UP Election 2027: 2027 में लहरपुर का किला कौन जीतेगा? BJP की वापसी या SP-कांग्रेस का दबदबा

लहरपुर विधानसभा 2027 का चुनाव बेहद दिलचस्प होने के आसार हैं। 2017 में BJP, 2022 में समाजवादी पार्टी और 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां अलग-अलग बढ़त बनाई। करीब 3.62 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर ग्रामीण वोटर, सामाजिक समीकरण और विपक्षी वोटों का बंटवारा 2027 के नतीजे को प्रभावित कर सकता है।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

सितम्बर 6, 2026

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कस ली है. सभी राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीति पर काम करना शुरु कर दिया है. राजनीति में एक पुरानी कहावत है दिल्ली की कुर्सी यूपी से होकर जाता है. इसलिए कहा जाता है कि, केंद्र में सत्ता हासिल करने के लिए यूपी में जीत हासिल करना काफी महत्तवपूर्ण है.

2027 के विधानसभा चुनाव में होगा दिलचस्प मुकाबला

बात करते है आज, यूपी के सीतापुर जिले की लहरपुर विधानसभा सीट की. यह सीट उन सीटों नें शामिल है, जहां पिछले कुछ चुनावों में लगातार राजनीतिक बदलाव देखने को मिल रहे है. कभी भाजपा, कभी सपा और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में गया जनादेश इस सीट को खास बनाता है.ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव में लहरपुर का मुकाबला बेहद दिलचस्प होने की उम्मीद है.

बताते चले कि, लहरपुर विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से एक है. यह सीतापुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और 2008 के परिसीमन के बाद इसे विधानसभा क्षेत्र संख्या 148 के रूप में पहचान मिली. यह एक सामान्य यानी अनारक्षित विधानसभा सीट है. सीट का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्र में आता है, इसलिए यहां ग्रामीण मतदाताओं की भूमिका चुनावी नतीजों में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है.

1957 से जारी है लहरपुर का चुनावी सफर

आपको बताते चले कि, लहरपुर विधानसभा क्षेत्र का गठन 1956 के परिसीमन आदेश के तहत हुआ था और 1957 में यहां पहली बार विधानसभा चुनाव कराया गया. इसके बाद से यह सीट कई राजनीतिक बदलावों की गवाह रही है. लहरपुर को किसी एक राजनीतिक दल की सुरक्षित सीट नहीं माना जा सकता, क्योंकि यहां मतदाताओं ने अलग-अलग चुनावों में अलग-अलग दलों को समर्थन दिया है.

BJP खेमे ने इस सीट पर 5 बार जीत दर्ज की

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लहरपुर में 2027 का सियासी पेंडुलम किस ओर?

अब तक के चुनावी इतिहास में बीजेपी और उसकी पूर्ववर्ती भारतीय जनसंघ को मिलाकर बीजेपी खेमे ने इस सीट पर पांच बार जीत दर्ज की है. बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी को तीन-तीन बार सफलता मिली है. कांग्रेस ने दो बार लहरपुर में जीत हासिल की है. इसके अलावा जनता पार्टी, जनता पार्टी सेक्युलर और लोक दल भी यहां से चुनाव जीत चुके हैं. एक बार निर्दलीय उम्मीदवार ने भी जीत दर्ज की थी. यही चुनावी इतिहास लहरपुर को एक ऐसी सीट बनाता है, जहां हर चुनाव में राजनीतिक समीकरणों पर नजर रहती है.

2012 में कांग्रेस को हराकर जसमीर अंसारी ने दर्ज की थी जीत

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कांग्रेस ने हासिल की जीत

साल 2012 के विधानसभा चुनाव में लहरपुर से मोहम्मद जसमीर अंसारी ने जीत हासिल की थी. उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार अनिल कुमार वर्मा को 17,672 वोटों के अंतर से हराया था. उस चुनाव में समाजवादी पार्टी तीसरे स्थान पर रही थी, जबकि बीजेपी का प्रदर्शन कमजोर रहा था। बीजेपी को महज 6.24 प्रतिशत वोट मिले थे और उसकी जमानत तक जब्त हो गई थी.लेकिन इसके बाद लहरपुर का सियासी समीकरण तेजी से बदला.

2017 में BJP ने पलटा चुनावी समीकरण

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2017 में BJP ने पलटा चुनावी समीकरण

साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने लहरपुर में जोरदार वापसी की. पार्टी के उम्मीदवार सुनील वर्मा ने तत्कालीन विधायक मोहम्मद जसमीर अंसारी को 9,118 वोटों से हराकर सीट अपने कब्जे में कर ली. 2012 में कमजोर प्रदर्शन करने वाली बीजेपी के लिए यह नतीजा महत्वपूर्ण था. इस चुनाव ने यह भी दिखाया कि लहरपुर में मतदाताओं का रुख कुछ ही वर्षों में पूरी तरह बदल सकता है.

