Kerala Election 2026: केरल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों में राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कुल 140 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) लगभग 83 सीटों पर आगे दिखाई दे रहा है। वहीं, वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) करीब 53 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि अन्य उम्मीदवार लगभग 4 सीटों पर आगे चल रहे हैं। इन शुरुआती आंकड़ों से यह संकेत मिल रहा है कि इस बार मुकाबले में कांग्रेस ने बढ़त हासिल की है और लेफ्ट को अपेक्षाकृत नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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कांग्रेस और लेफ्ट के बीच सीधी टक्कर
केरल की राजनीति में मुख्य मुकाबला हमेशा से एलडीएफ और यूडीएफ के बीच रहा है। इस बार भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। एक ओर मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में एलडीएफ सत्ता बचाने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी ओर कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ सरकार बदलने के लक्ष्य के साथ मैदान में है। हालांकि, इस बार कुछ सीटों पर भारतीय जनता पार्टी की उपस्थिति भी मजबूत मानी जा रही है, जिससे कई क्षेत्रों में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है।
प्रमुख दलों के ताजा रुझान
चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार विभिन्न दलों की स्थिति इस प्रकार दिख रही है। कांग्रेस लगभग 34 सीटों पर, CPI(M) करीब 18 सीटों पर, IUML 11 सीटों पर, CPI 3 सीटों पर, KEC 2 सीटों पर, KEC(M) 2 सीटों पर और अन्य उम्मीदवार लगभग 9 सीटों पर आगे हैं। सबसे बड़ी चर्चा का विषय यह भी है कि मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन अपनी ही सीट पर पीछे चल रहे हैं, जिससे राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।
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चुनावी माहौल और मतदान प्रक्रिया
केरल में 9 अप्रैल 2026 को एक चरण में मतदान संपन्न हुआ था। राज्य में सरकार बनाने के लिए 71 सीटों का बहुमत आवश्यक होता है। इस बार मतदान के दौरान मतदाताओं में उत्साह देखने को मिला और कई इलाकों में भारी मतदान दर्ज किया गया। एग्जिट पोल के परिणामों ने पहले ही मुकाबले को काफी करीबी बताया था। कुछ सर्वे में एलडीएफ की वापसी की संभावना जताई गई थी, जबकि कुछ में सत्ता परिवर्तन की बात कही गई थी।
चुनावी मुद्दे और राजनीतिक रणनीति
इस चुनाव में एलडीएफ सरकार ने अपने विकास कार्यों और योजनाओं को मुख्य आधार बनाया। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में सड़क, पुल और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स को जनता के सामने रखा गया। दूसरी ओर, यूडीएफ ने सरकार विरोधी लहर और बदलाव की जरूरत को अपना प्रमुख मुद्दा बनाया। कांग्रेस का दावा रहा कि राज्य में नई राजनीतिक दिशा की आवश्यकता है और जनता बदलाव के पक्ष में है।
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