Land For Job Scam: लालू परिवार पर कोर्ट का कड़ा प्रहार, नौकरी के बदले जमीन मामले में अब शुरू होगा मुकदमा

नौकरी के बदले जमीन (Land for Job) घोटाले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार (9 जनवरी 2026) को आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट ने लालू परिवार को 'आपराधिक सिंडिकेट' बताते हुए मामले में नियमित ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया है।

Land For Job Scam

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जनवरी 9, 2026

Land For Job Scam: बिहार की राजनीति में भूचाल ला देने वाले ‘जमीन के बदले नौकरी’ मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट ने अपनी सख्त टिप्पणी में इस पूरे प्रकरण को एक सुव्यवस्थित आपराधिक ढांचे का हिस्सा बताया है।

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दिल्ली कोर्ट का सख्त रुख

बताते चले कि, सुनवाई के दौरान दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि लालू प्रसाद यादव और उनके परिजनों ने एक आपराधिक सिंडिकेट की तरह काम किया है। विशेष जज ने रेखांकित किया कि मामले के दस्तावेजों से आरोपियों के बीच एक व्यापक आपराधिक साजिश के स्पष्ट संकेत मिलते हैं। कोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया यह साबित होता है कि रेलवे में नियुक्तियों के बदले जमीन हड़पने की साजिश रची गई थी। इस फैसले के साथ ही अब लालू परिवार के खिलाफ कोर्ट में नियमित ट्रायल यानी मुकदमे की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

सीबीआई की चार्जशीट का खुलासा

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दाखिल की गई आरोप पत्र में इस घोटाले की कार्यप्रणाली का विस्तृत विवरण दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2004 से 2009 के बीच जब लालू यादव रेल मंत्री थे, तब रेलवे के ग्रुप-D पदों पर नियुक्तियों के लिए पैसे के बजाय जमीन का सौदा (Land for Job Deal) किया गया। सीबीआई का आरोप है कि भर्ती के बदले अभ्यर्थियों से उनकी कीमती जमीनें लालू प्रसाद यादव के परिवार के सदस्यों या उनके बेहद करीबी सहयोगियों के नाम पर अवैध रूप से ट्रांसफर करवा ली गईं। इस प्रक्रिया में रेलवे की चयन नियमावली और पारदर्शिता को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया था।

2020 से छापेमारी और 78 आरोपियों के खिलाफ CBI की अंतिम रिपोर्ट

इस बहुचर्चित जमीन के बदले नौकरी घोटाले (Land for Job Scam Case) की जांच ने 2020 के बाद गति पकड़ी, जब सीबीआई और ईडी ने बिहार से लेकर दिल्ली तक दर्जनों ठिकानों पर छापेमारी की। जांच एजेंसी ने 18 मई 2022 को औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की और उसी वर्ष 7 अक्टूबर को पहली चार्जशीट दाखिल की थी। जून 2024 तक सीबीआई ने अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट (Final Investigation Report) कोर्ट में पेश कर दी। इस पूरे मामले में कुल 78 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें 38 ऐसे लोग शामिल हैं जिन्होंने कथित तौर पर अपनी जमीनें देकर रेलवे में सरकारी नौकरी हासिल की थी।

राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव की मुश्किलें

कोर्ट द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को भी मुकदमे का सामना करना होगा। सीबीआई ने अपनी जांच में पाया है कि जमीन के स्थानांतरण में इन दोनों की भी सक्रिय भूमिका रही है। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों की संलिप्तता के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। अब ट्रायल के दौरान गवाहों के बयान और दस्तावेजों का सत्यापन होगा, जो लालू परिवार के राजनीतिक भविष्य के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

बिहार की राजनीति पर संभावित प्रभाव

दिल्ली कोर्ट के इस फैसले के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई के मामलों में कानूनी कार्रवाई और तेज होगी। जहाँ एक ओर राजद इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, वहीं कोर्ट की टिप्पणियों ने लालू परिवार की कानूनी घेराबंदी मजबूत कर दी है। आने वाले दिनों में यह ट्रायल तय करेगा कि भारतीय रेलवे में हुए इस कथित भ्रष्टाचार के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है।

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