Kerala Election 2026 : केरल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए कांग्रेस ने अपनी कमर कस ली है। पार्टी ने शुक्रवार को 40 प्रभावशाली ‘स्टार प्रचारकों’ की आधिकारिक सूची जारी की है, जो राज्य के कोने-कोने में जाकर पार्टी के पक्ष में माहौल बनाएंगे। इस फेहरिस्त में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को शामिल किया गया है, जिससे साफ है कि पार्टी केरल की सत्ता में वापसी के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती। सूची में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, और राहुल गांधी जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके अलावा, दक्षिण भारत की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले नेताओं को भी इस अभियान का हिस्सा बनाया गया है ताकि क्षेत्रीय समीकरणों को साधा जा सके।
दिग्गज नेताओं की फौज: शशि थरूर से लेकर कन्हैया कुमार तक शामिल
कांग्रेस द्वारा जारी इस विस्तृत सूची में अनुभवी और युवा चेहरों का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। प्रमुख नामों में प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, शशि थरूर और दीपा दासमुंशी शामिल हैं। साथ ही, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को भी केरल के मोर्चे पर तैनात किया गया है। सूची में सचिन पायलट, कन्हैया कुमार, इमरान प्रतापगढ़ी और पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन जैसे लोकप्रिय चेहरों को भी जगह दी गई है। राज्य स्तर के कद्दावर नेताओं जैसे रमेश चेन्नीथाला, के. सुधाकरण और वीडी साथीशन को भी स्टार प्रचारक बनाया गया है, जो स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं में जोश भरेंगे।
केरल चुनाव का पूरा कार्यक्रम: 9 अप्रैल को मतदान और 4 मई को नतीजे
भारत निर्वाचन आयोग ने केरल विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है, जिसके साथ ही पूरे राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। केरल की सभी सीटों पर एक ही चरण में मतदान संपन्न होगा। चुनाव आयोग के अनुसार, 16 मार्च को चुनावी अधिसूचना जारी की गई थी। नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया 23 मार्च से शुरू हुई और 26 मार्च को नाम वापसी की अंतिम तिथि थी। अब पूरे राज्य में 9 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। केरल के साथ-साथ अन्य चुनावी राज्यों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 23 मई को समाप्त हो रहा है।
त्रिकोणीय मुकाबले के आसार: भाजपा, कांग्रेस और लेफ्ट के बीच खींचतान
केरल की राजनीति परंपरागत रूप से कांग्रेस नीत यूडीएफ (UDF) और सीपीआईएम नीत एलडीएफ (LDF) के बीच घूमती रही है, लेकिन इस बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है। सीपीआईएम नेता हन्नान मोल्लाह ने भी स्वीकार किया है कि बीजेपी का वोट शेयर बढ़ा है, हालांकि उन्होंने भाजपा के सत्ता में आने की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया। लेफ्ट का मानना है कि भाजपा मुकाबले को त्रिकोणीय करने की कोशिश जरूर करेगी, लेकिन मुख्य लड़ाई अभी भी एलडीएफ और यूडीएफ के बीच ही सिमटी हुई है।
आचार संहिता और राजनीतिक दलों की रणनीति
चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद केरल में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। कांग्रेस अपनी स्टार प्रचारकों की फौज के जरिए विकास, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर राज्य सरकार को घेरने की योजना बना रही है। वहीं, सत्ताधारी लेफ्ट गठबंधन अपने पिछले कार्यकाल के कार्यों के दम पर फिर से जनादेश मांग रहा है। भाजपा ‘तीसरे विकल्प’ के रूप में उभरने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे और केंद्र की योजनाओं का सहारा ले रही है। 9 अप्रैल की वोटिंग यह तय करेगी कि केरल की जनता ‘बदलाव’ का रास्ता चुनती है या ‘निरंतरता’ पर भरोसा जताती है।
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