Kirti Azad On Ram Mandir: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब पूरी तरह से राजनीतिक तूल पकड़ चुका है। इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के फायरब्रांड सांसद कीर्ति आजाद ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सीधे कठघरे में खड़ा किया है। कीर्ति आजाद ने कड़े लहजे में कहा कि जब देश के करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र और उसकी प्रबंधकीय कार्यप्रणाली पर गंभीर उंगलियां उठ रही हैं, तो मंदिर ट्रस्ट की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह सामने आकर देश की जनता को स्पष्ट और बिंदुवार जवाब दे।
मुलायम सिंह यादव के पद्म सम्मान को लेकर BJP की कथनी-करनी पर दागे सवाल
बताते चले कि, सांसद कीर्ति आजाद ने अपने बयान में इतिहास और वर्तमान के राजनीतिक विरोधाभासों को उजागर करते हुए सत्ताधारी दल पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने याद दिलाया कि बीजेपी अक्सर सार्वजनिक मंचों से यह आरोप मढ़ती आई है कि अयोध्या आंदोलन के दौरान कारसेवकों पर गोली चलवाने के मुख्य जिम्मेदार उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव थे। टीएमसी नेता ने इसी बिंदु पर सरकार को घेरते हुए बड़ा सवाल उछाला “अगर भाजपा का आधिकारिक स्टैंड आज भी यही है और वह मुलायम सिंह जी को उस दौर की हिंसक घटनाओं का दोषी मानती है, तो फिर केंद्र सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक ‘पद्म विभूषण’ (संशोधित) से क्यों नवाजा? इस दोहरे मापदंड का जवाब जनता को मिलना चाहिए।”
प्रशासनिक नियुक्तियों पर उठाए गंभीर सवाल
अपने तीखे हमलों के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए टीएमसी सांसद ने पूर्व नौकरशाह नृपेंद्र मिश्रा का नाम लेकर सरकार की घेराबंदी तेज कर दी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उस ऐतिहासिक कालखंड की अप्रिय घटनाओं और प्रशासनिक फैसलों को लेकर तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध या विवादित थी, तो फिर उन्हीं चेहरों को बाद में देश के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में इतनी महत्वपूर्ण और संवेदनशील जिम्मेदारियां क्यों सौंपी गईं? इतना ही नहीं, उन्हें राम मंदिर निर्माण का सुपरविजन करने वाली सबसे शक्तिशाली समिति का सर्वेसर्वा (प्रमुख) क्यों बनाया गया? कीर्ति आजाद के अनुसार, इन कड़ियों को जोड़े बिना सच्चाई सामने नहीं आ सकती।
जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की पुरजोर मांग
प्रेस वार्ता के अंत में कीर्ति आजाद ने साफ तौर पर कहा कि राम मंदिर निर्माण और वहां की सुरक्षा व वित्तीय व्यवस्थाओं की देखरेख करने वाली समिति के शीर्ष पदाधिकारियों से कड़ाई से पूछताछ की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि इस पूरे कथित वित्तीय घोटाले और अनियमितता के आरोपों की एक स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। टीएमसी सांसद ने जोर देकर कहा कि रामलला का मंदिर करोड़ों हिंदुओं की अटूट श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है; ऐसे पावन स्थल से जुड़े किसी भी विवाद या भ्रष्टाचार के आरोपों को हल्के में नहीं छोड़ा जा सकता। मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता लाना बेहद जरूरी है और जो भी कड़वे तथ्य हैं, उन्हें बिना छिपाए तुरंत देश की जनता के सामने सार्वजनिक किया जाना चाहिए।










