Khan Sir on NTA NEET Paper Leak: NTA पर खान सर का बड़ा हमला: “10 रुपये वाला डायपर लीक नहीं होता, इनका पेपर लीक हो जाता है”

जाने-माने शिक्षक खान सर ने नीट पेपर लीक पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि “पेपर लीक लाखों बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ है” और इसे शिक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता बताया। उनका तंज था कि

Khan Sir on NTA NEET Paper Leak

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 12, 2026

Khan Sir on NTA NEET Paper Leak: नीट (NEET) परीक्षा पत्र लीक मामले पर मशहूर शिक्षक खान सर का गुस्सा फूट पड़ा है। अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए चर्चित खान सर ने न केवल परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाए, बल्कि सरकार और जांच एजेंसियों को भी जमकर आड़े हाथों लिया। उन्होंने वर्तमान स्थिति को छात्रों के भविष्य के साथ एक क्रूर मजाक करार दिया है।

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NTA का नया नाम: ‘नेवर ट्रस्टेबल एजेंसी’

खान सर ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि इसका नाम अब ‘नेशनल टेस्टिंग एजेंसी’ के बजाय ‘नेवर ट्रस्टेबल एजेंसी’ (कभी भी भरोसा न करने वाली संस्था) होना चाहिए। उन्होंने तुलनात्मक लहजे में एक व्यंग्य करते हुए कहा, “10 रुपये वाला बच्चों का डायपर तक लीक नहीं होता, लेकिन इन लोगों का पेपर लीक हो जाता है।”

उनके अनुसार, यह बेहद शर्मनाक है कि पेपर लीक की जानकारी सरकारी एजेंसियों को नहीं, बल्कि खुद छात्रों को मिली और उन्होंने सरकार को इसके बारे में सूचित किया। खान सर ने सवाल उठाया कि जिस एजेंसी को परीक्षा कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, क्या वह वास्तव में परीक्षा आयोजित करने के लिए है या पेपर लीक कराने के लिए?

जांच प्रक्रिया और सीबीआई पर हमला

खान सर ने पेपर लीक की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपने के फैसले पर भी असंतोष जाहिर किया। उन्होंने सीबीआई की तुलना ‘नोकिया’ के पुराने मोबाइल से करते हुए कहा कि यह संस्था अब अपनी प्रासंगिकता खो चुकी है। उन्होंने तर्क दिया सीबीआई का गठन अंग्रेजों के समय हुआ था, जिसका उद्देश्य अक्सर मुद्दों को सुलझाने के बजाय उन्हें दबाना होता है। खान सर के मुताबिक, अगर जांच सीबीआई के पास रही, तो बच्चों की एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई पूरी हो जाएगी लेकिन जांच का नतीजा नहीं आएगा। साल 2024 में भी पेपर लीक हुआ था, जिसकी सीबीआई जांच का कोई ठोस परिणाम नहीं निकला, जिससे अपराधियों का मनोबल और बढ़ गया है।

समाधान और कड़ी सजा की मांग

इस संकट से उबरने के लिए खान सर ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव और मांगें रखी हैं, खान सर का मानना है कि इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त (Retired) जज की देखरेख में होनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मामले में व्यक्तिगत रूप से दखल देने की अपील की है ताकि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके। जांच एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरी होनी चाहिए ताकि छात्रों का मनोबल न टूटे।

छात्रों के मनोबल और राष्ट्रीय छवि पर प्रभाव

खान सर ने आगाह किया कि पेपर लीक केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं है, बल्कि यह देश की राष्ट्रीय छवि को धूमिल करता है। इससे अमीर और रसूखदार लोगों के लिए पिछले दरवाजे से रास्ते खुल जाते हैं, जबकि मेहनती छात्रों का भरोसा टूट जाता है।

उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि जब भी पेपर लीक होता है, तो अगली बार एजेंसी ‘बदला’ लेने की भावना से इतना कठिन पेपर बनाती है कि छात्रों की जान निकल जाती है। उन्होंने 1997 के आईआईटी-जेईई पेपर लीक और 2024 के नीट पेपर का उदाहरण देकर बताया कि कैसे विफलता का खामियाजा अंततः निर्दोष छात्रों को ही भुगतना पड़ता है।

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