Lahore Highway Gangrape : लाहौर हाईवे गैंगरेप मामला, हाई कोर्ट ने दो मुख्य दोषियों की मौत की सजा रखी बरकरार

पाकिस्तान को दहला देने वाले बहुचर्चित लाहौर-स्यालकोट हाईवे गैंगरेप मामले में लाहौर हाई कोर्ट ने दोनों मुख्य दोषियों, आबिद मल्ही और शफकत अली की अपीलों को पूरी तरह खारिज करते हुए आतंकवाद विरोधी अदालत द्वारा सुनाई गई उनकी मौत की सजा को बरकरार रखकर न्याय की दिशा में सबसे बड़ा फैसला सुनाया है।

Lahore Highway Gangrape

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 4, 2026

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Lahore Highway Gangrape : पाकिस्तान की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाते हुए फ्रांस की महिला के साथ हुए बर्बर सामूहिक बलात्कार (गैंगरेप) के दो मुख्य दोषियों की मौत की सजा को पूरी तरह से बरकरार रखा है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान देश की शीर्ष अदालत ने लाहौर हाई कोर्ट के पुराने फैसले को सही ठहराते हुए दोषियों की अंतिम दया याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद आबिद अली और शफ़क़त अली नाम के दोनों अपराधियों की फांसी का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। अदालत के इस कड़े रुख से साफ है कि ऐसे जघन्य और अमानवीय अपराधों के लिए कानून में किसी भी तरह की नरमी या सहानुभूति की कोई गुंजाइश नहीं है।

हाईवे पर आधी रात को घटी दिल दहला देने वाली वह खौफनाक वारदात

यह रूह कंपा देने वाली क्रूर घटना सितंबर 2020 की है, जिसने पूरे पाकिस्तान सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया था। फ्रांस की रहने वाली पीड़ित महिला अपने दो मासूम बच्चों के साथ घूमने के इरादे से पाकिस्तान आई थी। 11 सितंबर की रात को वह अपनी कार से बच्चों को लेकर लाहौर के रास्ते गुजरांवाला प्रांत की तरफ जा रही थी। इसी दौरान लाहौर मुख्य हाईवे पर अचानक उसकी गाड़ी का ईंधन (फ्यूल) खत्म हो गया और कार सुनसान सड़क पर खड़ी हो गई। रात के सन्नाटे में खुद को असुरक्षित पाकर महिला ने तुरंत अपने पति को फोन कर घटना और खतरे की जानकारी दी। पति के कहने पर उसने तत्काल स्थानीय पुलिस को भी फोन मिलाया और मदद की गुहार लगाई।

मासूम बच्चों के सामने हैवानियत और पुलिस पेट्रोलिंग की बड़ी लापरवाही

पीड़ित महिला पुलिस की मदद का इंतजार ही कर रही थी, लेकिन रक्षक के पहुंचने से पहले वहां भक्षक पहुंच गए। दो स्थानीय युवक मोटरसाइकिल से वहां आए और उन्होंने कार को अकेला देखकर हमला कर दिया। बदमाशों ने गाड़ी की खिड़की का शीशा तोड़ दिया और महिला को जबरन खींचकर बाहर निकाल लिया। इसके बाद उन दरिंदों ने महिला के तड़पते और रोते हुए मासूम बच्चों के सामने ही उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। यह बेहद दर्दनाक और बर्बर घटना काफी देर तक सड़क किनारे चलती रही, लेकिन इस दौरान सुरक्षा का दम भरने वाली पुलिस की कोई भी पेट्रोलिंग वैन वहां से नहीं गुजरी। अपनी हवस मिटाने के बाद जाते-जाते दोनों लुटेरे महिला के तीन एटीएम कार्ड, नकदी और कीमती गहने भी लूटकर फरार हो गए।

मजिस्ट्रेट के सामने कबूला जुर्म और एंटी-टेररिज़्म कोर्ट ने सुनाई फांसी

इस खौफनाक वारदात के बाद पूरे देश में उपजे भारी जनाक्रोश को देखते हुए पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया। कड़े अभियान के बाद पुलिस ने दोनों मुख्य आरोपियों आबिद अली और शफ़क़त अली को धर दबोचा। पुलिसिया कड़ाई और पुख्ता सबूतों के आगे दोनों ने घुटने टेक दिए और मजिस्ट्रेट के सामने अपना संगीन जुर्म पूरी तरह कबूल कर लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए केस को आतंकवाद विरोधी अदालत (Anti-Terrorism Court) में चलाया गया। मार्च 2021 में अदालत ने सभी वैज्ञानिक साक्ष्यों, डीएनए रिपोर्ट और गवाहों के आधार पर दोनों दोषियों को मौत की सजा का हुक्म सुनाया।

हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक खारिज हुईं दोषियों की सभी अपीलें

फांसी की सजा के इस अदालती आदेश को चुनौती देते हुए दोनों दोषियों ने लाहौर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और सजा कम करने की गुहार लगाई थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने अपराध की क्रूरता को देखते हुए उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद मामला देश की सबसे बड़ी अदालत में पहुंचा। पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने भी बुधवार को मामले की अंतिम समीक्षा करते हुए साफ कर दिया कि बच्चों के सामने एक बेबस महिला के साथ की गई इस हैवानियत के लिए केवल और केवल मौत की सजा ही न्यायसंगत है, जिसके बाद उनकी अंतिम अपील भी खारिज हो गई।

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