Khatu Shyam Mela 2026: जानें क्यों खास है इस बार का खाटू मेला और क्यों उमड़ेगा आस्था का सैलाब!

राजस्थान के सीकर जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध खाटूधाम में वार्षिक फाल्गुन लक्खी मेले का भव्य आगाज हो चुका है, जिससे पूरी नगरी 'जय श्री श्याम' के जयकारों से गुंजायमान है।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

फ़रवरी 24, 2026

Khatu Shyam Mela 2026: राजस्थान के सीकर जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध खाटूधाम में वार्षिक फाल्गुन लक्खी मेला 2026 की शुरुआत 21 फरवरी से हो चुकी है। यह मेला 28 फरवरी तक चलेगा, जिसमें देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु ‘हारे के सहारे’ के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

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27 फरवरी को क्यों उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भारी भीड़?

Khatu Shyam Mela 2026
क्यों खास है इस बार का खाटू मेला

इस मेले का सबसे महत्वपूर्ण और पावन दिन 27 फरवरी (फाल्गुन शुक्ल एकादशी) है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन बाबा श्याम का जन्मोत्सव मनाया जाता है। एकादशी के दिन खाटू नगरी में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ता है कि पैर रखने तक की जगह नहीं होती। भक्त बाबा को जन्मदिन की बधाई देने के लिए घंटों कतारों में खड़े रहते हैं। इस दिन मंदिर में विशेष श्रृंगार, छप्पन भोग और भव्य भजन संध्याओं का आयोजन किया जाता है।

जानें बाबा खाटू श्याम के बारे में

खाटूश्याम जी को भगवान श्रीकृष्ण का कलियुग अवतार माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, वे महाभारत काल के महान योद्धा बर्बरीक थे, जो पांडु पुत्र भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। बर्बरीक के पास ऐसे तीन बाण थे जिनसे वे संपूर्ण ब्रह्मांड को जीत सकते थे। उनकी शक्ति और धर्म के प्रति समर्पण को देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे उनका शीश दान में मांग लिया। बर्बरीक के इस महान बलिदान से प्रसन्न होकर कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में वे उनके नाम ‘श्याम’ से पूजे जाएंगे।

बाबा खाटू श्याम से जुड़ी 10 खास बातें

शीश का दान: महाभारत युद्ध के दौरान बर्बरीक ने श्रीकृष्ण के कहने पर अपना शीश दान कर दिया था, इसलिए यहाँ उनके शीश की पूजा होती है।

हारे का सहारा: दुनिया से हार चुके व्यक्ति को बाबा श्याम सहारा देते हैं, इसीलिए उन्हें ‘हारे का सहारा’ कहा जाता है।

पांडव कुल के वंशज: बर्बरीक भीम के पौत्र और घटोत्कच व माता अहिलवती के पुत्र थे।

तीन बाणधारी: उन्हें शिवजी से तीन ऐसे बाण प्राप्त थे, जिनसे वे किसी भी युद्ध का परिणाम पल भर में बदल सकते थे।

Khatu Shyam Mela 2026
क्यों खास है इस बार का खाटू मेला

कलियुग के अवतारी: श्रीकृष्ण के वरदान स्वरूप वे कलियुग के सबसे जाग्रत देव माने जाते हैं।

निशान यात्रा की महिमा: श्रद्धालु मीलों पैदल चलकर बाबा को रंग-बिरंगे ‘निशान’ (केसरिया ध्वज) अर्पित करते हैं।

खाटूधाम की अवस्थिति: यह प्रसिद्ध मंदिर राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है, जो रींगस रेलवे स्टेशन के पास है।

अटूट आस्था: माना जाता है कि खाटू की मिट्टी का तिलक लगाने मात्र से भक्तों के कष्ट दूर हो जाते हैं।

विशेष भोग: बाबा को देशी घी का चूरमा और इत्र अत्यंत प्रिय है।

लक्खी मेले का वैभव: फाल्गुन मास का यह मेला भारत के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है, जहाँ भक्तों की संख्या लाखों (लक्खी) में होती है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।