रहा है।

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