Chhattisgarh Politics : छत्तीसगढ़ की राजनीति में झीरम घाटी मामले को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कांग्रेस के सवालों पर पलटवार करते हुए कहा कि इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA को सौंपी गई थी। बिलासपुर रवाना होने से पहले रायपुर हेलीपैड पर पत्रकारों से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने न्यायिक प्रक्रिया का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक चली जांच और सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया है।
यूपीए सरकार के दौरान NIA को मिली थी जांच
मुख्यमंत्री साय ने झीरम घाटी प्रकरण की जांच को लेकर कहा कि जब यह मामला NIA को सौंपा गया था, उस समय केंद्र में यूपीए की सरकार थी। उनके मुताबिक, जांच एजेंसी ने इस मामले में लगभग 13 वर्षों तक जांच और सुनवाई की प्रक्रिया में हिस्सा लिया। इस दौरान 100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए। मुख्यमंत्री ने इसी प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कांग्रेस द्वारा फैसले पर उठाए जा रहे सवालों का जवाब दिया।
13 साल बाद NIA कोर्ट ने सुनाया फैसला
सीएम साय ने बताया कि लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद NIA कोर्ट ने 5 सितंबर को झीरम घाटी मामले में अपना फैसला सुनाया। अदालत ने मामले में 10 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाने का निर्णय किया है। हालांकि, दोषियों को कितनी अवधि की सजा मिलेगी, इसका निर्धारण 16 सितंबर को होने वाली सुनवाई में किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 13 साल की सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अपना फैसला दिया है।
कांग्रेस के सवालों पर जांच प्रक्रिया का दिया हवाला
झीरम घाटी मामले में NIA कोर्ट के फैसले को लेकर कांग्रेस की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। इस पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मामले की जांच और सुनवाई लंबे समय तक चली है। जांच के दौरान बड़ी संख्या में गवाहों के बयान दर्ज किए गए और विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की गई। अब अदालत ने पूरी प्रक्रिया के बाद फैसला सुनाया है। उन्होंने कहा कि आगे दोषियों की सजा की अवधि भी न्यायालय ही तय करेगा।
कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान पर भी निशाना
मुख्यमंत्री साय ने झीरम घाटी मामले के अलावा कांग्रेस की आंतरिक राजनीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कांग्रेस की कार्यशैली पर निशाना साधते हुए पार्टी की स्थिति की तुलना अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ नीति से की। सीएम ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के भीतर मतभेद और आपसी खींचतान की स्थिति बनी हुई है। उनके इस बयान को आगामी राजनीतिक टकराव की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भूपेश बघेल के पंजाब प्रभार पर टिप्पणी
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को कांग्रेस द्वारा पंजाब प्रभारी की जिम्मेदारी से हटाए जाने पर भी विष्णु देव साय ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पंजाब में भूपेश बघेल को लेकर विरोध की स्थिति बनी थी और संभवतः इसी वजह से उनका प्रभार बदला गया। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी के बाद छत्तीसगढ़ में बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।
झीरम फैसले के बाद गरमाया राजनीतिक माहौल
झीरम घाटी मामले में अदालत के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस और बीजेपी इस प्रकरण को लेकर अलग-अलग सवाल और दावे सामने रख रही हैं। मुख्यमंत्री साय के ताजा बयान ने इस विवाद को और हवा दे दी है। अब सभी की नजर 16 सितंबर को होने वाली अदालत की कार्यवाही पर रहेगी, जिसमें दोषियों की सजा की अवधि तय होने की उम्मीद है।
आगे और तेज हो सकता है सियासी विवाद
करीब 13 वर्षों की न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए फैसले ने झीरम घाटी मामले को फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। मुख्यमंत्री साय ने जहां NIA जांच और अदालत की प्रक्रिया का उल्लेख किया, वहीं कांग्रेस की कार्यशैली और भूपेश बघेल को लेकर भी हमला बोला। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है।
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