Land for Job Case : दिल्ली हाईकोर्ट से झटका, अब सुप्रीम कोर्ट में लालू यादव की किस्मत का फैसला

लैंड फॉर जॉब्स घोटाले में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सीबीआई की एफआईआर रद्द करने से इनकार के बाद लालू प्रसाद यादव ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। क्या शीर्ष अदालत निचली अदालत में चल रहे ट्रायल पर रोक लगाएगी या लालू यादव की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं? जानिए पूरी कानूनी रिपोर्ट।

Land for Job Case

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 11, 2026

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Land for Job Case : बिहार की राजनीति के दिग्गज और आरजेडी (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ‘लैंड फॉर जॉब’ यानी जमीन के बदले नौकरी देने से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में उन्होंने अब देश की सर्वोच्च अदालत, सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। लालू यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस हालिया फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था। यह याचिका ऐसे समय में दायर की गई है जब विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर राजनीतिक घमासान तेज है। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं कि क्या वहां से पूर्व मुख्यमंत्री को कोई राहत मिलती है या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की तारीख तय: जस्टिस सुंदरेश की पीठ करेगी फैसला

लालू प्रसाद यादव द्वारा दायर की गई इस विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सक्रियता दिखाई है। जानकारी के अनुसार, जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ इस संवेदनशील मामले पर आगामी 13 अप्रैल को सुनवाई करेगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुनवाई लालू यादव के राजनीतिक और व्यक्तिगत भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। याचिका में मुख्य रूप से दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के उन बिंदुओं को रेखांकित किया गया है, जिन्हें लालू यादव के कानूनी दल ने प्रक्रियात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण बताया है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया था करारा झटका: खारिज हुई थी एफआईआर रद्द करने की मांग

इस कानूनी विवाद की पृष्ठभूमि दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले में छिपी है, जिसने लालू यादव की उम्मीदों पर पानी फेर दिया था। हाईकोर्ट के जस्टिस रविंदर डुडेजा ने लालू प्रसाद यादव की उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) और सीबीआई (CBI) द्वारा दाखिल चार्जशीट को रद्द करने की गुहार लगाई थी। लालू यादव की दलील थी कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है और इसमें पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी दलीलों को अपर्याप्त माना और जांच एजेंसी की कार्यवाही को विधि सम्मत करार दिया था।

निचली अदालत का संज्ञान बरकरार: तीन चार्जशीट ने बढ़ाई लालू की परेशानी

दिल्ली हाईकोर्ट ने न केवल लालू यादव की मांग को खारिज किया, बल्कि इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा अब तक दाखिल की गई तीन चार्जशीट को भी वैध माना। कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा इन चार्जशीट पर लिए गए संज्ञान (Cognizance) को बरकरार रखा। इसका सीधा मतलब यह है कि ट्रायल कोर्ट में लालू यादव के खिलाफ मुकदमा चलता रहेगा। जांच एजेंसियों का आरोप है कि लालू यादव ने रेल मंत्री रहते हुए रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले कई लोगों से बेहद सस्ते दामों पर या उपहार के रूप में जमीनें अपने और अपने परिवार के नाम लिखवाई थीं।

राजनीतिक गलियारों में हलचल: क्या होगा आगामी सुनवाई का असर?

पटना से लेकर दिल्ली तक, लालू यादव के सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। आरजेडी समर्थकों का मानना है कि लालू यादव को न्याय मिलेगा, वहीं विरोधियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में कानून अपना काम कर रहा है। 13 अप्रैल को होने वाली सुनवाई न केवल कानूनी बारीकियों पर आधारित होगी, बल्कि यह बिहार की आगामी राजनीतिक दिशा को भी प्रभावित कर सकती है। यदि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाता है, तो यह लालू परिवार के लिए एक बड़ी संजीवनी होगी, अन्यथा उनकी कानूनी जंग और लंबी और कठिन हो सकती है।

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