2022 में सपा ने BJP से छीन ली सीट

साल 2022 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर लहरपुर का सियासी पेंडुलम दूसरी तरफ चला गया. समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अनिल कुमार वर्मा ने बीजेपी के मौजूदा विधायक सुनील वर्मा को शिकस्त दी. अनिल कुमार वर्मा को 1,12,987 वोट मिले, जबकि बीजेपी के सुनील वर्मा को 99,832 वोट हासिल हुए. इस तरह समाजवादी पार्टी ने 13,155 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की.

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2022 में सपा ने BJP से छीन ली सीट

दिलचस्प बात यह रही कि अनिल कुमार वर्मा इससे पहले कांग्रेस से जुड़े रहे थे और बाद में समाजवादी पार्टी में शामिल हुए. उनकी जीत ने लहरपुर में एक बार फिर बदलते राजनीतिक समीकरण की तस्वीर सामने रख दी.

2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने बनाई बड़ी बढ़त

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2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने बनाई बड़ी बढ़त

साल 2024 के लोकसभा चुनाव ने लहरपुर के चुनावी समीकरण को एक नया मोड़ दिया. लोकसभा चुनाव के दौरान लहरपुर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवार राकेश राठौर ने बीजेपी उम्मीदवार राजेश वर्मा के मुकाबले बड़ी बढ़त हासिल की. कांग्रेस को यहां 1,11,261 वोट मिले, जबकि बीजेपी को 86,813 वोट मिले। इस तरह कांग्रेस ने बीजेपी पर 24,448 वोटों की बढ़त दर्ज की.

यह आंकड़ा 2027 के विधानसभा चुनाव के लिहाज से इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि 2022 में विधानसभा सीट समाजवादी पार्टी के खाते में गई थी, जबकि दो साल बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने इसी विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी के खिलाफ मजबूत प्रदर्शन किया. ऐसे में 2027 में विपक्षी वोटों का समीकरण और उनका संभावित बंटवारा चुनावी नतीजे पर बड़ा असर डाल सकता है.

लहरपुर का सामाजिक समीकरण भी बेहद अहम

आपको बातते दे कि, लहरपुर विधानसभा सीट की चुनावी तस्वीर को समझने के लिए इसके सामाजिक समीकरण पर नजर डालना जरूरी है. अनुमान के मुताबिक इस क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 32.30 प्रतिशत है. वहीं अनुसूचित जाति के मतदाताओं की संख्या करीब 28.98 प्रतिशत बताई जाती है. इसके अलावा यादव, कुर्मी, लोध, पासी, ब्राह्मण, ठाकुर और अन्य ओबीसी एवं सवर्ण समुदाय भी यहां चुनावी समीकरण का हिस्सा हैं.

मुस्लिम और अनुसूचित जाति मतदाताओं की बड़ी हिस्सेदारी के साथ विभिन्न ओबीसी समूहों की मौजूदगी लहरपुर के चुनाव को बहुकोणीय बनाती है. ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए केवल अपने पारंपरिक वोट बैंक पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा.

ग्रामीण मतदाता तय कर सकते हैं 2027 का चुनाव

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ग्रामीण मतदाता तय कर सकते हैं 2027 का चुनाव

लहरपुर विधानसभा क्षेत्र की करीब 82.57 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, जबकि लगभग 17.43 प्रतिशत आबादी शहरी इलाकों में है। यही वजह है कि 2027 के चुनाव में ग्रामीण इलाकों से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

कृषि, किसानों की आय, रोजगार, सड़क, बिजली, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और सरकारी योजनाओं का स्थानीय स्तर पर असर जैसे मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं.

इसके अलावा लहरपुर के मतदाताओं के बीच स्थानीय स्तर पर उम्मीदवार की पकड़ भी महत्वपूर्ण हो सकती है. पिछले चुनावों के नतीजे बताते हैं कि यहां पार्टी के साथ-साथ उम्मीदवार का प्रभाव भी चुनावी मुकाबले को प्रभावित कर सकता है.

लगातार बढ़ रहा है मतदाताओं का आंकड़ा

लहरपुर में पिछले एक दशक से अधिक समय में मतदाताओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है.

2012 में यहां करीब 2,94,892 पंजीकृत मतदाता थे। 2017 में यह संख्या बढ़कर 3,39,731 हो गई.

