Kharge Letter to Nadda: देश की राजनीति में एक बार फिर तीखी हलचल देखने को मिल रही है। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने हाल ही में सामने आए बहुचर्चित ‘शुद्धिकरण’ विवाद को लेकर गहरी नाराजगी जताई है। इस संवेदनशील मामले पर असंतोष व्यक्त करते हुए खरगे ने सीधे तौर पर राज्यसभा में सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को एक पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने इस पूरी घटना पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और दोषियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
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करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा है मुद्दा: खरगे
अपने पत्र में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह पूरा विवाद उनके व्यक्तिगत पद या किसी राजनीतिक पार्टी के अध्यक्ष होने की सीमा से बहुत ऊपर है। यह विषय देश के करोड़ों नागरिकों की आहत भावनाओं और सामाजिक सौहार्द से गहराई से जुड़ा हुआ है। खरगे का मानना है कि इस तरह की घटनाएं समाज में वैमनस्य को बढ़ावा देती हैं, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त कदम उठाया जाना चाहिए ताकि देश में न्याय की उम्मीद जिंदा रहे।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को निर्देश देने की मांग
मल्लिकार्जुन खरगे ने जेपी नड्डा से आग्रह किया है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को स्पष्ट निर्देश दें। उन्होंने मांग की है कि हल्द्वानी में घटित इस ‘शुद्धिकरण’ की घटना में संलिप्त और सीधे तौर पर शामिल लोगों के खिलाफ तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए। खरगे का कहना है कि घटना को इतना समय बीत जाने के बावजूद अभी तक पुलिस द्वारा कोई ठोस कानूनी कार्रवाई न किया जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने हैरानी जताई कि इस तरह की आपत्तिजनक हरकतों के बाद भी आरोपी कानून की गिरफ्त से बाहर क्यों हैं।
राजनीतिक गलियारों में तेज हुई हलचल
मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा जेपी नड्डा को लिखे गए इस पत्र के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी काफी बढ़ गई है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लगातार तूल दे रहे हैं और सरकार तथा स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि सत्ता पक्ष की ओर से इस पत्र पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है और हल्द्वानी की इस घटना को लेकर प्रशासन क्या सख्त कदम उठाता है।
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