Khushbu Sundar Statement: डीएमके नेता उद्यनिधि एक्ट्रेस तृषा कृष्णन को लेकर दिए गए कथित डबल मीनिंग कमेंट के बाद विवादों में घिर गए हैं। उनके बयान को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। मामले में पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था, हालांकि बाद में वह अपने घर लौट आए। अब इस पूरे विवाद पर बीजेपी नेता और अभिनेत्री खुशबू सुंदर ने भी कड़ी आपत्ति जताई है।
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खुशबू सुंदर ने उठाए महिलाओं के सम्मान पर सवाल
खुशबू सुंदर ने एक बातचीत के दौरान उदयनिधि स्टालिन पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें खुद को नेता कहने में शर्म महसूस करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीति में महिलाओं के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल लंबे समय से देखने को मिलता रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह की टिप्पणी से कोई हैरानी नहीं हुई, क्योंकि इससे पहले भी कई मौकों पर महिलाओं के खिलाफ ऐसी सोच सामने आती रही है। उनके मुताबिक, किसी भी सार्वजनिक मंच से किसी महिला के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली भाषा का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता।
‘महिलाओं को निशाना बनाना बंद करना चाहिए’
खुशबू ने सवाल उठाया कि आखिर किसी महिला के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने का अधिकार किसी को कैसे मिल सकता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक बहस में अपनी बात रखने के लिए महिलाओं को निशाना बनाना सही तरीका नहीं है। उन्होंने कहा कि एक मजबूत नेता वही होता है जो बिना किसी महिला का अपमान किए अपनी बात रख सके। उनके अनुसार, किसी महिला के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करना नेतृत्व क्षमता को नहीं दिखाता, बल्कि कमजोर मानसिकता को दर्शाता है।
उदयनिधि स्टालिन से उम्मीद थी अलग सोच की
खुशबू सुंदर ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि उदयनिधि स्टालिन युवा नेता होने के कारण महिलाओं के सम्मान और भाषा की मर्यादा को बेहतर समझेंगे। उन्होंने कहा कि उनके पद और जिम्मेदारियों को देखते हुए इस तरह की टिप्पणी और भी निराशाजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सबसे बड़ी चिंता यह है कि ऐसे बयानों के बाद भी कई बार नेताओं में पछतावे की भावना दिखाई नहीं देती। उनके मुताबिक, सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों को अपनी भाषा और व्यवहार को लेकर ज्यादा जिम्मेदारी दिखानी चाहिए।
पुराने मामलों का भी किया जिक्र
खुशबू सुंदर ने डीएमके से जुड़े पुराने विवादों का हवाला देते हुए कहा कि पहले भी कुछ नेताओं पर महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप लग चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि ऐसे मामलों में कार्रवाई के बाद भी कई बार स्थिति ज्यादा समय तक नहीं बदलती। उन्होंने कहा कि राजनीति में असली ताकत दिखानी है तो महिलाओं का सम्मान करना सीखना होगा। किसी महिला को अपमानित करके कोई व्यक्ति खुद को मजबूत नेता साबित नहीं कर सकता।
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‘नेतृत्व की पहचान सम्मान से होती है’
खुशबू ने कहा कि एक सच्चे नेता की पहचान उसके व्यवहार और विचारों से होती है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर कोई खुद को मजबूत और जिम्मेदार नेता मानता है, तो उसे बिना किसी महिला का अपमान किए राजनीति करके दिखाना चाहिए।










