Bihar Politics: चारा घोटाला केस में सुप्रीम कोर्ट से लालू यादव को संजीवनी, बोले- ‘हां, मैं खुश हूं’

चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। पटना में मीडिया से बातचीत में उन्होंने खुशी जाहिर की। शीर्ष अदालत ने लालू की जमानत रद्द करने की सीबीआई की याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट को 6 महीने में अपील का निपटारा करने का निर्देश दिया है।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 15, 2026

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Bihar Politics: चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिलने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने अपनी प्रसन्नता व्यक्त की है। बुधवार को जब वे पटना स्थित अपने कौटिल्य नगर आवास से बाहर निकले, तो उनके समर्थकों में उत्साह का माहौल था। बड़ी संख्या में मौजूद कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। मीडिया के सवालों का संक्षिप्त जवाब देते हुए लालू प्रसाद यादव ने मुस्कुराते हुए कहा, “हां, मैं खुश हूं।” यह पल आरजेडी कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

कानूनी प्रक्रिया में निरंतरता

दरअसल, यह पूरा मामला झारखंड के देवघर कोषागार से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के उस फैसले में दखल देने से स्पष्ट इनकार कर दिया है, जिसके तहत लालू प्रसाद यादव को मिली सजा पर रोक लगी थी और उन्हें जमानत का लाभ मिला था। शीर्ष अदालत के इस रुख का अर्थ है कि लालू यादव की जमानत फिलहाल सुरक्षित है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वह लालू यादव की लंबित आपराधिक अपील का निपटारा छह महीने के भीतर सुनिश्चित करे।

अपील के त्वरित निस्तारण का निर्देश

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि हाईकोर्ट का जमानत आदेश लंबे समय से प्रभावी है। पीठ ने स्पष्ट किया कि कानूनी प्रक्रिया के इस चरण में उस आदेश में बदलाव करने का कोई ठोस औचित्य नहीं बनता है। अदालत ने चिंता जताते हुए कहा कि वर्ष 2018 से लंबित इस अपील पर अब शीघ्रता से अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए ताकि मामले का स्थायी समाधान निकल सके। यह निर्देश मामले के जल्द निपटारे के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी कदम माना जा रहा है।

सीबीआई की दलीलें

इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने झारखंड हाईकोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती दी थी। सीबीआई की ओर से तर्क दिया गया कि लालू प्रसाद यादव को सजा निलंबन का लाभ गलत आधार पर प्राप्त हुआ है। एजेंसी का मुख्य दावा यह था कि विभिन्न मामलों में सुनाई गई सजाओं की गणना ‘क्रमवार’ (consecutive) होनी चाहिए, न कि साथ-साथ (concurrent)। सीबीआई के अनुसार, आधी सजा पूरी होने का जो आधार जमानत के लिए दिया गया, वह इस मामले में तकनीकी रूप से त्रुटिपूर्ण था।

बचाव पक्ष का तर्क

लालू प्रसाद यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने तर्क दिया कि सजाएं साथ-साथ चलेंगी या अलग-अलग, यह एक कानूनी प्रश्न है जिसका फैसला अंतिम अपील की सुनवाई के दौरान ही होना चाहिए। सिब्बल ने अदालत को यह भी समझाया कि झारखंड हाईकोर्ट ने अपने न्यायिक विवेक का प्रयोग करते हुए वही राहत प्रदान की है, जो समान परिस्थितियों वाले अन्य मुकदमों में भी दी जाती रही है। सुप्रीम कोर्ट ने बचाव पक्ष के तर्कों और वर्तमान स्थिति को देखते हुए मामले में हस्तक्षेप नहीं किया।

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