UN New Map : संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किए गए ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव को लेकर भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रविवार, 6 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के जरिए भारत का रुख सामने रखा। उन्होंने बताया कि प्रस्ताव का उद्देश्य दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों, खासकर अफ्रीका, को नक्शों में अधिक संतुलित और समान प्रतिनिधित्व देना है।
समान क्षेत्र वाले नक्शों को बढ़ावा देने की कोशिश
रणधीर जायसवाल के अनुसार, इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य ‘इक्वल एरिया मैप प्रोजेक्शन’ के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना है। ऐसे नक्शों में पृथ्वी के अलग-अलग महाद्वीपों और भू-भागों के वास्तविक सापेक्ष क्षेत्रफल को अधिक सही तरीके से दर्शाया जाता है। मौजूदा कई नक्शों में प्रोजेक्शन की वजह से कुछ देशों और महाद्वीपों का आकार वास्तविकता से काफी बड़ा या छोटा दिखाई देता है।
किसी खास विश्व मानचित्र को मंजूरी नहीं
भारत ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह प्रस्ताव किसी एक विशेष वैश्विक नक्शे को अपनाने या उसे आधिकारिक मान्यता देने से संबंधित नहीं है। प्रस्ताव का उद्देश्य केवल समान-क्षेत्र वाले मानचित्र प्रोजेक्शन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। इसमें अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित इलाकों या किसी स्थान के नाम को लेकर कोई राजनीतिक फैसला नहीं किया गया है।
भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में किया मतदान
जायसवाल ने बताया कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। इसके साथ ही भारत ने अपने वोट की व्याख्या करते हुए समान-क्षेत्र वाले नक्शों में प्रतिनिधित्व के मूल सिद्धांत का समर्थन किया। भारत ने दोहराया कि प्रस्ताव को किसी खास मैप प्रोजेक्शन या किसी देश की सीमाओं के चित्रण का समर्थन नहीं माना जाना चाहिए।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर भारत का रुख स्पष्ट
भारत ने अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मुद्दों पर भी स्पष्ट संदेश दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत के संप्रभु क्षेत्र, जिसमें जम्मू-कश्मीर और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के इलाके शामिल हैं, उन्हें भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुसार ही प्रदर्शित किया जाना चाहिए। भारत के अनुसार किसी भी गलत या भ्रामक नक्शे को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
गलत मानचित्र को लेकर भारत की दोटूक बात
भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के संबंध में रुख पूरी तरह स्पष्ट है। किसी अंतरराष्ट्रीय मंच या दस्तावेज में भारतीय क्षेत्र को गलत तरीके से दिखाए जाने पर भारत लगातार आपत्ति दर्ज कराता रहा है। इसी वजह से ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव पर भारत का स्पष्टीकरण खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रस्ताव को मिला भारी अंतरराष्ट्रीय समर्थन
संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किए गए इस प्रस्ताव को व्यापक समर्थन मिला। रिपोर्ट के अनुसार, कुल 164 देशों ने इसके पक्ष में मतदान किया। वहीं अमेरिका ने प्रस्ताव का विरोध किया, जबकि छह देश मतदान से दूर रहे। प्रस्ताव का मूल उद्देश्य दुनिया के नक्शों में देशों और महाद्वीपों के क्षेत्रफल को वास्तविक अनुपात के ज्यादा करीब दिखाने की दिशा में प्रयास करना है।
पाकिस्तान के लिए भारत का संदेश अहम
हालांकि प्रस्ताव सीधे तौर पर किसी विवादित क्षेत्र या सीमा निर्धारण से संबंधित नहीं है, लेकिन भारत ने अपने स्पष्टीकरण के जरिए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर अपना पुराना रुख फिर स्पष्ट कर दिया है। भारत का कहना है कि उसके संप्रभु क्षेत्रों को केवल आधिकारिक भारतीय मानचित्र के अनुरूप ही दर्शाया जाना चाहिए। इससे पाकिस्तान के साथ जुड़े मानचित्र और क्षेत्रीय विवादों के संदर्भ में भारत का संदेश एक बार फिर स्पष्ट हो गया है।
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