UP Politics: उत्तर प्रदेश की सियासत में जब भी बाहुबल और वर्चस्व की बात होती है, तो प्रतापगढ़ की ‘कुंडा’ विधानसभा सीट का नाम सबसे ऊपर आता है। दशकों से इस सीट पर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का निर्विवाद शासन रहा है। लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इस ‘अजेय दुर्ग’ को भेदने के लिए एक ऐसी बिसात बिछाई है, जिसने जिले के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह गर्मा दिया है।
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कुंडा विधानसभा में सपा की नई रणनीति
बताते चले कि, प्रतापगढ़ के सियासी गलियारों में इन दिनों एक युवा नाम ज्योत्सना सिंह की चर्चा जोरों पर है। सूत्रों के अनुसार, अखिलेश यादव ने राजा भैया के खिलाफ एक शिक्षित और स्थानीय चेहरे को मैदान में उतारने का मन बना लिया है। ज्योत्सना सिंह ने एमिटी यूनिवर्सिटी लखनऊ से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की है, जिसके कारण उनकी संवाद शैली और मुद्दों की समझ काफी पैनी मानी जा रही है। साल 2016 से सपा के साथ सक्रिय रूप से जुड़ी ज्योत्सना, प्रतापगढ़ के पुराने राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता, राजकुमार सिंह, सदर सीट से पूर्व ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं और क्षेत्र में उनकी गहरी पकड़ है।
कुंडा में कुंडी लगाने के लिए अखिलेश यादव का नया चक्रव्यूह
आपको बता दे कि, पिछले चुनावों में अखिलेश यादव का नारा “कुंडा में कुंडी लगा देंगे” काफी सुर्खियों में रहा था, हालांकि तब चुनावी नतीजे राजा भैया के पक्ष में ही रहे थे। लेकिन इस बार सपा प्रमुख ने अपनी रणनीति को और अधिक धारदार बनाया है। हाल ही में लखनऊ में आयोजित एक हाई-लेवल बैठक में अखिलेश ने घंटों तक प्रतापगढ़ के जातिगत आंकड़ों का विश्लेषण किया। सपा इस बार ‘बाहुबल बनाम शिक्षा’ और ‘महिला सशक्तिकरण’ के कार्ड के जरिए राजा भैया को उनके अपने ही गढ़ में चुनौती देने की तैयारी में है।
कुर्मी वोट बैंक का समीकरण
राजा भैया के प्रभाव को कम करने के लिए अखिलेश यादव ने प्रतापगढ़ से सपा सांसद शिवपाल सिंह पटेल को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। वर्तमान में प्रतापगढ़ की दोनों लोकसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है, जिससे पार्टी का मनोबल काफी ऊंचा है। रणनीति यह है कि कुर्मी (पटेल) और पिछड़े वर्ग के वोटों को एकजुट किया जाए। यदि युवा मतदाताओं और पिछड़ों का साथ मिलता है, तो कुंडा की चुनावी बाजी पलटना नामुमकिन नहीं होगा।
ठाकुर बनाम अन्य और महिला फैक्टर
ज्योत्सना सिंह को उम्मीदवार बनाकर सपा केवल एक सीट नहीं जीतना चाहती, बल्कि पूरे जिले की सात विधानसभा सीटों पर राजा भैया के प्रभाव को सीमित करना चाहती है। एक महिला उम्मीदवार को उतारकर सपा ‘आधी आबादी’ का समर्थन जुटाने और ‘ठाकुर बनाम अन्य’ के ध्रुवीकरण को साधने की कोशिश में है। अखिलेश का मुख्य उद्देश्य राजा भैया को कुंडा में इस कदर उलझाना है कि वे जिले की अन्य सीटों पर अपनी पार्टी ‘जनसत्ता दल’ का प्रचार न कर सकें।