2019 में मतदाताओं की संख्या करीब 3,49,972, 2022 में 3,54,565 और 2024 में करीब 3,62,080 पहुंच गई।

मतदान प्रतिशत भी सामान्य तौर पर ऊंचा रहा है. साल 2012 में मतदान प्रतिशत 65.73 रहा था, जो 2017 में बढ़कर 67.57 प्रतिशत हो गया. साल 2019 के लोकसभा चुनाव में मतदान 62.65 प्रतिशत रहा, जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में यह बढ़कर 67.75 प्रतिशत पहुंच गया. 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत 62.73 रहा.

2027 में बीजेपी के सामने क्या चुनौती ?

2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती लहरपुर में अपनी खोई हुई जमीन वापस हासिल करने की होगी. पार्टी ने 2017 में इस सीट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन 2022 में उसे समाजवादी पार्टी के हाथों हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भी विधानसभा क्षेत्र के स्तर पर कांग्रेस ने बीजेपी के मुकाबले बड़ी बढ़त बनाई.ऐसे में बीजेपी को अपने पारंपरिक मतदाताओं को एकजुट रखने के साथ-साथ उन वोटरों को भी अपने पक्ष में लाना होगा, जिन्होंने पिछले चुनावों में विपक्षी दलों का समर्थन किया.

सपा के सामने 2022 का प्रदर्शन दोहराने की चुनौती

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सपा के सामने 2022 का प्रदर्शन दोहराने की चुनौती

समाजवादी पार्टी के लिए लहरपुर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2022 में पार्टी ने यहां बीजेपी को हराकर जीत हासिल की थी. पार्टी की कोशिश होगी कि 2022 के विधानसभा चुनाव का प्रदर्शन दोहराया जाए. हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के मजबूत प्रदर्शन ने विपक्षी वोटों के समीकरण को लेकर नया सवाल खड़ा कर दिया है. अगर विपक्षी वोटों का बंटवारा होता है तो इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल सकता है. वहीं विपक्षी दलों के बीच बेहतर तालमेल की स्थिति में मुकाबला अलग दिशा में जा सकता है.

कांग्रेस के लिए 2024 का प्रदर्शन उम्मीद की वजह

कांग्रेस के लिए 2024 के लोकसभा चुनाव में लहरपुर से मिली बढ़त निश्चित तौर पर उत्साह बढ़ाने वाली है. पार्टी उम्मीदवार ने बीजेपी के मुकाबले 24 हजार से ज्यादा वोटों की बढ़त हासिल की थी.

अब कांग्रेस के सामने चुनौती इस प्रदर्शन को विधानसभा चुनाव में दोहराने की होगी. विधानसभा चुनाव में लोकसभा के मुकाबले स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवार की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में कांग्रेस को अपने लोकसभा प्रदर्शन को विधानसभा स्तर पर मजबूत संगठन और प्रभावी उम्मीदवार के जरिए वोट में बदलने की चुनौती होगी.

2027 में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार

लहरपुर की मौजूदा चुनावी तस्वीर को देखें तो 2027 में बीजेपी, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। हालांकि चुनाव से पहले गठबंधन, उम्मीदवारों की घोषणा और स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के कारण समीकरण बदल भी सकते हैं.

2022 में सपा की जीत और 2024 में कांग्रेस की बढ़त के बीच बीजेपी के लिए वापसी की चुनौती है. वहीं सपा को अपनी विधानसभा सीट बचानी है और कांग्रेस को लोकसभा में मिली बढ़त को विधानसभा चुनाव में बदलना है.

क्या फिर बदलेगा लहरपुर का सियासी पेंडुलम?

लहरपुर का चुनावी इतिहास बताता है कि यहां मतदाता किसी एक राजनीतिक दल के साथ लंबे समय तक बंधा हुआ नहीं रहा है. साल 2017 में बीजेपी की जीत के बाद 2022 में सपा ने बाजी पलट दी. इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी पर बड़ी बढ़त हासिल की.

क्या बीजेपी 2017 की तरह एक बार फिर वापसी करेगी?

क्या समाजवादी पार्टी 2022 की जीत को बरकरार रख पाएगी?

या कांग्रेस 2024 के लोकसभा प्रदर्शन के आधार पर विधानसभा चुनाव में नई ताकत बनकर उभरेगी?

इन सवालों का जवाब चुनाव के दौरान सामने आएगा, लेकिन इतना तय है कि लहरपुर विधानसभा सीट 2027 के चुनाव में सीतापुर जिले की सबसे दिलचस्प और कड़ी टक्कर वाली सीटों में शामिल हो सकती है.