Koel Mallick Resignation : कोयल मल्लिक का राज्यसभा से इस्तीफा, तृणमूल कांग्रेस के बचे सिर्फ 9 सांसद

क्या ममता बनर्जी का किला ढहने वाला है? टॉलीवुड सुपरस्टार और राज्यसभा सांसद कोयल मल्लिक के अचानक इस्तीफे ने पूरी तृणमूल कांग्रेस को हिलाकर रख दिया है। केवल 9 सांसदों पर सिमटी पार्टी के भीतर चल रही इस महा-बगावत के पीछे की असली और चौंकाने वाली वजह जानने के लिए पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

Koel Mallick Resignation

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 11, 2026

Koel Mallick Resignation :  पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गलियारों में इस बात की लगातार चर्चा चल रही थी कि टॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री कोयल मल्लिक राज्यसभा से इस्तीफा दे सकती हैं। आखिरकार, ये तमाम अटकलें और अंदाज़े सच साबित हुए जब उन्होंने गुरुवार को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। राजनीति में जो सोचा जा रहा था, ठीक वैसा ही घटनाक्रम देखने को मिला है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची इस उथल-पुथल में सुखेंदुशेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक जैसे बड़े नेताओं ने पहले ही एक-एक करके राज्यसभा के सभापति को अपना इस्तीफा भेज दिया था। अब इस कड़ी में कोयल मल्लिक का नाम भी जुड़ गया है, जिन्होंने संसद के ऊपरी सदन से दूरी बना ली है। इस लगातार लग रहे झटकों के बाद अब यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि तृणमूल कांग्रेस राज्यसभा के भीतर पूरी तरह से बिखरने की कगार पर पहुंच चुकी है।

राज्यसभा में तृणमूल की संख्या सिमटकर 9 पर पहुंची

अभिनेत्री कोयल मल्लिक के इस अचानक इस्तीफे के बाद राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की ताकत को भारी नुकसान पहुंचा है। सदन में पार्टी के सांसदों की संख्या 13 से घटकर अब महज 9 रह गई है। राजनीतिक सूत्रों और अंदरूनी खबरों की मानें तो संकट यहीं खत्म नहीं हो रहा है, बल्कि इसी हफ्ते कुछ और सांसद भी अपने पदों से इस्तीफा दे सकते हैं। वास्तव में, राज्य के विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक बड़ी और गहरी टूट की शुरुआत हो चुकी है। रीताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल संसदीय दल ने पहले ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व यानी ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से पूरी तरह दूरी बना ली है। बताया जा रहा है कि बागी रुख अपनाने वाले इस गुट में अब विधायकों की संख्या लगभग 64 तक पहुंच चुकी है।

लोकसभा और विधानसभा में भी बगावत

तृणमूल कांग्रेस के भीतर यह असंतोष सिर्फ विधानसभा या राज्यसभा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि लोकसभा में भी एक नई ‘तृणमूल’ का जन्म हो चुका है। संसद के निचले सदन में काकली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में पार्टी के लगभग 20 सांसदों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने के लिए बकायदा अपनी लिखित सहमति और चिट्ठी सौंप दी है। इस बड़े कदम से साफ है कि पार्टी के भीतर केंद्रीय नेतृत्व के खिलाफ असंतोष की लहर बहुत गहरी हो चुकी है और सांसद अब नए राजनीतिक विकल्पों की तलाश में जुट गए हैं।

इस्तीफे की अनूठी रणनीति

अगर राज्यसभा के समीकरणों को देखें, तो वहां भी टूट-फूट का यही पुराना पैटर्न दोहराया जा रहा है, हालांकि यहां बगावत का मॉडल थोड़ा अलग और रणनीतिक है। राज्यसभा में विधानसभा या लोकसभा की तरह एक ही समय पर सामूहिक रूप से दो-तिहाई बहुमत वाले सांसदों का गुट बनाना बेहद जटिल काम है। यही वजह है कि बागी सांसदों ने पार्टी छोड़ने का एक दूसरा और सुरक्षित रास्ता चुना है। वे सामूहिक बगावत के बजाय एक-एक करके व्यक्तिगत तौर पर अपना इस्तीफा सौंप रहे हैं।

इस सिलसिले में राज्यसभा से सबसे पहला इस्तीफा सुखेंदुशेखर रॉय ने दिया था। इसके बाद बुधवार को सुष्मिता देव ने भी अपना पद छोड़ दिया। अब इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए प्रकाश चिक बड़ाइक और कोयल मल्लिक ने भी गुरुवार (लक्ष्मीबार) को संसद सदस्यता का त्याग कर दिया। सूत्रों का दावा है कि इस हफ्ते एक और राज्यसभा सांसद और अगले हफ्ते दो या तीन और सांसद इस्तीफा दे सकते हैं। वर्तमान विधानसभा की राजनीतिक स्थिति को देखते हुए यह साफ है कि यदि इन खाली हुई राज्यसभा सीटों पर भविष्य में उपचुनाव होते हैं, तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) आसानी से इन सीटों पर जीत दर्ज कर लेगी।

फरवरी के टिकट से अप्रैल की शपथ तक

उल्लेखनीय है कि इसी साल फरवरी के महीने में तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची जारी की थी। उस सूची में राजीव कुमार, बाबुल सुप्रियो और मेनका गुरुस्वामी जैसे चर्चित चेहरों के साथ-साथ अभिनेत्री कोयल मल्लिक का नाम भी प्रमुखता से शामिल किया गया था। इसके बाद, अप्रैल महीने में कोयल मल्लिक राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ ग्रहण करने के लिए विशेष रूप से दिल्ली गई थीं, जहां उनका पूरा परिवार इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए उनके साथ मौजूद था।

“यह कोई ऐसा फैसला नहीं है जिसे मैंने बहुत जल्दबाजी या बिना सोचे-समझे लिया हो। यह एक बहुत बड़ी और गंभीर जिम्मेदारी है। देश की सेवा करना और आम लोगों की भलाई के लिए काम करना—इससे बड़ा और महान काम जीवन में कोई दूसरा नहीं हो सकता।” — कोयल मल्लिक (अप्रैल 2026, शपथ ग्रहण के दौरान)

हालांकि, इस भावुक और जिम्मेदारी भरे बयान के कुछ ही समय बाद, पार्टी को चुनावों में मिली बड़ी हार ने सारे समीकरण बदल दिए। नतीजतन, कोयल मल्लिक ने न केवल राज्यसभा सांसद के पद से इस्तीफा दिया, बल्कि इस कदम के साथ ही उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से अपनी राजनीतिक दूरियां भी पूरी तरह से बढ़ा ली हैं।

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