Kishtwar Terrorist Attack: जैश के आतंकियों के साथ भीषण जंग, सेना के 8 जवान घायल, ऑपरेशन जारी

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में 'ऑपरेशन त्राशी-1' के दौरान सुरक्षा बलों और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई। आतंकियों द्वारा किए गए ग्रेनेड हमले में सेना के 8 जवान घायल हो गए हैं, जिन्हें उपचार के लिए एयरलिफ्ट किया गया है। घने जंगलों में छिपे 2-3 विदेशी आतंकियों को पकड़ने के लिए ड्रोन और स्निफर डॉग्स की मदद से बड़ा सर्च ऑपरेशन जारी है।

Kishtwar Terrorist Attack

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जनवरी 19, 2026

Kishtwar Terrorist Attack: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में रविवार को सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच एक भीषण संघर्ष छिड़ गया। ऊंचे पहाड़ी और दुर्गम वन क्षेत्रों में छिपे आतंकवादियों ने घेराबंदी कर रहे जवानों पर हमला बोल दिया। इस घटना में भारतीय सेना के 8 जवान जख्मी हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित ठिकानों पर स्थानांतरित कर उपचार दिया जा रहा है।

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किश्तवाड़ एनकाउंटर और ‘ऑपरेशन त्राशी-1’ की पूरी जानकारी

बताते चले कि, जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चतरू के पास सोनार क्षेत्र में रविवार दोपहर को सुरक्षाबलों और आतंकवादियों का आमना-सामना हुआ। इस आतंकवाद रोधी अभियान (Anti-Terror Operation) को भारतीय सेना की ‘वॉइट नाइट कोर’ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संयुक्त रूप से संचालित किया, जिसे ‘ऑपरेशन त्राशी-1’ नाम दिया गया है। खुफिया सूचनाओं के आधार पर जब सुरक्षा बल आतंकियों की घेराबंदी कर रहे थे, तभी घने जंगलों में छिपे आतंकियों ने अचानक अंधाधुंध गोलीबारी और हथगोले फेंकना शुरू कर दिया, जिससे मुठभेड़ शुरू हो गई।

घायल सैनिकों का रेस्क्यू

आपको बता दे कि, इस भीषण गोलीबारी में सेना के 8 जवान घायल हो गए हैं। मुठभेड़ स्थल की कठिन भौगोलिक स्थिति और दुर्गम पहाड़ियों के बावजूद, सेना ने तुरंत हेलीकॉप्टर की मदद से घायल जवानों को एयरलिफ्ट किया और सेना के अस्पताल पहुंचाया। सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, अधिकांश जवानों को आतंकवादियों द्वारा किए गए ग्रेनेड हमले (Grenade Attack) के कारण छर्रे लगे हैं। सेना ने प्रतिकूल परिस्थितियों में अपने जवानों के अदम्य साहस और पेशेवर दृढ़ता की सराहना की है, जो आतंकियों का डटकर मुकाबला कर रहे हैं।

जैश-ए-मोहम्मद के विदेशी आतंकवादियों की घेराबंदी

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इस मुठभेड़ में 2 से 3 विदेशी आतंकवादी शामिल हैं, जिनके तार पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) से जुड़े होने की प्रबल संभावना है। ये आतंकी घेराबंदी तोड़कर भागने के लिए जंगलों और अंधेरे का सहारा ले रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेना, सीआरपीएफ (CRPF) और विशेष पुलिस दस्ते की अतिरिक्त टुकड़ियों को मौके पर भेजकर पूरे वन क्षेत्र को सील कर दिया गया है ताकि आतंकियों को भागने का कोई रास्ता न मिले।

एंटी-नवल और एंटी-टेरर तकनीक का इस्तेमाल

दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों में छिपे आतंकवादियों को बेअसर करने के लिए भारतीय सेना अब आधुनिक निगरानी तकनीक (Modern Surveillance Tech) का उपयोग कर रही है। आतंकियों की सटीक लोकेशन ट्रेस करने के लिए हाई-टेक ड्रोन और उन्नत रडार सिस्टम का सहारा लिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, खोजी कुत्तों (Sniffer Dogs) को भी घने जंगलों में तलाशी अभियान (Search Operation) में शामिल किया गया है। सेना और नागरिक प्रशासन के बीच गहरा समन्वय बना हुआ है ताकि ऑपरेशन को जल्द से जल्द सफल बनाया जा सके।

गणतंत्र दिवस पर सुरक्षा अलर्ट

यह मुठभेड़ ऐसे समय में हुई है जब गणतंत्र दिवस 2026 को लेकर पूरे जम्मू संभाग में हाई अलर्ट जारी है। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, सीमा पार से आतंकियों के आका शांति भंग करने के लिए घुसपैठ की कोशिशें तेज कर रहे हैं। पिछले 19 दिनों में जम्मू संभाग में यह तीसरी बड़ी मुठभेड़ है। किश्तवाड़ के अलावा डोडा, पुंछ, राजौरी और कठुआ जैसे पहाड़ी जिलों में कड़ी निगरानी रखी जा रही है, क्योंकि यहाँ के जंगलों में करीब 30-35 आतंकियों के छिपे होने की खुफिया जानकारी मिली है।

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