Lalita Gautam Case: मायावती का बड़ा बयान, BSP कार्यकर्ताओं से शांत रहने की अपील

मेरठ के ललिता गौतम हत्याकांड और उसके बाद हुए विरोध प्रदर्शनों पर BSP प्रमुख मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से शांति बनाए रखने तथा कानून हाथ में न लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि न्याय की लड़ाई संवैधानिक और कानूनी दायरे में रहकर लड़ी जानी चाहिए तथा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठानी चाहिए।

Lalita Gautam Case

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 10, 2026

Lalita Gautam Case: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने मेरठ की ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर एक महत्वपूर्ण और सख्त बयान जारी किया है। मायावती ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में कानून को अपने हाथ में लेना उचित नहीं है और न्याय प्राप्त करने के लिए संवैधानिक रास्ते ही सबसे कारगर हैं। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने सदैव कानूनी अधिकारों की लड़ाई लड़ने का मार्ग दिखाया था, न कि हिंसा का। उन्होंने बसपा कार्यकर्ताओं और दलित समाज से अपील की कि वे मेरठ जैसी घटनाओं के बाद सड़कों पर उतरकर अराजकता फैलाने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखें।

राजनीतिक लाभ के लिए गुमराह करने का लगाया आरोप

बसपा सुप्रीमो ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि कुछ राजनीतिक पार्टियां और संगठन अपने निहित स्वार्थों की सिद्धि के लिए पिछड़े और दलित वर्गों के लोगों को गुमराह कर सड़कों पर उतारते हैं। इससे न केवल हिंसा और जाम जैसी स्थितियां पैदा होती हैं, बल्कि आम जनजीवन भी प्रभावित होता है। मायावती ने आरोप लगाया कि ये नेता घटना स्थलों पर पहुंचकर केवल दिखावे के आंसू बहाते हैं और पीड़ित परिवारों के दर्द का इस्तेमाल अपनी राजनीति चमकाने के लिए करते हैं। उन्होंने साफ किया कि इस तरह के प्रदर्शनों से पीड़ितों को न्याय मिलने के बजाय उनकी परेशानियां और बढ़ जाती हैं। उन्होंने सभी वर्गों के लोगों को ऐसी मौकापरस्त पार्टियों से सतर्क रहने की सलाह दी।

‘मास्टर-की’ का मंत्र: सत्ता के माध्यम से ही संभव है न्याय

मायावती ने समस्याओं के समाधान के लिए बाबा साहेब के दिखाए मार्ग को ही एकमात्र रास्ता बताया। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि दलितों और पिछड़ों के उत्थान का असली उपाय ‘एकता’ और ‘वोट की ताकत’ है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि सत्ता की ‘मास्टर-की’ (चाबी) हासिल करना ही बीएसपी का मूल लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि जब समाज के हाथ में सत्ता होगी, तभी वह शोषण और अन्याय के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ सकेगा। मायावती ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे किसी भी बहकावे में आकर अपने रास्ते से न भटकें और शांतिपूर्ण तरीके से अपने राजनीतिक मिशन को आगे बढ़ाएं।

क्या है मेरठ हत्याकांड और विवाद की जड़?

मेरठ की इस घटना ने तब तूल पकड़ा जब 15 मई को बीस वर्षीय ललिता गौतम संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। 17 मई को रोहटा इलाके से उसका शव बरामद किया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 18 मई को मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, जिसने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया है और अब वह जेल में है। हालांकि, मृतक ललिता के परिजनों का आरोप है कि इस हत्याकांड में और भी लोग शामिल हैं। इसी मांग को लेकर बुधवार को बड़ी संख्या में लोग कमिश्नर चौराहे पर प्रदर्शन करने पहुंचे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। आरोप है कि एसएसपी द्वारा प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया, जिसके बाद आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद समेत कई राजनीतिक हस्तियों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे तूल दे दिया है।

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