Ketan Murder Case : केतन अग्रवाल हत्याकांड में बड़ा खुलासा, लोहागढ़ किले में पुलिस ने किया क्राइम सीन रीक्रिएशन

केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में बड़ा मोड़ सामने आया है, जहां पुलिस ने लोहागढ़ किले पर क्राइम सीन रीक्रिएशन कर पूरे घटनाक्रम को फिर से समझने की कोशिश की। इस दौरान कई अहम सुराग मिले हैं, जिससे मामले की परतें और खुलती जा रही हैं। आखिर क्या था असली घटनाक्रम और कौन-कौन शामिल था, जानिए पूरी रिपोर्ट।

Ketan Murder Case

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 1, 2026

Ketan Murder Case :  पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में पुलिस की जांच अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच गई है। हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए पुणे ग्रामीण पुलिस ने आरोपियों को घटना स्थल यानी लोहागढ़ किले पर ले जाकर क्राइम सीन को फिर से दोहराया (रिक्रिएशन)। सबसे पहले मुख्य आरोपी सिया गोयल को किले में उस स्थान पर ले जाया गया, जहाँ से केतन को धक्का देकर मौत के घाट उतारा गया था। इसके बाद पुलिस दूसरे आरोपी चेतन चौधरी को भी उसी स्थान पर ले गई। पुलिस अब दोनों आरोपियों के बयानों का मिलान कर रही है ताकि उनकी साजिश के हर पहलू की सच्चाई सामने आ सके। वर्तमान में दोनों आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है।

शादी से बचने के लिए रची गई थी खौफनाक साजिश

पुलिस जांच में इस हत्याकांड के पीछे के चौंकाने वाले कारणों का खुलासा हुआ है। सिया गोयल ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया है कि वह केतन अग्रवाल से विवाह नहीं करना चाहती थी। उसे डर था कि यदि वह सीधे तौर पर शादी से इनकार करती है, तो उसके परिवार की बदनामी होगी। इस सामाजिक दबाव से बचने के लिए उसने चेतन चौधरी के साथ मिलकर केतन को रास्ते से हटाने की साजिश रची। पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले को एक दुर्घटना दिखाने की कोशिश की गई थी, लेकिन आरोपियों की योजना पूरी तरह से सुनियोजित थी।

इंटरनेट पर सर्च किए थे हत्या के तरीके और किए थे रिहर्सल

जांचकर्ताओं ने पाया है कि यह हत्याकांड अचानक आवेश में आकर नहीं, बल्कि बेहद सावधानी से तैयार की गई एक सोची-समझी साजिश थी। आरोपियों ने इस घटना को अंजाम देने से कई दिन पहले ही इंटरनेट पर केतन को मारने के विभिन्न तरीकों के बारे में सर्च किया था। इतना ही नहीं, पुलिस को यह भी पता चला है कि सिया और चेतन ने पुलिस की संभावित पूछताछ से बचने के लिए पहले से ही जवाब तैयार कर रखे थे। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने मुख्य घटना से करीब चार से पांच दिन पहले किसी अन्य स्थान पर और फिर लोहागढ़ किले में हत्या का पूर्वाभ्यास (रिहर्सल) भी किया था।

14 जून को हुआ था हत्या का पहला असफल प्रयास

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने किले के चप्पे-चप्पे की छानबीन की है। पुलिस को संदेह है कि केतन अग्रवाल को मारने का पहला प्रयास कथित तौर पर 14 जून को ही किया गया था, जो उस समय सफल नहीं हो सका था। आरोपियों ने पहले ही लोहागढ़ किले के भूगोल और वहां के विभिन्न स्थानों की बारीकी से रेकी की थी ताकि वे बिना किसी गवाह के अपने लक्ष्य को पूरा कर सकें। वे पूरी तरह से आश्वस्त थे कि वे पुलिस और कानून की आंखों में धूल झोंकने में कामयाब रहेंगे।

पुलिस निगरानी और कानूनी कार्रवाई की दिशा

इस हत्याकांड ने पूरे पुणे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। केतन अग्रवाल के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए पुलिस की टीमें लगातार सबूत जुटाने में लगी हैं। सिया और चेतन द्वारा अपनाई गई डिजिटल फुटप्रिंट्स और किले के सीसीटीवी फुटेज ने पुलिस को आरोपियों के नेटवर्क को समझने में काफी मदद की है। फिलहाल, पुलिस अब उन सभी कड़ियों को जोड़ रही है जो इस हत्याकांड के पीछे की अंतिम साजिश तक ले जाती हैं। आने वाले दिनों में पुलिस इस मामले में विस्तृत चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि हत्या की यह योजना कितनी भयावह और क्रूर थी।

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