केन्या में भूखे रहकर मरने के लिए उकसाने वाला पादरी दोषी, सामूहिक कब्रों से मिले 400 से ज्यादा शव

 मोम्बासा  केन्या की एक अदालत ने अंधविश्वास और भुखमरी के जरिए सैकड़ों लोगों की मौत से जुड़े चर्चित 'डेथ कल्ट' मामले में स्वयंभू पादरी पॉल मैकेंजी और उसके 28 साथियों को हत्या का दोषी ठहरा दिया है। मोम्बासा की अदालत ने यह फैसला 190 बच्चों और एक वयस्क की मौत से जुड़े मामले में सुनाया। दोषियों को सजा 6 नवंबर को सुनाई जाएगी। अभियोजन के मुताबिक, मैकेंजी अपने अनुयायियों को यह विश्वास दिलाता था कि कयामत आने से पहले भूखे रहकर प्राण त्यागने से उन्हें सीधे स्वर्ग और मोक्ष की प्राप्ति होगी। शाकाहोला जंगल से मिली थीं सामूहिक कब्रें यह

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Published On :

अक्टूबर 22, 2026

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 मोम्बासा
 केन्या की एक अदालत ने अंधविश्वास और भुखमरी के जरिए सैकड़ों लोगों की मौत से जुड़े चर्चित 'डेथ कल्ट' मामले में स्वयंभू पादरी पॉल मैकेंजी और उसके 28 साथियों को हत्या का दोषी ठहरा दिया है।

मोम्बासा की अदालत ने यह फैसला 190 बच्चों और एक वयस्क की मौत से जुड़े मामले में सुनाया। दोषियों को सजा 6 नवंबर को सुनाई जाएगी। अभियोजन के मुताबिक, मैकेंजी अपने अनुयायियों को यह विश्वास दिलाता था कि कयामत आने से पहले भूखे रहकर प्राण त्यागने से उन्हें सीधे स्वर्ग और मोक्ष की प्राप्ति होगी।

शाकाहोला जंगल से मिली थीं सामूहिक कब्रें
यह सनसनीखेज मामला वर्ष 2023 में सामने आया था, जब एक स्थानीय नागरिक ने शाकाहोला जंगल में बच्चों की मौत की सूचना पुलिस को दी। इसके बाद शुरू हुए तलाशी और खुदाई अभियान में सामूहिक कब्रों से अब तक 400 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं।

जांच और अदालती कार्यवाही में सामने आया कि बच्चों को उनके परिजनों के सामने ही अलग कर भूखा रहने के लिए मजबूर किया गया, जिससे उनकी तड़प-तड़पकर मौत हो गई।

तीन चरणों में रची गई थी भुखमरी की योजना
जांच अधिकारियों के अनुसार, लोगों को भूख से मारने की साजिश बेहद सुनियोजित तरीके से तीन चरणों में तैयार की गई थी। पहले चरण में बच्चों को निशाना बनाया गया। इसके बाद महिलाओं और युवकों को भूखा रखा गया और अंत में पुरुषों को निशाना बनाने की तैयारी थी।

जांच में यह भी सामने आया कि मैकेंजी ने अपने अनुयायियों के बच्चों को स्कूल भेजने पर रोक लगा रखी थी और बीमार पड़ने पर इलाज कराने की भी मनाही कर दी थी।

पहले से थी जानकारी, फिर भी बचता रहा
अधिकारियों के मुताबिक, मैकेंजी की संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी प्रशासन को काफी पहले से थी। पुलिस ने 2017 में उसके ठिकाने पर छापेमारी की थी, जबकि 2019 में उसका चर्च भी बंद करा दिया गया था। इसके बावजूद वह कानून की पकड़ से बचकर शाकाहोला के घने जंगलों में पहुंच गया और वहां बिना किसी रोक-टोक के अपना नेटवर्क चलाता रहा।

52 अन्य हत्याओं का मामला भी लंबित
अदालत ने मैकेंजी की सभी दलीलों को खारिज करते हुए उसे और उसके 28 साथियों को दोषी करार दिया। हालांकि बचाव पक्ष ने इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की बात कही है। इस मामले में दोषियों को 6 नवंबर को सजा सुनाई जाएगी।

वहीं, मैकेंजी के खिलाफ 52 अन्य लोगों की हत्या से जुड़ा एक अलग मामला भी अदालत में विचाराधीन है, जिसमें उसने खुद को बेकसूर बताया है।

 

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