Khargone Navgraha Mandir: मध्य प्रदेश का खरगोन जिला न केवल अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ स्थित सूर्य प्रधान नवग्रह मंदिर इसे पूरे देश के आध्यात्मिक मानचित्र पर एक विशिष्ट स्थान दिलाता है। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर, जब सूर्यदेव उत्तरायण होते हैं, इस मंदिर की महिमा देखते ही बनती है। साल 2026 में 14 जनवरी को मनाए जाने वाले इस पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में अभी से भारी उत्साह है।
मकर संक्रांति से पहले शुक्र देवता का मकर राशि में प्रवेश, 3 राशियों के लिए खुशियों की शुरुआत
देश का इकलौता सूर्य प्रधान नवग्रह मंदिर

कुंदा नदी के पावन तट पर स्थित यह मंदिर लगभग 300 वर्ष प्राचीन है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी अनूठी वास्तुकला है, जो पूरी तरह से ज्योतिष शास्त्र के सिद्धांतों पर आधारित है। यह मंदिर मानव जीवन के आधार—7 दिन, 12 राशि, 12 महीने और 9 ग्रहों के गणितीय मान को ध्यान में रखकर बनाया गया है। आमतौर पर मंदिरों में किसी एक ग्रह की प्रधानता होती है, लेकिन यहाँ गर्भगृह में स्वयं भगवान सूर्यदेव नौ ग्रहों के साथ विराजमान हैं। इसी कारण इसे ‘पीताम्बरी ग्रह शांति पीठ’ के नाम से भी जाना जाता है, जहाँ ग्रहों की अधिष्ठात्री देवी मां बगलामुखी की उपस्थिति भी विशेष फलदायी मानी जाती है।
मकर संक्रांति का महत्व
धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से मकर संक्रांति का दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं और दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाते हैं। पंडित लोकेश जागीरदार के अनुसार, सूर्य को नवग्रहों का राजा माना गया है। मकर संक्रांति के दिन उदयमान सूर्य को अर्घ्य देने और इस मंदिर में पूजन करने से जातक पर पूरे वर्ष नवग्रहों की अनुकूल कृपा बनी रहती है। यह दिन जीवन में नई शुरुआत, शांति और समृद्धि का प्रतीक है।
दान पोटली की परंपरा
खरगोन के इस मंदिर में श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का एक बड़ा कारण यहाँ की ‘दान पोटली’ परंपरा है। श्रद्धालु अपनी कुंडली के अनुसार पीड़ित ग्रह से संबंधित विशिष्ट दान पोटली मंदिर में अर्पित करते हैं। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर विशेष हवन और अनुष्ठान में भाग लेने से ग्रह दोष, शारीरिक व्याधियां और मानसिक बाधाएं दूर होती हैं।
आयोजन की भव्यता

14 जनवरी 2026 को होने वाले इस उत्सव की तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं। सुबह कुंदा नदी में पवित्र स्नान के पश्चात, हजारों की संख्या में श्रद्धालु कतारबद्ध होकर सूर्यदेव के दर्शन करेंगे। मंदिर प्रशासन द्वारा विशेष महाआरती और भंडारे का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें मध्य प्रदेश के अलावा पड़ोसी राज्यों जैसे महाराष्ट्र और राजस्थान से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
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