Kulgam Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में शुक्रवार (31 जुलाई) की शाम को हुए एक कायराना आतंकवादी हमले के दौरान छत्तीसगढ़ के दो बेकसूर प्रवासी श्रमिकों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस दुखद घटना के बाद अब इस आतंकी हमले की टाइमिंग और इसके पीछे की वजहों को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की तरफ से दिए गए एक बयान पर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता रविंदर रैना ने उनके इस बयान को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए तीखा पलटवार किया है।
फारूक अब्दुल्ला का बयान
बताते चले कि, विवादों में घिरे अपने बयान के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि यह अभी तक साफ तौर पर पता नहीं चल पाया है कि इस हमले को किसने अंजाम दिया है और इसके पीछे असली मास्टरमाइंड कौन हैं। उन्होंने मांग की थी कि हमलावरों की सही पहचान के लिए निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सवालिया लहजे में यह भी कहा था कि उनकी समझ से परे है कि ऐसे आतंकी हमले ठीक उसी समय क्यों होते हैं जब राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग जोर पकड़ती है।
रविंदर रैना का तीखा पलटवार
फारूक अब्दुल्ला के इस विवादास्पद बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता रविंदर रैना ने कहा कि वे एक बहुत ही वरिष्ठ और जिम्मेदार व्यक्ति हैं, लेकिन कुलगाम के आतंकी हमले के संदर्भ में दिया गया उनका यह बयान बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब आतंकवादियों द्वारा किसी घटना में निर्दोष मजदूरों की बेरहमी से जान ले ली जाती है, तो देश का हर नागरिक और राजनीतिक नेता यही उम्मीद करता है कि सभी लोग आतंकवाद के खिलाफ पूरी तरह एकजुट होकर खड़े हों, न कि इस तरह के अटकलबाजी भरे बयान देकर जनता के बीच भ्रम फैलाया जाए या असली अपराधियों से ध्यान भटकाया जाए।
हत्यारों की निंदा की बजाय राजनीति
भाजपा नेता ने आगे अपनी बात रखते हुए कहा कि फारूक अब्दुल्ला अप्रत्यक्ष रूप से इस जघन्य आतंकी हमले को जायज ठहराने का प्रयास कर रहे हैं और इसे सीधे तौर पर राज्य के दर्जे के मुद्दे के साथ जोड़ रहे हैं, जो कि पूरी तरह से निंदनीय है। उन्होंने कहा कि देश के हर राजनीतिक नेता का यह कर्तव्य बनता है कि वे हत्यारे आतंकवादियों की खुलकर आलोचना करें और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताएं। आतंकवाद जैसी नासूर समस्या को हमेशा राष्ट्रीय एकता के बल पर ही परास्त किया जा सकता है, न कि इस तरह के दुखद हादसों का राजनीतिक फायदा उठाने के लिए इस्तेमाल करके। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य का दर्जा एक संवैधानिक और लोकतांत्रिक मुद्दा है, जिसे आतंकवाद से जोड़ना सरासर अनुचित है।
उमर अब्दुल्ला द्वारा मुआवजे का ऐलान
एक तरफ जहां इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज है, वहीं दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कुलगाम जिले में हुए इस आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में भर्त्सना की है। शनिवार (1 अगस्त) के दिन उन्होंने आधिकारिक घोषणा करते हुए दोनों मृतक श्रमिकों के शोकसंतप्त परिजनों को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने का ऐलान किया है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि यह मुआवजा राशि उन परिवारों को हुई अपूरणीय क्षति की भरपाई तो नहीं कर सकती, जो लोग कश्मीर में पूरी ईमानदारी के साथ अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए आए थे। गौरतलब है कि दक्षिण कश्मीर के कुलगाम के केलम इलाके में शुक्रवार देर शाम ईंट-भट्टे पर हुए इस खौफनाक हमले में छत्तीसगढ़ निवासी दीपक रात्रे और भूपिंदर अपनी जान गंवा बैठे थे।










